भारतीय शेयर बाजार में 1 अक्टूबर को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। GIFT Nifty 73 अंक गिरकर 22,586.5 पर पहुंच गया। निवेशकों की नजर कच्चे तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक संकेतों पर रहेगी।
भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार, 1 अक्टूबर का कारोबारी सत्र सावधानी भरा रह सकता है। शुरुआती संकेतों के मुताबिक घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक कमजोर शुरुआत कर सकते हैं। सुबह 7:34 बजे GIFT Nifty 22,586.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसमें 73 अंकों यानी करीब 0.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। GIFT Nifty में यह कमजोरी बाजार के लिए शुरुआती संकेत के तौर पर देखी जा रही है और इससे संकेत मिलता है कि गुरुवार को घरेलू बेंचमार्क सूचकांक दबाव में कारोबार शुरू कर सकते हैं। हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा कारोबार शुरू होने के बाद वैश्विक संकेतों, निवेशकों की धारणा और प्रमुख आर्थिक घटनाक्रमों के आधार पर तय होगी।
वैश्विक संकेतों पर निवेशकों की नजर
गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम इस समय बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। अमेरिकी महंगाई से जुड़े नरम आंकड़ों ने निवेशकों को कुछ राहत दी है, क्योंकि इससे ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हो सकती है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊंचा स्तर अभी भी इक्विटी बाजार के लिए चुनौती बना हुआ है। ऊंची बॉन्ड यील्ड की स्थिति में निवेशकों के लिए सुरक्षित आय वाले साधन अधिक आकर्षक हो सकते हैं, जिससे शेयर बाजारों पर दबाव देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा एक महत्वपूर्ण संकेतक रही हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश के आयात बिल, चालू खाते और मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, कंपनियों की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में गुरुवार को निवेशक अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर खास नजर रख सकते हैं। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच तेल की आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की नई चिंता बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती है।
मध्य पूर्व का तनाव भी अहम
भू-राजनीतिक मोर्चे पर मध्य पूर्व की स्थिति भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है। इससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहती है। भारतीय बाजार के संदर्भ में इसका असर खास तौर पर उन क्षेत्रों पर पड़ सकता है जो कच्चे तेल की कीमतों से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते हैं। इसलिए बाजार प्रतिभागी किसी भी नए घटनाक्रम और उसके संभावित आर्थिक प्रभाव का आकलन करते रहेंगे।
अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों से राहत
वैश्विक बाजार के लिए अमेरिकी महंगाई के अपेक्षाकृत नरम आंकड़े एक सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। महंगाई में नरमी से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है। निवेशक यह आकलन करते हैं कि महंगाई का रुख ब्याज दरों को किस तरह प्रभावित कर सकता है। ब्याज दरों में नरमी की संभावना आमतौर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों के लिए समर्थन का आधार बन सकती है। हालांकि, इस समय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बाजार में पूरी तरह सकारात्मक धारणा बनने में बाधाएं मौजूद हैं।
घरेलू बाजार में सेक्टरवार हलचल संभव
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में अलग-अलग सेक्टरों में अलग-अलग तरह की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। तेल की कीमतों में बदलाव का असर ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, विमानन और परिवहन से जुड़े शेयरों पर पड़ सकता है। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल आईटी तथा अन्य निर्यात आधारित कंपनियों के शेयरों को प्रभावित कर सकती है। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी निवेशक वैश्विक ब्याज दरों और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े संकेतों पर नजर रख सकते हैं।
निवेशकों को किन संकेतकों पर रखनी होगी नजर?
1 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में निवेशकों के लिए GIFT Nifty के अलावा कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर की चाल और वैश्विक शेयर बाजार प्रमुख संकेतक रहेंगे। इसके साथ ही मध्य पूर्व से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। GIFT Nifty में सुबह की गिरावट कमजोर शुरुआत का संकेत दे रही है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि पूरे कारोबारी सत्र में बाजार इसी दिशा में बना रहे। शुरुआती कारोबार के बाद वैश्विक और घरेलू संकेतों के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए माहौल सावधानी वाला रहने की संभावना है। GIFT Nifty में 0.32 प्रतिशत की गिरावट शुरुआती दबाव का संकेत देती है, जबकि नरम अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से कुछ राहत मिल रही है। दूसरी ओर, ऊंची अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व में तनाव से जुड़ी अनिश्चितता बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ दिनभर आने वाले नए घटनाक्रमों पर रहेगी।