आंध्र प्रदेश के कड़पा जिले में साल 2022 के बाद पहली बार कोविड-19 से 2 लोगों की मौत दर्ज की गई है। 4 नए एक्टिव केस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
आंध्र प्रदेश से एक भयानक खबर आई है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं और आम लोगों के दिलों को धड़काया है। 2022 के बाद राज्य में कोरोना वायरस (COVID-19) से मौत के मामले पहली बार दर्ज किए गए हैं। कड़पा जिले में संक्रमण से दो लोग मर गए हैं और चार अन्य कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए हैं। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया है जब दो मौतें और नए मामले सामने आए हैं, और पूरे क्षेत्र में निगरानी और सतर्कता को काफी तेज कर दिया गया है। इन चार साल बाद हुई मौतों ने प्रशासन को फिर से अलर्ट मोड पर ला दिया है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
दो मरीजों की मौत कैसे हुई? मेडिकल हिस्ट्री का पूरा विवरण जानें
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 जून को वेलोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) में कोरोना से पहली मौत दर्ज की गई थी। मृतक एक 60 वर्षीय बुजुर्ग था, जो पहले श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SVIMS) तिरुपति में उन्नत इलाज के लिए भर्ती हुआ था, लेकिन बाद में उन्हें सीएमसी वेलोर में स्थानांतरित कर दिया गया। मरीज की मृत्यु के बाद RT-PCR टेस्ट में उनके कोविड-19 पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज की स्थिति गंभीर हो गई क्योंकि वह पहले से ही डायबिटीज (मधुमेह), किडनी की बीमारी और अन्य गंभीर सह-रुग्णताओं से पीड़ित था।
इलाज के दौरान कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए एक 43 वर्षीय व्यक्ति भी संक्रमण से मर गया। शुरुआती तौर पर, उनके पूर्ववर्ती स्वास्थ्य विकारों (Pre-existing health conditions) का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड तुरंत नहीं मिल सका। मृतक को पहले कोरोना जैसे गंभीर लक्षणों के साथ कड़पा के सरकारी सामान्य अस्पताल (GGH-RIMS) में भर्ती कराया गया था, जहां वह इलाज के दौरान मर गया था।
कड़पा जिले में चार एक्टिव मामले पाए गए: सभी फुली वैक्सीनेटेड थे
स्वास्थ्य विभाग ने कड़पा जिले के चार अलग-अलग क्षेत्रों से चार एक्टिव कोरोना मरीज की पुष्टि की है। यह खुशी की बात है कि इन चार संक्रमित मरीजों में से तीन की हालत स्थिर है और वे अपने घरों में होम आइसोलेशन में रहकर स्वस्थ हो रहे हैं। कड़पा के गवर्नमेंट जनरल अस्पताल (GGH-RIMS) में एहतियात के तौर पर चौथे मरीज को हल्के लक्षणों को देखते हुए विशेष कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर उनकी स्थिति को देख रहे हैं।
इस मामले में सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि संक्रमित पाए गए चारों लोगों को पूरी तरह से वैक्सीन लगाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि सभी लोगों ने कोविड-19 वैक्सीन की दो खुराकें ली थीं, और एक मरीज ने बूस्टर डोज भी ली थी। इसके बावजूद वे संक्रमण से पीड़ित हुए, जो इस वायरस के बदलते रूप को दिखाता है।
Omicron Subvariant का संदेह: NITV पुणे में भेजे गए सैंपल
स्वास्थ्य अधिकारियों को लगता है कि मरीजों में देखे गए नैदानिक लक्षणों (Clinical symptoms) के आधार पर यह संक्रमण कोरोना के एक नए ओमिक्रॉन सबवैरिएंट से फैल रहा है। मृत मरीजों के सैंपल को राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), पुणे में जीनोम सीक्वेंसिंग (genome sequencing) के लिए भेजा गया है, ताकि वायरस के सटीक स्ट्रेन या वैरिएंट की पहचान और पुष्टि की जा सके। स्वास्थ्य विभाग अभी पुणे से जीनोम सीक्वेंसिंग की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही वायरस के म्यूटेशन के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने चौकसी बढ़ा दी, कलेक्टर ने एक मौत की पुष्टि की
कड़पा के जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इन नए मामलों के सामने आते ही किसी भी आउटब्रेक को रोका है। पूरे जिले में व्यापक मॉनिटरिंग और संपर्क ट्रेसिंग शुरू हो गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों, खासकर बुजुर्गों और अस्थमा, दिल या किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को सलाह दी है कि वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि उन्हें सांस लेने में तकलीफ, सर्दी या खांसी जैसे लक्षण दिखाई दें।
कड़पा के अलमासपेट निवासी महबूब बाशा की मौत के बाद पूरे इलाके में कोरोना से होने वाली तीसरी मौत की चर्चा हुई। कड़पा जिला कलेक्टर डॉ. चेरुकुरी श्रीधर ने अफवाहों को खारिज करते हुए तुरंत एक बयान दिया। कलेक्टर ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “मृतक की जान कोविड-19 के कारण नहीं गई है। उन्हें पहले से ही दिल और लीवर की गंभीर बीमारियां थीं। कोरोना वायरस उनकी मौत का कारण बिल्कुल नहीं है।प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और पैनिक न होने की अपील की है।