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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं। जानें क्यों लड़कियों और महिलाओं को हनुमान जी की मूर्ति के चरणों को स्पर्श करने से मना किया जाता है।
क्या महिलाएं हनुमान जी के चरण छू सकती हैं? जानें क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं
श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को ‘बाल ब्रह्मचारी’ माना जाता है। हिंदू धर्म में उनकी पूजा के नियम काफी सख्त और स्पष्ट हैं। अक्सर यह देखा जाता है कि मंदिरों में महिलाओं और लड़कियों को हनुमान जी की मूर्ति के चरणों को छूने से मना किया जाता है। इसके पीछे न तो कोई भेदभाव है और न ही कोई अपमान, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक कारण हैं।
1. बाल ब्रह्मचारी स्वरूप का सम्मान
हनुमान जी ने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने का संकल्प लिया था। शास्त्रों के अनुसार, एक ब्रह्मचारी के लिए कुछ विशेष मर्यादाएं होती हैं। स्त्रियां हनुमान जी की भक्ति कर सकती हैं, लेकिन उनके ब्रह्मचर्य धर्म का सम्मान करते हुए उन्हें स्पर्श करने से परहेज करने की परंपरा है। यह वर्जना पूरी तरह से हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और उनके नियमों के पालन से जुड़ी है।
2. माता के समान आदर
धार्मिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी हर स्त्री में अपनी माता ‘अंजनी’ और ‘माता सीता’ का स्वरूप देखते हैं। वह समस्त नारी जाति को मां के समान पूज्य मानते हैं। भारतीय संस्कृति में पुत्र अपनी माता के चरणों में झुकता है, लेकिन परंपराओं के अनुसार, माता अपने पुत्र के चरणों को स्पर्श नहीं करती। इसी भाव के कारण महिलाओं के लिए उनके चरणों को छूना वर्जित माना गया है।
3. ‘दासा’ भाव की भक्ति
महिलाएं हनुमान जी की पूजा ‘सखा’ या ‘स्वामी’ के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘पुत्र’ या ‘रक्षक’ के रूप में करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी अपनी महिला भक्तों को सुरक्षा और आशीर्वाद प्रदान करते हैं, लेकिन स्पर्श न करने का नियम केवल मर्यादा बनाए रखने के लिए है।
महिलाएं कैसे करें हनुमान जी की पूजा?
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, महिलाएं हनुमान जी की वैसी ही पूजा कर सकती हैं जैसी पुरुष करते हैं, बस कुछ मर्यादाओं का ध्यान रखना होता है:
- महिलाएं हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ कर सकती हैं।
- वे हनुमान जी के सामने दीपक जला सकती हैं और भोग लगा सकती हैं।
- पूजा के दौरान वे दूर से हाथ जोड़कर प्रणाम कर सकती हैं, लेकिन मूर्ति का स्पर्श और चोला चढ़ाना उनके लिए वर्जित बताया गया है।