भारत में Startup शुरू करने का इससे बेहतर समय नहीं: IDFC FIRST Bank के वी. वैद्यनाथन ने बताई बदलते Ecosystem की कहानी

भारत में Startup शुरू करने का इससे बेहतर समय नहीं: IDFC FIRST Bank के वी. वैद्यनाथन ने बताई बदलते Ecosystem की कहानी

 

IDFC FIRST Bank के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने कहा कि भारत में कारोबार शुरू करने के लिए आज का समय बेहद अनुकूल है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई, निवेश और मेंटरशिप ने स्टार्टअप के अवसर बढ़ाए हैं।

भारत में स्टार्टअप शुरू करने का माहौल पिछले एक दशक में तेजी से बदला है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वेंचर कैपिटल, प्राइवेट इक्विटी, मेंटरशिप और सफल उद्यमियों की अगली पीढ़ी को समर्थन देने की बढ़ती संस्कृति ने कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को पहले के मुकाबले आसान बनाया है। IDFC FIRST Bank के MD और CEO वी. वैद्यनाथन के मुताबिक, आज भारत में कारोबार शुरू करने के लिए शायद इससे बेहतर समय पहले कभी नहीं रहा। उन्होंने यह बात Moneycontrol के चंद्रा आर. श्रीकांत के साथ ‘Leap to Unicorn Season 4’ के दौरान बातचीत में कही। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कंपनी शुरू करना और उसे लंबे समय तक सफल बनाए रखना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं।

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बदला

वी. वैद्यनाथन के मुताबिक करीब दस साल पहले भारत में स्टार्टअप शुरू करने वाले संस्थापकों को कई तरह की बुनियादी कमियों का सामना करना पड़ता था। डिजिटल सुविधाओं की पहुंच सीमित थी, पूंजी जुटाना कठिन था और अनुभवी मेंटर्स तथा सफल उद्यमियों का नेटवर्क भी आज जितना व्यापक नहीं था। ऐसे में किसी विचार को कारोबार में बदलने के लिए संस्थापकों को कई स्तरों पर खुद रास्ता बनाना पड़ता था। अब स्थिति काफी अलग है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑनलाइन भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई टूल्स और निवेश के बढ़ते विकल्पों ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को नया आधार दिया है।

वैद्यनाथन ने कहा कि आज कोई संस्थापक इस पूरे इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्सों से जुड़कर अपने विचार को आगे बढ़ा सकता है। उनके अनुसार, यह बदलाव अचानक नहीं आया बल्कि पिछले वर्षों में तैयार हुई डिजिटल और वित्तीय व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि इस उपलब्ध इकोसिस्टम को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह सुविधा कुछ साल पहले इस स्तर पर मौजूद नहीं थी।

नई पीढ़ी नौकरी का इंतजार नहीं कर रही

स्टार्टअप संस्कृति में बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि युवा अब कारोबार शुरू करने के लिए लंबे अनुभव या बड़ी उम्र का इंतजार नहीं कर रहे हैं। वैद्यनाथन ने अपने कॉलेज BIT Ranchi में छात्रों के साथ हुई एक हालिया बातचीत का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, करीब 20 छात्रों ने अपनी उद्यमशीलता से जुड़ी कहानियां साझा कीं। कुछ छात्र कॉलेज में ही अपने लिए सह-संस्थापक तलाश रहे थे, जबकि कुछ ने छोटे स्तर पर पूंजी जुटाकर कारोबार शुरू करने की कोशिश की।

एक छात्र एआई से जुड़ी परियोजना पर काम कर रहा था और उसने बेंगलुरु में पढ़ रहे एक छात्र को अपना सह-संस्थापक बनाया था। कुछ अन्य छात्रों ने करीब 1-2 लाख रुपये की राशि जुटाकर अपना कारोबार शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया। यह बदलाव बताता है कि युवा पीढ़ी के लिए उद्यमिता अब केवल बड़ी कंपनियों या अनुभवी कारोबारियों तक सीमित अवधारणा नहीं रह गई है।

आइडिया से कारोबार तक की दूरी हुई कम

आज किसी नए कारोबारी के सामने सबसे बड़ा बदलाव यह है कि विचार को शुरुआती स्तर पर परखना पहले की तुलना में आसान हो गया है। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किसी कंपनी को शुरुआत में अपना बड़ा तकनीकी ढांचा तैयार करने की जरूरत नहीं होती। जरूरत के मुताबिक क्लाउड सेवाएं ली जा सकती हैं। डिजिटल भुगतान की सुविधा व्यापक हो चुकी है और एआई आधारित टूल्स कई ऐसे कामों को तेजी से पूरा करने में मदद कर रहे हैं, जिनके लिए पहले पूरी टीम की जरूरत पड़ सकती थी।

इसी तरह, सह-संस्थापक या टीम के सदस्यों का एक ही शहर में रहना भी अनिवार्य नहीं रह गया है। अलग-अलग शहरों में रहने वाले लोग डिजिटल माध्यमों के जरिए एक साथ परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं। इससे शुरुआती स्तर पर किसी स्टार्टअप को शुरू करने में लगने वाली लागत और समय दोनों को कम करने में मदद मिल सकती है।

पूंजी जुटाना अभी भी बड़ी चुनौती

हालांकि स्टार्टअप शुरू करने का माहौल पहले से बेहतर हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर आइडिया आसानी से सफल कंपनी में बदल जाता है। किसी स्टार्टअप के लिए शुरुआती विचार को उत्पाद या सेवा में बदलने के बाद अगली बड़ी चुनौती बाजार में अपनी जगह बनाना, ग्राहकों को जोड़ना और लगातार पूंजी हासिल करना होती है। भारत में वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी के विकल्प बढ़े हैं, लेकिन निवेश हासिल करने के लिए संस्थापकों को अपने कारोबार की संभावनाएं, बाजार की जरूरत और भविष्य की विकास रणनीति स्पष्ट रूप से पेश करनी पड़ती है।

यहीं से स्टार्टअप और टिकाऊ कंपनी के बीच अंतर सामने आता है। एक अच्छा विचार शुरुआत दिला सकता है, लेकिन लंबे समय तक कारोबार चलाने के लिए मजबूत टीम, वित्तीय अनुशासन, ग्राहक भरोसा और लगातार बदलते बाजार के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता भी जरूरी होती है।

भारत के लिए अवसर का नया दौर

वी. वैद्यनाथन की टिप्पणी भारत में बदलते उद्यमिता माहौल की ओर संकेत करती है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों ने युवाओं के लिए कारोबार शुरू करने की बाधाएं कम की हैं। कॉलेज स्तर पर ही युवा सह-संस्थापक तलाश रहे हैं, छोटे स्तर पर पूंजी लगाकर प्रयोग कर रहे हैं और एआई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।

फिर भी स्टार्टअप की असली परीक्षा शुरुआती आइडिया से आगे शुरू होती है। किसी कंपनी को टिकाऊ बनाने के लिए संस्थापकों को पूंजी, बाजार, तकनीक, प्रतिभा और ग्राहकों से जुड़े कई सवालों का लगातार सामना करना पड़ता है। इसलिए आज भारत में शुरुआत करने के लिए अवसरों का दायरा भले ही काफी बढ़ गया हो, लेकिन एक विचार को लंबे समय तक चलने वाली कंपनी में बदलने के लिए धैर्य, रणनीति और लगातार काम करना अब भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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