भारतीय शेयर बाजार का फिर से जलवा: ताइवान और दक्षिण कोरिया को पछाड़कर भारत बना एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इक्विटी मार्केट

भारतीय शेयर बाजार का फिर से जलवा: ताइवान और दक्षिण कोरिया को पछाड़कर भारत बना एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इक्विटी मार्केट

 

एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार ने फिर से ताइवान और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ दिया है। जानें मार्केट कैपिटलाइजेशन के आंकड़ों का विश्लेषण।

भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी उपलब्धि लेकर आया है। एशियाई बाजारों में आई भारी गिरावट के बीच, भारत ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है और मार्केट कैपिटलाइजेशन (एम-कैप) के मामले में ताइवान और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ दिया है। सोमवार दोपहर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारतीय स्टॉक मार्केट का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 4.36 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जबकि ताइवान और दक्षिण कोरिया का आंकड़ा 4.33 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर सिमट गया। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया के शेयर बाजार एक बड़े तकनीकी बिकवाली (tech-led sell-off) के दौर से गुजर रहे हैं।

टेक स्टॉक्स में भारी बिकवाली: ताइवान और दक्षिण कोरिया में कोहराम

सोमवार का दिन ताइवान और दक्षिण कोरियाई बाजारों के लिए एक काले दिन जैसा रहा। इन बाजारों में सेमीकंडक्टर और चिप बनाने वाली प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, एसके हिनिक्स और ताइवान की दिग्गज कंपनी टीएसएमसी (TSMC) के शेयरों में 11 फीसदी तक की इंट्राडे गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने न केवल निवेशकों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया, बल्कि सूचकांकों को भी रसातल में धकेल दिया। दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स ‘कोस्पी’ (KOSPI) एक समय 9 फीसदी तक गिर गया था, जिसके चलते बाजार में 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग को रोकना पड़ा। इसी तरह, ताइवान का ‘ताइएक्स’ (TAIEX) भी 4 फीसदी की गिरावट के साथ अपने पिछले बंद स्तर से काफी नीचे चला गया।

एआई-ड्रिवेन रैली का जादू और उसका अंत

पिछले कुछ महीनों में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में आई तेजी ने ताइवान और दक्षिण कोरियाई बाजारों को रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया था। इस एआई-ड्रिवेन रैली के चलते भारत वैश्विक बाजार रैंकिंग में पांचवें स्थान से फिसलकर सातवें स्थान पर आ गया था। उस दौरान दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.04 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया का छठा सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट बन गया था, जो ताइवान (5.15 ट्रिलियन डॉलर) के ठीक पीछे था। 2026 की शुरुआत से ही कोस्पी इंडेक्स ने असाधारण प्रदर्शन किया था, जिसमें साल-दर-साल आधार पर 221 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई थी। हालांकि, सोमवार की बिकवाली ने इस तेजी के गुब्बारे को एक झटके में फुला दिया।

टीएसएमसी और चिप दिग्गजों की हालत खस्ता

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण चिप निर्माण में लगी कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन है। ताइवान की ‘टीएसएमसी’ (TSMC), जो एआई क्रांति की रीढ़ मानी जाती है, का शेयर भी दबाव में है। सोमवार को इसमें 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 2,295 न्यू ताइवान डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। जब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण टेक कंपनियां गिरती हैं, तो उसका असर पूरे वैश्विक बाजार पर पड़ता है, और एशियाई बाजार इसका सबसे प्रमुख केंद्र बन गए हैं।

भारतीय बाजार की मजबूती का कारण

भारत का मार्केट कैप ताइवान और दक्षिण कोरिया से आगे निकलना यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू इक्विटी बाजार में अब वैश्विक झटकों को सहने की क्षमता पहले से कहीं अधिक है। भारतीय बाजार में विविधता है और यह केवल तकनीकी शेयरों पर निर्भर नहीं है, जिससे जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी बिकवाली होती है, तो भारत का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से बेहतर रहता है। हालांकि, भारत में भी बिकवाली देखी गई है, लेकिन इसकी गति और गहराई ताइवान और दक्षिण कोरिया की तुलना में कम रही है, जिसके चलते यह बढ़त हासिल हुई है।

आगे का रास्ता और बाजार का मिजाज

निवेशकों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने का संकेत है। एआई-आधारित शेयरों में जो तेजी आई थी, वह अब करेक्शन (सुधार) के दौर से गुजर रही है। दक्षिण कोरियाई बाजार में ट्रेडिंग हॉल्ट का लगना यह बताता है कि निवेशकों के बीच घबराहट का स्तर कितना अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से अमेरिका में ब्याज दरों के फैसलों और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों पर निर्भर करेगी। भारत की यह वापसी एक अस्थायी राहत हो सकती है, लेकिन यह निश्चित रूप से भारतीय निवेशकों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला कदम है। अब देखना यह होगा कि क्या भारतीय बाजार अपनी इस रैंकिंग को आने वाले समय में बनाए रख पाता है या फिर तकनीकी शेयरों में रिकवरी के बाद फिर से दक्षिण कोरिया और ताइवान बाजी मार ले जाएंगे। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि वैश्विक बाजार अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं।

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