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मिडिल ईस्ट संकट के कारण प्रभावित MSME सेक्टर को राहत देने के लिए सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना ला रही है। जानें ब्याज दरों और टैक्स कटौती से जुड़ी पूरी डिटेल।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब भारतीय व्यापार जगत पर भी दिखने लगा है। इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) को सहारा देने के लिए केंद्र सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपये की एक नई ऋण गारंटी योजना लाने पर विचार कर रही है।
क्या है यह योजना और कैसे मिलेगी राहत?
योजना का मुख्य उद्देश्य उन कारोबारियों की मदद करना है, जो युद्ध के कारण उपजे वैश्विक हालातों की वजह से अपना कर्ज चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं।
- 90% ऋण गारंटी: यदि अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कोई उधारकर्ता ऋण चुकाने में चूक (Default) करता है, तो सरकार उधारदाताओं (बैंकों/वित्तीय संस्थानों) को 100 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 90% की गारंटी देगी।
- एनसीजीटीसी (NCGTC) की भूमिका: बैंक ऋण पर यह गारंटी ‘नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी’ देगी, जो पूरी तरह से सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है।
- बजट प्रावधान: इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार को करीब 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान करना होगा।
कोविड-19 के दौरान सफल रही थी ‘ईसीएलजीएस’
सरकार का यह कदम नया नहीं है। ऐसी ही एक योजना (ECLGS) मई 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत शुरू की गई थी। उस समय भी इस योजना ने लाखों एमएसएमई को बंद होने से बचाया था। पिछली योजना की सफलता को देखते हुए ही सरकार इस बार भी इसी मॉडल पर काम कर रही है ताकि ब्याज दरें कम रहें और बिना किसी ‘प्रोसेसिंग शुल्क’ के उद्यमियों को पैसा मिल सके।
आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए उठाए कदम
कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से आम आदमी को राहत देने के लिए सरकार ने टैक्स मोर्चे पर भी कई बड़े फैसले लिए हैं:
- उत्पाद शुल्क में कटौती: 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी।
- आयात शुल्क से राहत: 2 अप्रैल को सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात को सीमा शुल्क (Customs Duty) से मुक्त कर दिया है।
- निर्यात पर लगाम: घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डीजल और विमान ईंधन (ATF) पर निर्यात शुल्क लगाया गया है।
क्यों पड़ी इस योजना की जरूरत?
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 50% तक बढ़ चुकी हैं। भारत कच्चे तेल के साथ-साथ उर्वरक और प्राकृतिक गैस का भी बड़ा आयातक है। समुद्री मार्गों (विशेषकर होर्मुज स्ट्रेट) में व्यवधान के कारण सप्लाई चेन टूट रही है, जिसका सीधा असर छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) पर पड़ रहा है।