PLOS Medicine के नए अध्ययन के अनुसार, लगातार 30 मिनट से अधिक बैठने से कैंसर से मौत का खतरा बढ़ता है। जानें डेस्क जॉब के दौरान एक्टिव रहने के आसान तरीके।
अगर आपका काम ऐसा है जिसमें आपको ऑफिस में घंटों एक ही जगह कुर्सी पर बैठे रहना पड़ता है, तो आपको अपनी इस आदत को तुरंत बदलने की जरूरत है। हाल ही में प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल PLOS Medicine में प्रकाशित एक नए और चौंकाने वाले अध्ययन से पता चला है कि लंबे समय तक लगातार बिना ब्रेक लिए बैठे रहने (Prolonged Sitting) का सीधा संबंध कैंसर से होने वाली मौत के बढ़ते जोखिम से हो सकता है। यह शोध उन लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो अपनी दिनचर्या का एक बड़ा हिस्सा डेस्क पर बिताते हैं। आज की आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक निष्क्रियता एक मूक हत्यारा (Silent Killer) बनती जा रही है, और यह अध्ययन इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है।
क्या कहते हैं अध्ययन के आंकड़े? यूके बायोबैंक (UK Biobank) की बड़ी रिसर्च
इस बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने UK Biobank के 91,292 प्रतिभागियों के स्वास्थ्य डेटा का गहराई से विश्लेषण किया। अध्ययन की सटीकता को बनाए रखने के लिए सभी प्रतिभागियों को विशेष एक्टिविटी ट्रैकर्स (Activity Trackers) पहनाए गए थे, जिससे यह सटीक रूप से मापा जा सके कि वे दिनभर में कितना समय बैठने में और कितना समय चलने-फिरने में बिताते हैं। इन प्रतिभागियों पर 12 साल से अधिक समय तक लगातार नज़र रखी गई (Follow-up), ताकि गतिहीन व्यवहार (Sedentary Behaviour) और कैंसर के जोखिम के बीच के संबंध को बारीकी से समझा जा सके।
इस शोध के दौरान जो निष्कर्ष सामने आए, वे बेहद डराने वाले हैं:
- 30 मिनट से ज्यादा बैठना खतरनाक: लगातार 30 मिनट से अधिक समय तक बिना उठे बैठे रहना या लेटे रहना कैंसर से होने वाली मृत्यु के उच्च जोखिम से जुड़ा पाया गया।
- हर अतिरिक्त घंटा बढ़ाता है जोखिम: शोधकर्ताओं ने पाया कि लगातार बैठने के समय में होने वाला हर एक अतिरिक्त घंटा कैंसर से होने वाली मौत के जोखिम को 10% तक बढ़ा देता है।
- ब्रेक लेने वाले रहे सुरक्षित: इसके विपरीत, जो लोग काम के बीच-बीच में लगातार खड़े होते रहे या थोड़ा बहुत चलते-फिरते रहे, उनमें यह जोखिम काफी कम देखा गया।
बैठने का तरीका भी है बेहद महत्वपूर्ण: क्यों मायने रखता है यह शोध?
यह अध्ययन एक बेहद महत्वपूर्ण बात की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करता है—आप कुल मिलाकर दिन में कितने घंटे बैठते हैं, सिर्फ यही मायने नहीं रखता, बल्कि आप किस तरीके से बैठते हैं (How you sit), यह भी उतना ही जरूरी है। पूरे दिन में टुकड़ों-टुकड़ों में बैठना उतना नुकसानदेह नहीं है, जितना कि बिना किसी रुकावट के लगातार 4-5 घंटे तक एक ही जगह पर बैठे रहना।
यह निष्कर्ष उन लोगों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जो आईटी सेक्टर, डिजिटल मीडिया, बैंकिंग या अन्य डेस्क जॉब्स में हैं, जिनका दैनिक आवागमन (Commute) लंबा है, या जो घर आने के बाद टीवी के सामने घंटों सोफे पर बिता देते हैं। लगातार बैठने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है और शरीर में क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन) बढ़ सकती है, जिसे कैंसर का एक बड़ा कारक माना जाता है।
क्या छोटी-छोटी मूवमेंट से मिल सकती है मदद? जानें राहत की बात
राहत की बात यह है कि इस गंभीर खतरे से बचने का उपाय बेहद आसान और व्यावहारिक है। अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक लगातार बैठने की आदत को यदि छोटी-मोटी शारीरिक गतिविधियों या हल्की एक्टिविटी से बदल दिया जाए, तो कैंसर से होने वाली मौतों के इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
शोध के अनुसार लगातार बैठने के समय को निम्नलिखित गतिविधियों से बदलने पर ये फायदे देखे गए:
- हल्की शारीरिक गतिविधि (Light Activity): यदि आप बैठने के समय में से 1 घंटा निकालकर हल्का टहलते हैं या घर के छोटे-मोटे काम (Household chores) करते हैं, तो कैंसर से होने वाली मौत का जोखिम 12% तक कम हो जाता है।
- मध्यम गतिविधि (Moderate Activity): रोजाना केवल 30 मिनट की तेज वॉक (Brisk Walking) करने से यह जोखिम 8% तक घट जाता है।
- हैवी वर्कआउट (Vigorous Activity): सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दिनभर में मात्र 5 मिनट की भारी या तेज गतिविधि (जैसे तेजी से सीढ़ियां चढ़ना या रस्सी कूदना) भी कैंसर से होने वाली मौत के खतरे को 22% तक कम कर सकती है।
डेस्क जॉब के दौरान एक्टिव रहने के 5 आसान और व्यावहारिक उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आपको अपनी नौकरी छोड़ने या जिम में घंटों पसीना बहाने की जरूरत नहीं है, बल्कि आपको बस अपने कामकाजी दिन में गतिशीलता (Movement) को शामिल करना होगा। इसके लिए आप इन आसान तरीकों को अपना सकते हैं:
- 30 मिनट का अलार्म लगाएं: हर आधे घंटे में अपनी कुर्सी से खड़े होने का नियम बनाएं। भले ही आप सिर्फ 1 मिनट के लिए खड़े हों या स्ट्रेचिंग करें।
- वॉकिंग मीटिंग्स और कॉल्स: जब भी आपके फोन पर कोई कॉल आए, तो अपनी सीट पर बैठकर बात करने के बजाय ऑफिस के गलियारे में टहलते हुए बात करें।
- मीटिंग्स के बीच में स्ट्रेचिंग: दो लगातार मीटिंग्स या काम के बीच में 2 मिनट का समय निकालकर अपनी पीठ, गर्दन और पैरों को स्ट्रेच करें।
- लंच ब्रेक का सही उपयोग: दोपहर का खाना खाने के बाद तुरंत अपनी सीट पर आकर काम न शुरू करें, बल्कि कम से कम 5-10 मिनट की एक छोटी वॉक जरूर लें।
- लिफ्ट को कहें ना: ऑफिस आते-जाते समय या चाय के ब्रेक के दौरान लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करने की आदत डालें।
अध्ययन को लेकर कुछ जरूरी बातें जो ध्यान में रखनी हैं
हालांकि यह अध्ययन आंखें खोलने वाला है, लेकिन इसके शोधकर्ताओं ने कुछ सीमाओं को भी स्पष्ट किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी (Observational Study) थी। इसका मतलब यह है कि यह शोध लगातार बैठने और कैंसर के बीच एक गहरा संबंध (Association) तो दिखाता है, लेकिन यह पूरी तरह से साबित नहीं करता कि सिर्फ बैठना ही कैंसर का सीधा और एकमात्र कारण है। कैंसर के पीछे अन्य जेनेटिक, लाइफस्टाइल और खान-पान से जुड़े कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
साथ ही, इस रिसर्च में यह अंतर नहीं स्पष्ट किया गया कि व्यक्ति ऑफिस में बैठ रहा था, टीवी देखते हुए बैठ रहा था या गाड़ी चलाते समय। फिर भी, यह निष्कर्ष हमें अपनी सुस्त जीवनशैली को अलविदा कहने और एक एक्टिव रूटीन अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए पर्याप्त है। याद रखें, आपकी कुर्सी आरामदायक हो सकती है, लेकिन वह आपकी सेहत की दुश्मन भी बन सकती है; इसलिए हर 30 मिनट में उठें और आगे बढ़ें!