हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: दहेज प्रथा के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू; अब SDM होंगे दहेज निषेध अधिकारी

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: दहेज प्रथा के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू; अब SDM होंगे दहेज निषेध अधिकारी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर प्रदेश में दहेज प्रथा के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू हुआ है। SDMs को दहेज निषेध अधिकारी नियुक्त कर शिकायतों के त्वरित निपटारे के आदेश दिए गए हैं।

 

हरियाणा में दहेज प्रथा पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का बड़ा फैसला; SDM संभालेंगे कमान

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेश को ‘दहेज मुक्त’ बनाने के संकल्प के साथ एक बड़े राज्यव्यापी जागरूकता अभियान की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार ने सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए प्रशासनिक ढांचे को सक्रिय कर दिया है। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने बुधवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सभी उपायुक्तों (DCs) को युवाओं, ग्रामीण समुदायों और शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक स्तर पर जनमत तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

SDM बने ‘दहेज निषेध अधिकारी’: शिकायतों पर होगी त्वरित कार्रवाई

इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDMs) होंगे, जिन्हें आधिकारिक तौर पर ‘दहेज निषेध अधिकारी’ (Dowry Prohibition Officers) के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने का जिम्मा सौंपा गया है। अब सभी SDM न केवल दहेज से जुड़ी शिकायतों का निपटारा करेंगे, बल्कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और जन-जागरूकता के लिए भी सीधे उत्तरदायी होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दहेज निषेध अधिकारियों के नाम, संपर्क नंबर और ईमेल आईडी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि पीड़ित परिवार बिना किसी डर के उनसे संपर्क कर सकें।

“दहेज लेना और देना दोनों पाप”: मुख्यमंत्री का सख्त रुख

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हरियाणा में महिलाओं का सम्मान और उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। सरकार ने दोहराया है कि दहेज की मांग करना और उसे देना, दोनों ही कानूनन दंडनीय अपराध हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को भी विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं। यह अभियान केवल कानून तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आंगनवाड़ी नेटवर्क और पंचायती राज संस्थानों के माध्यम से गांव-गांव तक जागरूकता की अलख जगाएगा।

युवाओं और शिक्षण संस्थानों पर विशेष फोकस

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान के तहत विशेष रूप से युवाओं को लक्षित किया जाए। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सेमिनार आयोजित किए जाएंगे ताकि आने वाली पीढ़ी को इस सामाजिक बुराई के खिलाफ खड़ा किया जा सके। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (HALSA) के सहयोग से कानूनी साक्षरता शिविर भी लगाए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकें।

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