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हरियाणा सरकार 14 मई को 13 संवेदनशील जिलों में राज्य स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल आयोजित करेगी। वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह अभ्यास 2023 और 2025 की बाढ़ के अनुभवों पर आधारित है।
14 मई को 13 जिलों में होगी राज्य स्तरीय ‘बाढ़ मॉक ड्रिल’
चंडीगढ़: मानसून के आगमन से पहले हरियाणा सरकार ने बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अपनी कमर कस ली है। आगामी 14 मई को प्रदेश के बाढ़ संभावित 13 जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर राज्य स्तरीय ‘बाढ़ मॉक ड्रिल’ (Flood Mock Drill) आयोजित की जाएगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस व्यापक अभ्यास की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन प्रणालियों की तत्परता को परखना और जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करना है।
आपदा प्रबंधन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम
हरियाणा सरकार द्वारा 14 मई को बाढ़ संभावित 13 जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर राज्य स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।
यह बाढ़ मॉक ड्रिल गुरुग्राम, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, पानीपत, पलवल, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर जिलों में आयोजित की… pic.twitter.com/RsrQTQh7fh
— DPR Haryana (@DiprHaryana) May 13, 2026
डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस मॉक ड्रिल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अभ्यास पिछले वर्षों के कड़वे अनुभवों से सीख लेकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, “यह व्यापक अभ्यास 2023 और 2025 में आई बाढ़ से मिले अनुभवों के आधार पर राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जो किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और सटीक प्रतिक्रिया (Response) दे सके।
इन 13 संवेदनशील जिलों में होगा अभ्यास
यह राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल हरियाणा के उन जिलों में आयोजित की जा रही है जो भौगोलिक रूप से बाढ़ के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। इनमें शामिल हैं:
गुरुग्राम, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, पानीपत, पलवल, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर।
क्या है इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य?
डॉ. सुमिता मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाले इस अभ्यास के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अंतर-विभागीय समन्वय: पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई, सेना/एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल की जांच।
- उपकरणों की जांच: नावों, लाइफ जैकेट, पंपों और संचार प्रणालियों की कार्यक्षमता को परखना।
- त्वरित बचाव अभियान: संकट के समय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने (Evacuation) की गति का परीक्षण।
- संसाधन मानचित्रण: आपात स्थिति के लिए आवश्यक रसद और राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
‘जीरो कैजुअल्टी’ के लक्ष्य पर ध्यान
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस वर्ष ‘जीरो कैजुअल्टी’ (शून्य जनहानि) के लक्ष्य को सामने रखा है। डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस मॉक ड्रिल को पूरी गंभीरता के साथ वास्तविक स्थितियों को ध्यान में रखकर अंजाम दिया जाए। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि वे इन जिलों में मॉक ड्रिल के दौरान घबराएं नहीं और प्रशासन का सहयोग करें।
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