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हरियाणा सरकार ने गौशालाओं का बजट 40 करोड़ से बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये कर दिया है। मंत्री रणबीर गंगवा ने गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन नीति के तहत गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प दोहराया।
हरियाणा सरकार प्रदेश में गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार की गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन नीति का मुख्य उद्देश्य गौशालाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर उन्हें ‘आत्मनिर्भर’ बनाना है। लोक निर्माण (PWD) एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने सरकार की इस प्राथमिकता को दोहराते हुए कहा कि गौ-सेवा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है।
बजट में 15 गुना वृद्धि: सेवा और संकल्प का प्रतीक
मंत्री रणबीर गंगवा ने गौवंश के लिए किए गए बजट प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान सरकार ने गौशालाओं के वार्षिक बजट में ऐतिहासिक वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पूर्व हरियाणा में गौशालाओं के लिए वार्षिक बजट मात्र 40 करोड़ रुपये हुआ करता था, जिसे मौजूदा सरकार ने बढ़ाकर अब 600 करोड़ रुपये कर दिया है। बजट में की गई यह लगभग 15 गुना वृद्धि दर्शाती है कि हरियाणा सरकार गौ-सेवा और गौवंश के स्वावलंबन के लिए कितनी गंभीर है।
गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर
मंत्री गंगवा ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल अनुदान ही नहीं दे रही, बल्कि गौशालाओं को स्वयं के पैरों पर खड़ा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन नीति के तहत गौशालाओं में सोलर प्लांट लगाने, पंचगव्य उत्पादों को बढ़ावा देने और प्राकृतिक खेती के लिए खाद तैयार करने जैसी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की प्रत्येक गौशाला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने, ताकि गौवंश की देखरेख में कोई कमी न आए।
सांस्कृतिक विरासत और गौ-वंश का सम्मान
श्री रणबीर गंगवा के अनुसार, गौवंश भारतीय संस्कृति की धुरी है। गौवंश के संरक्षण से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। उन्होंने गौशाला संचालकों से अपील की कि वे सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों का लाभ उठाएं। सरकार गौशालाओं के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और चारे के लिए पर्याप्त अनुदान राशि सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि प्रदेश में कोई भी गौवंश बेसहारा न रहे।