वेस्टइंडीज वनडे सीरीज और एशियन गेम्स के एक साथ होने से वॉशिंगटन सुंदर को लेकर टीम इंडिया में चयन की स्थिति पेचीदा हुई। जानें गंभीर, गिल और लक्ष्मण की रणनीति।
भारतीय क्रिकेट में इन दिनों वॉशिंगटन सुंदर को लेकर एक दिलचस्प स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर चाहते थे कि सुंदर को वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली घरेलू वनडे सीरीज के लिए टीम में शामिल किया जाए। वहीं, एशियन गेम्स के लिए भारत की टीम की जिम्मेदारी संभाल रहे वीवीएस लक्ष्मण भी इस ऑफ स्पिन ऑलराउंडर को अपनी टीम में चाहते थे। दोनों टीमों को एक ही समय पर अपने मुकाबले खेलने हैं, जिसके कारण सुंदर को लेकर चयन से जुड़ी स्थिति पेचीदा हो गई।
भारत को सितंबर के अंत में एक साथ दो मोर्चों पर उतरना है। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज 27 सितंबर से शुरू होगी, जबकि एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का पहला मुकाबला 28 सितंबर से होना है। इस वजह से भारत को अलग-अलग खिलाड़ियों के साथ दो टीमों को मैदान पर उतारना होगा।
वेस्टइंडीज के खिलाफ सुंदर को क्यों चाहते थे गंभीर और गिल?
रिपोर्ट के अनुसार, गौतम गंभीर और शुभमन गिल वॉशिंगटन सुंदर को वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए इसलिए चाहते थे क्योंकि कैरेबियाई टीम के बल्लेबाजी क्रम में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज मौजूद हैं। ऐसे में ऑफ स्पिन गेंदबाजी करने वाले सुंदर को एक उपयोगी विकल्प माना गया। बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ ऑफ स्पिनर का मुकाबला अक्सर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि गेंद का कोण और टर्न बल्लेबाज के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
सुंदर सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजी में भी योगदान देने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि भारतीय टीम प्रबंधन उन्हें एक ऑलराउंड विकल्प के रूप में देखता रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गंभीर सुंदर की ऑलराउंड क्षमता पर भरोसा करते हैं और उनकी पसंद से यह बात कई मौकों पर दिखाई दी है।
एशियन गेम्स में भी क्यों जरूरी थे सुंदर?
दूसरी तरफ, वीवीएस लक्ष्मण भी एशियन गेम्स के लिए वॉशिंगटन सुंदर को टीम का हिस्सा बनाना चाहते थे। एशियन गेम्स में भारत को अलग-अलग टीमों के खिलाफ मुकाबले खेलने हैं और रिपोर्ट के मुताबिक, लक्ष्मण को भी सुंदर की ऑफ स्पिन उपयोगी लग रही थी। खासकर नेपाल जैसी संभावित टीमों के खिलाफ बाएं हाथ के बल्लेबाजों का सामना होने की स्थिति में सुंदर एक रणनीतिक विकल्प हो सकते थे।
इस तरह दोनों टीम प्रबंधन की जरूरत एक ही खिलाड़ी पर आकर टिक गई। एक तरफ घरेलू वनडे सीरीज थी, जहां भारत वेस्टइंडीज के खिलाफ उतरने वाला था, वहीं दूसरी तरफ एशियन गेम्स का मंच था। दोनों प्रतियोगिताओं की तारीखें लगभग एक-दूसरे से टकरा रही हैं, इसलिए खिलाड़ियों का बंटवारा करना आसान नहीं था।
भारत को एक साथ उतारनी होंगी दो टीमें
वेस्टइंडीज सीरीज और एशियन गेम्स के कार्यक्रम में टकराव के कारण भारत को एक ही समय पर दो अलग-अलग टीमों के साथ खेलना होगा। अधिकांश खिलाड़ियों को उनकी भूमिका के अनुसार वनडे और टी20 टीमों में बांटना अपेक्षाकृत आसान रहा, लेकिन सुंदर का मामला अलग था।
वह ऐसे खिलाड़ी हैं जो गेंद और बल्ले दोनों से टीम को संतुलन दे सकते हैं। इसके अलावा उनकी ऑफ स्पिन कई परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो सकती है। इसलिए दोनों टीमों के लिए उनका महत्व बढ़ गया। रिपोर्ट के अनुसार, इसी कारण उन्हें लेकर दोनों टीमों के बीच प्राथमिकता तय करने की स्थिति बनी।
गौतम गंभीर का सुंदर पर रहा है भरोसा
गौतम गंभीर के भारतीय टीम के मुख्य कोच बनने के बाद वॉशिंगटन सुंदर को कई मौकों पर टीम में अवसर मिले हैं। सुंदर की खासियत यह है कि वह टीम को एक अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प देने के साथ-साथ निचले क्रम में उपयोगी रन भी बना सकते हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में ऐसा खिलाड़ी टीम संयोजन के लिहाज से अहम हो सकता है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में भी यही कारण सुंदर को महत्वपूर्ण बना रहा था। अगर विपक्षी टीम के शीर्ष क्रम में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज हों, तो ऑफ स्पिनर को एक रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर और गिल की योजना में सुंदर इसी भूमिका के लिए फिट बैठ रहे थे।
लक्ष्मण भी चाहते थे समान रणनीतिक विकल्प
दिलचस्प बात यह है कि वीवीएस लक्ष्मण की योजना भी कुछ हद तक इसी रणनीति पर आधारित बताई गई है। एशियन गेम्स में भारत के सामने जिन टीमों के आने की संभावना है, उनमें नेपाल जैसी टीमों के खिलाफ बाएं हाथ के बल्लेबाजों की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए सुंदर उपयोगी हो सकते हैं।
यानी दोनों टीमों की जरूरत अलग प्रतियोगिताओं के लिए थी, लेकिन खिलाड़ी के इस्तेमाल का कारण लगभग एक जैसा था। यही वजह है कि सुंदर को लेकर फैसला चुनौतीपूर्ण हो गया।
सुंदर की भूमिका ने बढ़ाई दिलचस्पी
वॉशिंगटन सुंदर के मामले से यह भी पता चलता है कि एक ऑलराउंडर किस तरह टीम संयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एक ऐसा खिलाड़ी जो ऑफ स्पिन के साथ बल्लेबाजी भी कर सकता है, उसे दो अलग-अलग टीमों के लिए उपयोगी माना जा सकता है। वेस्टइंडीज सीरीज और एशियन गेम्स के कार्यक्रम में टकराव ने इस जरूरत को और स्पष्ट कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर और गिल की इच्छा के बावजूद सुंदर को एशियन गेम्स के लिए रखने का फैसला किया गया, क्योंकि लक्ष्मण भी उन्हें अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण मान रहे थे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में अंतिम चयन और टीम संयोजन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी को संबंधित बोर्ड या टीम प्रबंधन की पुष्टि के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल, भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक साथ दो प्रतियोगिताओं में मजबूत टीम संयोजन तैयार करना है। वेस्टइंडीज के खिलाफ 27 सितंबर से शुरू होने वाली वनडे सीरीज और 28 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स के मुकाबलों के बीच सुंदर जैसे ऑलराउंडर की उपलब्धता निश्चित रूप से चयन रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है।