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वैश्विक AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में तेजी के बीच भारतीय आईटी शेयरों में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी IT इंडेक्स 3% से अधिक टूटा, जबकि Infosys, TCS, Wipro और HCLTech समेत प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), एचसीएलटेक, विप्रो, टेक महिंद्रा और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसे दिग्गज आईटी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट किसी एक कंपनी के खराब प्रदर्शन के कारण नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों द्वारा पोर्टफोलियो में बड़े स्तर पर किए जा रहे बदलाव (Sector Rotation) का परिणाम है। अमेरिकी शेयर बाजार में माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों के बाद वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों में निवेश बढ़ा, जिससे भारतीय आईटी शेयरों से पैसा निकलकर दोबारा ग्लोबल टेक कंपनियों की ओर जाने लगा।
इन आईटी शेयरों में आई सबसे बड़ी गिरावट
शुक्रवार के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर लाल निशान में रहे। इन्फोसिस करीब 3.54 प्रतिशत, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स 3.54 प्रतिशत, टीसीएस 3.45 प्रतिशत, एचसीएलटेक 2.27 प्रतिशत, विप्रो 2.46 प्रतिशत, एमफैसिस 2.48 प्रतिशत, हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज 2.39 प्रतिशत, एलटीटीएस 1.94 प्रतिशत, टाटा एलेक्सी 1.51 प्रतिशत, केपीआईटी टेक्नोलॉजीज 1.66 प्रतिशत और टेक महिंद्रा 1.59 प्रतिशत तक फिसल गए। व्यापक बिकवाली के कारण निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
आखिर क्यों टूट रहे हैं भारतीय आईटी शेयर?
विश्लेषकों के अनुसार पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में शानदार तेजी आई थी। इसकी मुख्य वजह यह थी कि वैश्विक AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों में भारी मुनाफावसूली हुई थी। उस दौरान निवेशकों ने अपेक्षाकृत सस्ते और आकर्षक मूल्यांकन वाले भारतीय आईटी शेयरों में निवेश बढ़ाया था।
हालांकि अब तस्वीर बदल गई है। माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न के मजबूत वित्तीय नतीजों तथा AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को लेकर सकारात्मक संकेत मिलने के बाद निवेशकों का भरोसा फिर से वैश्विक AI कंपनियों पर बढ़ा है। इसका असर यह हुआ कि निवेशकों ने भारतीय आईटी शेयरों में हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली शुरू कर दी।
जुलाई में आईटी सेक्टर ने किया था शानदार प्रदर्शन
जुलाई 2026 भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बेहद मजबूत महीना रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स ने लगभग 19 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जो पिछले छह वर्षों की सबसे बड़ी मासिक तेजी मानी जा रही है।
1 जुलाई 2026 को निफ्टी आईटी इंडेक्स अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर 25,699 पर पहुंच गया था। इसके बाद महीनेभर में इसमें 21 प्रतिशत से अधिक की रिकवरी देखने को मिली। यह उछाल इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि वर्ष 2026 की पहली छमाही में आईटी इंडेक्स लगभग 31 प्रतिशत तक टूट चुका था।
इस तेज रिकवरी के बाद अब निवेशक मुनाफा बुक कर रहे हैं, जिससे सेक्टर में दबाव दिखाई दे रहा है।
माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न के नतीजों ने बदली बाजार की धारणा
अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनियों Microsoft और Amazon ने उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे और भविष्य को लेकर सकारात्मक अनुमान पेश किए। इससे यह संकेत मिला कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाउड सेवाओं की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
इन कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक निवेशकों का विश्वास दोबारा AI और चिप कंपनियों में बढ़ा। इसके चलते अमेरिका सहित दुनिया भर के टेक शेयरों में तेजी देखने को मिली। यही कारण रहा कि भारतीय आईटी कंपनियों में निवेश का प्रवाह कुछ समय के लिए कमजोर पड़ गया।
वैश्विक बाजारों में जोरदार उछाल
वॉल स्ट्रीट की मजबूती का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 14 प्रतिशत उछल गया, जबकि जापान का निक्केई लगभग 5 प्रतिशत मजबूत हुआ। जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र का MSCI इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत चढ़ा।
अमेरिकी वायदा बाजार (Futures Market) भी मजबूती के संकेत दे रहे थे। नैस्डैक फ्यूचर्स लगभग 0.87 प्रतिशत, जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स करीब 0.29 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहे थे। यूरोप में भी EURO STOXX 50, FTSE और DAX सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई।
क्या आगे भी दबाव रहेगा?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल भारतीय आईटी सेक्टर में यह गिरावट मुख्य रूप से प्रॉफिट बुकिंग और सेक्टर रोटेशन का परिणाम है, न कि कंपनियों के बुनियादी प्रदर्शन में कमजोरी का संकेत। यदि आने वाले समय में वैश्विक AI कंपनियों में तेजी जारी रहती है तो भारतीय आईटी शेयरों पर कुछ समय तक दबाव बना रह सकता है।
हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भारतीय आईटी उद्योग की मजबूत वैश्विक मांग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाओं की बढ़ती जरूरतें अब भी सकारात्मक संकेत देती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय आईटी सेक्टर की दीर्घकालिक विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं।