HDFC Bank के शेयरों में भारी गिरावट: जून तिमाही के नतीजों के बाद 5% टूटा स्टॉक, मार्जिन के दबाव से सहमा शेयर बाजार

HDFC Bank के शेयरों में भारी गिरावट: जून तिमाही के नतीजों के बाद 5% टूटा स्टॉक, मार्जिन के दबाव से सहमा शेयर बाजार

 

जून 2026 तिमाही के नतीजों में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में उम्मीद से ज्यादा गिरावट के कारण HDFC Bank का शेयर 5% तक टूट गया। इसका असर Axis और Kotak Mahindra Bank पर भी दिखा, जबकि ICICI Bank के शेयर मजबूत रहे।

 

सोमवार, 20 जुलाई 2026 को शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में भारी उथल-पुथल देखने को मिला। HDFC Bank, देश का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का ऋणदाता, जून 2026 तिमाही के वित्तीय नतीजे निवेशकों को लुभाने में असफल रहे। इससे बैंक के शेयरों में लगभग 5% की भारी गिरावट आई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि बैंक के शुद्ध लाभ (Net Profit) में निरंतर स्थिरता और संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है, लेकिन नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) में उम्मीद से कहीं अधिक तेज गिरावट ने निवेशकों को डरा दिया है, जिससे शेयर की कीमतें प्रभावित हुईं।

बाजार में मची हलचल, HDFC Bank के शेयर औंधे मुंह गिरे

सोमवार सुबह 9:30 बजे, HDFC Bank के शेयर 4.7 प्रतिशत गिरकर 781.10 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। पिछले कारोबारी सत्र में 819.60 रुपये पर बंद होने के बाद, स्टॉक ने बिकवाली के भारी दबाव में 777.50 रुपये का न्यूनतम स्तर छू लिया। बैंकिंग क्षेत्र के अन्य बड़े बैंकों पर भी HDFC Bank की इस कमजोरी का असर पड़ा। गत चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजों के बाद Axis Bank का शेयर 5.3% तक गिर गया, जबकि Kotak Mahindra Bank का शेयर 3% से अधिक गिर गया। बैंकिंग हैवीवेट्स के गिरने से बाजार पर भी दबाव बढ़ा, जिससे Nifty 50 सूचकांक 0.6% गिरकर 24,185.80 पर आ गया और Sensex 0.72% गिरकर 77,587.23 पर आ गया।

HDFC Bank पर मार्जिन के दबाव का असर

वित्तीय नतीजों की बात करें तो, जून 2026 की समाप्त तिमाही में HDFC Bank का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (Standalone Net Profit) सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 19,060 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 18,155 करोड़ रुपये था। बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) भी 7% बढ़कर 31,440 करोड़ रुपये से 33,530 करोड़ रुपये हो गई। लेकिन निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता लाभप्रदता में आई कमी थी। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) ब्याज अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों पर 3 प्रतिशत और कुल परिसंपत्तियों पर 3.26 प्रतिशत रह गया, जो विश्लेषकों के अनुमान से काफी कम है। इसके अलावा, पिछले वर्ष 35,734 करोड़ रुपये से ऑपरेटिंग प्रॉफिट 28,169 करोड़ रुपये पर आ गया। हालाँकि, कुल गैर-निष्पादित आस्तियां (Gross NPA) 1.40 प्रतिशत से घटकर 1.17 प्रतिशत पर आ गईं, जिससे एसेट की गुणवत्ता सुधारी गई।

ICICI Bank ने अपने उत्कृष्ट नतीजों से जीता

ICICI Bank ने इस चौतरफा बैंकिंग गिरावट के बीच उभरा। तिमाही में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण बैंक के शेयरों में लगभग 0.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ICICI Bank का समेकित लाभ 13.88 प्रतिशत बढ़कर 15,440 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ 15.95 प्रतिशत बढ़कर 14,804 करोड़ रुपये रहा। बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) भी 12.7% बढ़कर 24.384 करोड़ रुपये हो गई, जो लोन (Advances) में 20% की वृद्धि से प्रभावित हुई। बैंक का NIM भी 4.36 प्रतिशत हो गया। विपरीत परिस्थितियों में भी बैंक ने मार्जिन बचाने में कामयाब रहा, जैसा कि बैंक के एमडी और सीईओ संदीप बख्शी (संदीप बत्रा) ने बताया।

मुनाफा बढ़ने के बावजूद Axis Bank और Kotak Mahindra पर दिखाई दिया

उसने अपने स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ में 23 प्रतिशत की बड़ी उछाल (7,114 करोड़ रुपये) दर्ज की, लेकिन निवेशकों का ध्यान मार्जिन में आई कमी (Margin Compression) पर ही था। बैंक का NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) पिछले वर्ष के 3.80 प्रतिशत से घटकर 3.46% रह गया, जिससे इसका शेयर 5% से अधिक गिर गया। लेकिन अमिताभ चौधरी, प्रबंध निदेशक और सीईओ, ने कहा कि मार्जिन चालू चक्र में अपने निचले स्तर को छू चुका है और आगे सुधार होगा। Kotak Mahindra Bank का समेकित शुद्ध लाभ भी 22.55 प्रतिशत बढ़कर 5,480 करोड़ रुपये रहा, लेकिन इसका NIM भी पिछले वर्ष के 4.65 प्रतिशत से घटकर 4.53 प्रतिशत पर आ गया, जिससे इसके शेयरों में भी गिरावट आई।

बैंकिंग शेयरों में हुई इस भारी गिरावट के अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव ने निवेशकों को चिंतित कर दिया. वैश्विक कारणों से भी शेयर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर और संवेदनशील बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति के खतरे को फिर से बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों ने वैश्विक विकास दर की स्थिति को देखते हुए रक्षात्मक रुख अपनाया है।

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