नायब सिंह सैनी सरकार 25 हजार टन जिप्सम पर ₹15.63 करोड़ खर्च करेगी। 50% सब्सिडी के जरिए करीब 10 लाख एकड़ भूमि सुधारने का लक्ष्य रखा गया है।
हरियाणा सरकार ने किसानों की भूमि की गुणवत्ता सुधारने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर राज्य में किसानों को भूमि सुधार के लिए पर्याप्त मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला जिप्सम उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। सरकार लगभग 25,000 टन जिप्सम की खरीद करेगी, जिस पर करीब ₹15.63 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इस जिप्सम के माध्यम से राज्य में लगभग 10 लाख एकड़ भूमि के सुधार का लक्ष्य रखा गया है।
10 लाख एकड़ भूमि सुधारने की योजना
हरियाणा सरकार के इस कदम का उद्देश्य ऐसी कृषि भूमि की गुणवत्ता में सुधार करना है, जहां मिट्टी की स्थिति फसल उत्पादन के लिए अनुकूल नहीं है। जिप्सम के उपयोग से भूमि सुधार प्रक्रिया को बढ़ावा देने की योजना है, जिससे किसानों की जमीन अधिक उपजाऊ बनाने में मदद मिल सके।
सरकार का मानना है कि यदि खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी तो फसलों की उत्पादकता भी बढ़ सकती है। इससे किसानों को अपनी कृषि भूमि से बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिलेगी और खेती की लागत तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
25 हजार टन जिप्सम की होगी खरीद
राज्य सरकार करीब 25,000 टन जिप्सम खरीदने जा रही है। इसके लिए लगभग ₹15.63 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। सरकार की योजना के अनुसार, खरीदा गया जिप्सम किसानों को भूमि सुधार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
इतनी बड़ी मात्रा में जिप्सम की खरीद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को आवश्यकता के अनुसार जिप्सम आसानी से मिल सके और भूमि सुधार की प्रक्रिया केवल सीमित क्षेत्रों तक न रह जाए। सरकार का फोकस किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने पर है।
50 प्रतिशत सब्सिडी पर किसानों को मिलता है जिप्सम
हरियाणा के किसानों के लिए भूमि सुधार को बढ़ावा देने की बड़ी पहल!
प्रदेश के किसानों की करीब 10 लाख एकड़ भूमि को सुधारने के लिए लगभग 15.63 करोड़ रुपये की लागत से 25 हजार टन जिप्सम की खरीद की जाएगी। इससे किसानों को भूमि सुधार के लिए पर्याप्त मात्रा में जिप्सम उपलब्ध हो सकेगा।… pic.twitter.com/HqOQP4ckJT
— DPR Haryana (@DiprHaryana) August 18, 2026
हरियाणा लैंड रिक्लेमेशन कॉरपोरेशन के माध्यम से किसानों को भूमि सुधार के लिए जिप्सम 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाता है। सब्सिडी की इस व्यवस्था से किसानों पर भूमि सुधार का आर्थिक बोझ कम होता है और वे अपनी कृषि भूमि की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिप्सम का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सरकार की कोशिश है कि किसानों को भूमि सुधार के लिए आवश्यक सामग्री आसानी से और किफायती दर पर उपलब्ध हो। इससे अधिक से अधिक किसान अपनी जमीन की गुणवत्ता सुधारने की प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिए निर्देश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला जिप्सम आसानी से उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि भूमि सुधार की प्रक्रिया में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का इस्तेमाल हो, ताकि किसानों की जमीन की उत्पादकता में तेजी से सुधार किया जा सके।
सरकार के अनुसार, भूमि की गुणवत्ता में सुधार सीधे तौर पर किसानों की उत्पादकता से जुड़ा हुआ है। इसलिए खेतों की मिट्टी को बेहतर बनाने और उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
किसानों की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
कृषि क्षेत्र में जमीन की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव फसल उत्पादन पर पड़ता है। यदि मिट्टी में आवश्यक गुणों का संतुलन बेहतर हो तो फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसी उद्देश्य से हरियाणा सरकार भूमि सुधार की योजनाओं को बढ़ावा दे रही है।
जिप्सम की उपलब्धता बढ़ने से उन किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनकी भूमि को सुधार की आवश्यकता है। सरकार का लक्ष्य है कि भूमि सुधार के जरिए किसानों की कृषि उत्पादकता बढ़ाई जाए और उनकी आय में सुधार की संभावनाएं मजबूत हों।
खेती को अधिक उपजाऊ और उत्पादक बनाने की कोशिश
हरियाणा देश के प्रमुख कृषि राज्यों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में कृषि भूमि की गुणवत्ता बनाए रखना और खराब हो रही भूमि को दोबारा उत्पादक बनाना महत्वपूर्ण है।
सरकार का कहना है कि जिप्सम की पर्याप्त उपलब्धता से भूमि सुधार की प्रक्रिया को गति मिलेगी। लगभग 10 लाख एकड़ भूमि को सुधारने का लक्ष्य इस पहल के व्यापक दायरे को दर्शाता है। किसानों को सब्सिडी के जरिए जिप्सम उपलब्ध कराने से उन्हें आर्थिक राहत भी मिलेगी।
किसानों को समय पर मिलेगी भूमि सुधार सामग्री
सरकार की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य जिप्सम की उपलब्धता से जुड़ी संभावित कमी को दूर करना है। पर्याप्त मात्रा में जिप्सम की खरीद होने से किसानों को भूमि सुधार के लिए जरूरी सामग्री समय पर मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि खरीदे गए जिप्सम की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था को प्रभावी तरीके से सुनिश्चित किया जाए। इससे किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाला जिप्सम पहुंचाने और भूमि सुधार के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।
हरियाणा सरकार का कृषि सुधार पर फोकस
हरियाणा सरकार की इस पहल को किसानों की भूमि की उत्पादकता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। करीब ₹15.63 करोड़ की लागत से 25,000 टन जिप्सम खरीदने और लगभग 10 लाख एकड़ भूमि सुधारने की योजना से बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य केवल जिप्सम उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों की जमीन को अधिक उपजाऊ बनाकर लंबे समय में कृषि उत्पादकता बढ़ाना है। यदि योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो इससे भूमि सुधार के साथ-साथ किसानों की उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है।