इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ पर विशेष रिपोर्ट। जानिए कैसे ‘अमर सिंह चमकीला’ की शूटिंग के दौरान उन्हें विभाजन पर आधारित इस फिल्म का विचार आया और क्यों दिलीप दोसांझ इस किरदार के लिए बने पहली पसंद।
इम्तियाज अली का नाम आते ही सिनेमा के शौकीनों के जहन में ‘रॉकस्टार’, ‘जब वी मेट’ और ‘तमाशा’ जैसी फिल्मों की यादें ताजा हो जाती हैं। उनकी हालिया रिलीज ‘मैं वापस आऊंगा’ बॉक्स ऑफिस पर भले ही धीमी शुरुआत के साथ उतरी हो, लेकिन यह फिल्म अपनी संवेदनशील और मार्मिक कहानी के कारण दर्शकों के दिलों में जगह बना रही है। दिलचस्प बात यह है कि इम्तियाज खुद इस फिल्म को बनाने के इरादे से नहीं उतरे थे। फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ की शूटिंग के दौरान उन्हें इसका कोई अंदाजा नहीं था कि उनकी अगली फिल्म यही होगी। इम्तियाज के अनुसार, वे इन कहानियों को व्यक्तिगत रुचि के कारण तलाश रहे थे। लोगों से मिलना और उनकी fascinating कहानियों को सुनना ही उनके लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बना।
तीन साल पहले उनके मन में विभाजन (Partition) से जुड़ी कहानियों पर फिल्म बनाने का विचार आया था। ‘चमकीला’ की शूटिंग के दौरान वे लगातार ऐसे लोगों से मिल रहे थे जिन्होंने विभाजन के दौरान पलायन को अपनी आंखों से देखा था और उसे व्यक्तिगत रूप से महसूस किया था। उन लोगों की कहानियाँ इतनी गतिशील और अप्रत्याशित थीं कि वे इम्तियाज के अवचेतन मन में बस गईं। उन्होंने महसूस किया कि पंजाब और बंगाल में विभाजन की घटनाओं को लेकर अभी भी बहुत कुछ अनकहा रह गया है, जिसे पर्दे पर लाना जरूरी है। ‘चमकीला’ की शूटिंग खत्म होने के बाद ही उन्होंने औपचारिक रूप से ‘मैं वापस आऊंगा’ की पटकथा लिखनी शुरू की।
दिलजीत दोसांझ के साथ तालमेल: एक नई भावनात्मक गहराई
इम्तियाज अली के करियर में यह दूसरा मौका है जब उन्होंने किसी अभिनेता के साथ दोबारा काम किया है। इससे पहले वे रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण के साथ भी दो-दो फिल्में कर चुके हैं। दिलीप दोसांझ अब इस विशिष्ट क्लब में शामिल हो गए हैं। इम्तियाज का मानना है कि हर अभिनेता में एक ऐसा भावनात्मक क्षेत्र (emotional territory) छिपा होता है जिसे अभी तक एक्सप्लोर नहीं किया गया है। वे कहते हैं, “इन अभिनेताओं के साथ काम करने के अनुभव से आप जान पाते हैं कि उनके अंदर का वह दूसरा पक्ष मौजूद है।”
‘मैं वापस आऊंगा’ के लिए दिलीप दोसांझ का चयन भी इसी समझ का परिणाम था। पटकथा लिखते समय इम्तियाज को एहसास हुआ कि इस फिल्म के मुख्य पात्र की मानसिकता, समझ और दुनिया को देखने का नजरिया बिल्कुल दिलीप दोसांझ जैसा है। उन्हें लगा कि इस किरदार को निभाने के लिए दिलीप से बेहतर अभिनेता कोई नहीं हो सकता। इम्तियाज ने यह भी उल्लेख किया कि दिलीप ने इस फिल्म में जिस तरह के रास्ते पर कदम रखा है, वैसा उन्होंने अपनी पिछली फिल्म में नहीं किया था।
शाहरुख खान की तारीफ का प्रभाव
दिलजीत दोसांझ की काबिलियत को लेकर एक दिलचस्प किस्सा जुड़ा है ‘जब हैरी मेट सेजल’ के अभिनेता शाहरुख खान से। इम्तियाज बताते हैं कि एक बार शाहरुख खान ने उनसे दिलजीत के काम पर चर्चा की थी और उनकी जमकर तारीफ की थी। शाहरुख का यह कहना कि “दिलजीत इस देश के सबसे बेहतरीन अभिनेता हैं,” इम्तियाज के लिए एक बड़ी बात थी। हालांकि, इम्तियाज पहले से ही जानते थे कि दिलजीत एक उम्दा कलाकार हैं, लेकिन शाहरुख की इस भारी-भरकम तारीफ ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया। ‘चमकीला’ के दौरान जब उन्होंने दिलीप के साथ काम करना शुरू किया, तो उन्हें खुद भी अहसास हुआ कि वाकई उनसे बेहतर कोई और नहीं हो सकता।
इम्तियाज अली की यह फिल्म केवल एक निर्देशक और अभिनेता के तालमेल की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन अनकही भावनाओं को समझने का प्रयास है जो विभाजन के घावों में कहीं खो गई थीं। इम्तियाज का सिनेमा अक्सर पात्रों की आंतरिक यात्रा का चित्रण करता है, और ‘मैं वापस आऊंगा’ के माध्यम से वे एक बार फिर उसी गहराई की तलाश में निकले हैं। दिलीप दोसांझ का अभिनय और इम्तियाज का निर्देशन मिलकर इस फिल्म को एक ऐसी कृति बनाता है, जो न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि दर्शकों को इतिहास के पन्नों में झांकने और संवेदनाओं को महसूस करने पर मजबूर भी करती है। यह फिल्म इस बात का प्रमाण है कि जब सही कहानी के साथ सही कलाकार का मेल होता है, तो सिनेमा सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि एक गहरा अनुभव बन जाता है।