Table of Contents
हरियाणा सरकार की नई वीबी जीरामजी योजना के तहत श्रमिकों को 409 रुपये दैनिक मजदूरी मिलेगी। जानिए कैसे 7 दिन में होगा भुगतान और केंद्र-राज्य सरकार ने दिए कितने करोड़।
हरियाणा सरकार ने राज्य के मेहनतकश श्रमिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी पहल की है। ‘वीबी जीरामजी योजना’ (VB Jeeramji Scheme) के माध्यम से हरियाणा सरकार ने राज्य के श्रमिकों को देश में सबसे अधिक दैनिक मजदूरी प्रदान करने का गौरव हासिल किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कुशल नेतृत्व में, यह योजना न केवल श्रमिकों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता और गतिशीलता लाने का एक बड़ा माध्यम साबित हो रही है।
देश में सर्वाधिक दैनिक मजदूरी और समय पर भुगतान
वीबी जीरामजी के तहत पूरे देश में हरियाणा प्रदेश सबसे ज्यादा मजदूरी 409 रुपए प्रतिदिन देगा, जो अब 15 दिन की बजाए 7 दिन के अंदर मिला करेगी।
“इस योजना की शुरुआत होते ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की तरफ से इस स्कीम में 590.19 करोड़ रुपये और हरियाणा प्रदेश की तरफ…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) July 3, 2026
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हरियाणा अब पूरे देश में श्रमिकों को 409 रुपये की सर्वाधिक दैनिक मजदूरी देने वाला राज्य बन गया है। सरकार ने न केवल वेतन की दर बढ़ाई है, बल्कि भुगतान की प्रक्रिया को भी अत्यधिक सरल और तीव्र बना दिया है। पहले श्रमिकों को उनकी मेहनत की कमाई के लिए 15 दिनों तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत यह मजदूरी केवल 7 दिनों के भीतर सीधे श्रमिकों के खाते में हस्तांतरित कर दी जाएगी। यह समयबद्ध भुगतान प्रणाली श्रमिकों की वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने और उन्हें साहूकारों के चंगुल से बचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त आर्थिक सहयोग
‘वीबी जीरामजी योजना’ की सफलता के पीछे केंद्र और राज्य सरकार का मजबूत तालमेल है। विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने हाल ही में इस योजना के वित्तीय पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि योजना के शुभारंभ के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे गति देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 590.19 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि जारी की है। इसके साथ ही, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने भी अपने खजाने से लगभग 370 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। केंद्र और राज्य द्वारा कुल मिलाकर लगभग 960 करोड़ रुपये से अधिक की यह राशि श्रमिकों के कल्याण के लिए समर्पित की गई है, जो इस योजना की गंभीरता और व्यापकता को दर्शाती है।
ग्रामीण विकास और रोजगार का सशक्तिकरण
यह योजना केवल वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना भी है। विकास एवं पंचायत विभाग के माध्यम से लागू की गई यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास में लगे श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करती है। जब श्रमिक को उसकी मेहनत का उचित मूल्य और समय पर भुगतान मिलता है, तो वह अधिक कुशलता और उत्साह के साथ कार्य करता है, जिससे अंततः राज्य के विकास कार्यों में तेजी आती है।
पारदर्शिता और सुशासन का मॉडल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ‘बिना पर्ची-बिना खर्ची’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए इस योजना को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से मजदूरी का भुगतान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजने से बिचौलियों का कोई स्थान नहीं रह गया है। यह व्यवस्था सुशासन का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी कटौती के पहुंच रहा है।
श्रमिकों के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद
‘वीबी जीरामजी योजना’ हरियाणा के उन लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई है जो अपनी आजीविका के लिए दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं। इस पहल ने साबित कर दिया है कि यदि सरकार की नीयत साफ हो और नेतृत्व का विजन स्पष्ट हो, तो आम आदमी के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना संभव है। हरियाणा सरकार का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है, जहाँ श्रमिक हित सर्वोपरि हैं।
आने वाले समय में, यह योजना न केवल बेरोजगारी के आंकड़ों को कम करेगी, बल्कि ग्रामीण विकास के साथ-साथ श्रमिकों के कौशल और जीवन स्तर में भी गुणात्मक सुधार लाएगी। हरियाणा सरकार की यह प्रतिबद्धता स्पष्ट करती है कि प्रदेश की प्रगति का असली आधार यहाँ के श्रमिक हैं, और उनका सम्मान व उत्थान ही सरकार की पहली प्राथमिकता है।