मौसम विभाग ने पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड में भूस्खलन से 126 सड़कें बंद हैं, जबकि दिल्ली व राजस्थान में मौसम शुष्क रहेगा।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के विभिन्न हिस्सों के लिए मानसून की ताजा स्थिति और चेतावनी जारी की है। इस समय देश का मौसमी मिजाज पूरी तरह से दो अलग-अलग छोरों पर बंटा नजर आ रहा है। एक तरफ जहां पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत मूसलाधार बारिश और बाढ़ जैसे हालात से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के पश्चिमी हिस्से में मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में तो भारी बारिश आफत बनकर टूटी है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर में भारी बारिश का तांडव
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के बेहद सक्रिय होने के कारण पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। खासकर उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के जिलों में, जो पिछले कई दिनों से मूसलाधार बारिश की मार झेल रहे हैं, स्थिति और गंभीर हो सकती है। मेघालय में अत्यंत भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून ट्रफ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के कारण पूर्वी हिस्सों में एक मजबूत मौसमी प्रणाली सक्रिय है। इसके प्रभाव से बंगाल के साथ-साथ असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों में भी अगले एक सप्ताह तक भीषण बारिश की संभावना बनी हुई है।
कई जिलों में जलभराव और भूस्खलन की आशंका
बंगाल के पहाड़ी इलाकों जैसे दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (landslides) का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दूसरी तरफ, निचले इलाकों जैसे कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में अत्यधिक पानी भरने यानी जलभराव (waterlogging) की आशंका है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में कूचबिहार के पुंडीबाड़ी में सबसे ज्यादा 89 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा गंद्रापाड़ा, हासीमारा और अलीपुरद्वार में भी भारी बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। दक्षिण बंगाल के जिलों जैसे बांकुड़ा, बीरभूम, मुर्शिदाबाद और कोलकाता में भी सोमवार और मंगलवार को मध्यम से भारी बारिश के एक-दो दौर देखने को मिल सकते हैं, जिससे शहरी इलाकों में ट्रैफिक और जलजमाव की समस्या खड़ी हो सकती है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बरसेगा पानी
उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों और बिहार के लोगों के लिए भी मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी किया है। बिहार में अगले दो से तीन दिनों के भीतर कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून अगले 4 से 5 दिनों तक सक्रिय रहेगा, जिससे गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर भारी वर्षा होने के आसार हैं। यह बारिश खेती-किसानी के लिहाज से जहां फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं वज्रपात (आकाशीय बिजली) के खतरे को देखते हुए लोगों को खुले खेतों में न जाने की सलाह दी गई है।
उत्तराखंड में थम नहीं रही आफत, 126 रास्ते बंद
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसून की मार सबसे घातक साबित हो रही है। पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने पहाड़ों को दरका दिया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की रिपोर्ट के अनुसार, भूस्खलन के कारण दो राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कुल 126 मुख्य और संपर्क मार्ग पूरी तरह से ब्लॉक हो गए हैं। यमुनोत्री राजमार्ग पिछले तीन दिनों से स्यानाचट्टी के पास बंद पड़ा है, जिसे खोलने के लिए भारी मशीनें लगातार काम कर रही हैं।
राजधानी देहरादून में भी हालात चिंताजनक हैं। यहाँ प्रेमनगर क्षेत्र में पिछले साल की आपदा के बाद बना एक अस्थायी पुल तड़के हुई भारी बारिश में बह गया, जिसके बाद यातायात को झाझरा-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग की तरफ डायवर्ट करना पड़ा। वहीं, एक निर्माणाधीन मकान की दीवार गिरने से एक महिला भी घायल हो गई है।
दिल्ली-एनसीआर में सूखा हफ्ता, राजस्थान में मानसून कमजोर
एक तरफ जहां देश का एक बड़ा हिस्सा पानी-पानी हो रहा है, वहीं देश की राजधानी दिल्ली और पड़ोसी राज्य राजस्थान में मानसून सुस्त पड़ चुका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली-एनसीआर में आने वाले पूरे सप्ताह आसमान में बादल तो छाए रहेंगे, जिससे चिलचिलाती धूप से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश होने की कोई संभावना नहीं है।
यही हाल राजस्थान का भी है, जहां मानसून की ट्रफ लाइन खिसकने के कारण मौसमी गतिविधियां कमजोर हो गई हैं। पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में अगले एक हफ्ते तक मौसम पूरी तरह शुष्क और गर्म बना रहेगा। हालांकि, एक बहुत ही कमजोर वेदर सिस्टम के कारण 14 और 15 जुलाई को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जैसे सीमावर्ती जिलों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन इससे तापमान में कोई खास गिरावट आने की उम्मीद नहीं है। पूर्वी राजस्थान में भी अगले पांच-छह दिनों तक तेज बारिश के आसार न के बराबर हैं।