हरियाणा में औद्योगिक क्रांति: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘मेक इन हरियाणा’ नीति और 9 नई सेक्टरल पॉलिसी की शुरुआत की

हरियाणा में औद्योगिक क्रांति: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 'मेक इन हरियाणा' नीति और 9 नई सेक्टरल पॉलिसी की शुरुआत की

 

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘मेक इन हरियाणा’ नीति और 9 नई सेक्टरल पॉलिसियों का शुभारंभ किया। स्मार्ट इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन पोर्टल से निवेश को मिलेगी नई गति।

हरियाणा को देश का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बनाने के विजन के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने ‘मेक इन हरियाणा’ (Make in Haryana) नीति का आधिकारिक शुभारंभ किया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में निवेश को आकर्षित करना, उद्योगों के लिए सुगम वातावरण बनाना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

9 नई सेक्टरल पॉलिसियों से औद्योगिक विकास को गति

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 9 नई सेक्टरल पॉलिसियों (Sectoral Policies) का भी उद्घाटन किया। इन नीतियों का उद्देश्य विशिष्ट उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देना है, जिससे प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक इकाइयों का जाल बिछेगा और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का यह कदम हरियाणा को वैश्विक स्तर पर एक निवेश-अनुकूल गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।

स्मार्ट इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन पोर्टल: निवेशकों के लिए वन-स्टॉप समाधान

निवेशकों की सुविधा और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘स्मार्ट इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन पोर्टल’ का भी उद्घाटन किया। यह पोर्टल निवेशकों के लिए एक ‘वन-स्टॉप’ समाधान के रूप में कार्य करेगा, जहाँ उन्हें सरकारी मंजूरियां, लाइसेंस और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यह पोर्टल पूरी तरह से तकनीक आधारित है, जो ‘सुशासन’ के वादे को जमीनी स्तर पर साकार करेगा।

विकास और रोजगार का नया अध्याय

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार उद्योगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है। ‘मेक इन हरियाणा’ नीति केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हरियाणा के युवाओं को उनके अपने प्रदेश में विश्व स्तरीय करियर के अवसर प्रदान करने का जरिया भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन नीतियों के क्रियान्वयन से हरियाणा में न केवल बड़े कॉर्पोरेट घराने निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे, बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी अपनी पहचान बनाने का बेहतरीन मौका मिलेगा। यह कदम हरियाणा को ‘विकसित भारत’ के संकल्प में एक अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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