पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की नई ऊर्जा रणनीति; पीएम मोदी और राजनाथ सिंह ने की ईंधन बचत की अपील

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की नई ऊर्जा रणनीति; पीएम मोदी और राजनाथ सिंह ने की ईंधन बचत की अपील

 

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने ईंधन संरक्षण की नई रणनीति शुरू की। पीएम मोदी ने नागरिकों से ईंधन बचाने, सोने की खरीद टालने और विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा के लिए सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की।

ऊर्जा संकट और वैश्विक तनाव के बीच भारत की नई रणनीति: आत्मनिर्भरता और संरक्षण का महाभियान

पश्चिम एशिया में जारी लंबे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए, भारत सरकार ने सोमवार को एक व्यापक संरक्षण और तैयारी रणनीति (Conservation and Preparedness Strategy) शुरू की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित ‘मंत्रियों के 5वें अनौपचारिक समूह’ (IGoM) की बैठक में इस रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना, विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करना और दीर्घकालिक आर्थिक लचीलेपन को मजबूत करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा वर्तमान में स्थिर है, लेकिन भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए सतर्कता और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

ऊर्जा भंडार और आर्थिक स्थिति का मजबूत आधार

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मंत्रियों के समूह को सूचित किया कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद भारत के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। वर्तमान में देश के पास लगभग 60 दिनों का कच्चा तेल भंडार, 60 दिनों का प्राकृतिक गैस भंडार और 45 दिनों का एलपीजी रोलिंग स्टॉक मौजूद है। इसके अतिरिक्त, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 703 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर है, जो वैश्विक झटकों को सहने के लिए एक मजबूत कवच का काम कर रहा है। सरकार ने जनता से अपील की है कि पेट्रोलियम उत्पादों या आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं है, इसलिए घबराने (panic buying) की कोई आवश्यकता नहीं है।

राजकोषीय चुनौतियां और कीमतों का संतुलन

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में 30 से 70 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि देखी गई है। सरकार ने रेखांकित किया कि भारत ने अपने उपभोक्ताओं को इन झटकों से बचाने में सफलता हासिल की है। हालांकि, यह स्थिरता एक बड़ी वित्तीय लागत पर मिल रही है। रिपोर्टों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं और 2026 की पहली तिमाही में यह ‘अंडर-रिकवरी’ लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्र से भावुक अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन बचाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाने का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि बचाया गया हर एक लीटर पेट्रोल या डीजल देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करता है। उन्होंने नागरिकों को कुछ विशिष्ट सुझाव दिए हैं:

  • मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें।
  • कारपूलिंग अपनाएं और अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचें।
  • घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता दें और एक साल के लिए गैर-जरूरी सोने की खरीद से परहेज करें।
  • जहाँ संभव हो, वर्चुअल मीटिंग और ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) को बढ़ावा दें।

किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए नई दिशा

ऊर्जा के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य और खाद की बचत के लिए प्रधानमंत्री ने किसानों से विशेष अनुरोध किया है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 50 प्रतिशत की कटौती करने और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने का आग्रह किया है। इसके अलावा, ऊर्जा के प्रति निर्भरता कम करने के लिए सोलर पंप अपनाने पर जोर दिया गया है। 11 मई 2026 तक देश में उर्वरकों का स्टॉक 199.65 लाख टन के मजबूत स्तर पर है, जो खरीफ सीजन की जरूरतों के लिए पर्याप्त से अधिक है।

MSME और उद्योगों को सरकारी कवच

संकट के समय में उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सहारा देने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दी है। इसके तहत MSMEs, गैर-MSMEs और विमानन क्षेत्र के लिए 2.55 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक खरीद अनुबंधों में प्रदर्शन की समय-सीमा बढ़ाने जैसी राहतें भी प्रदान की हैं ताकि व्यवसायों पर वैश्विक संकट का नकारात्मक प्रभाव कम किया जा सके।

रक्षा मंत्री का रणनीतिक दृष्टिकोण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष को एक अलग घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि आधुनिक दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों से अपील की कि वे ईंधन दक्षता और जिम्मेदार खपत को एक संस्थागत स्वरूप दें। सिंह ने अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के विस्तार, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और ऊर्जा-कुशल तकनीकों में निवेश बढ़ाने पर विशेष बल दिया।

सरकार का यह संरक्षण अभियान केवल किसी अस्थायी कमी का जवाब नहीं है, बल्कि भविष्य की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के विरुद्ध एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय लचीलापन (National Resilience) बनाने का प्रयास है। यह रणनीति भारत को एक ऐसी स्थिति में खड़ा करने के लिए है जहाँ वह बाहरी संकटों के बावजूद अपनी आर्थिक वृद्धि की गति को बनाए रख सके।

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