गोविंदपुरी आग त्रासदी पर सौरभ भारद्वाज का प्रशासन पर हमला। पूछा- पालम, विवेक विहार और मालवीय नगर के बाद अब गोविंदपुरी की जांच रिपोर्ट क्यों नहीं आई सामने?
दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में हाल ही में हुई भीषण आग की घटना ने एक बार फिर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। इसके साथ ही, उन्होंने दिल्ली में लगातार बढ़ रही आग की घटनाओं और उनकी ‘गायब’ जांच रिपोर्टों पर प्रशासन को घेरा है।
‘स्थानीय लोगों की बहादुरी सराहनीय’
गोविंदपुरी में आग लगने की घटना बेहद दुखद है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति गहरी संवेदनाएँ।
इस त्रासदी में एक बात सामने आई कि स्थानीय लोगों और पड़ोसियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बचाने की कोशिश की। कहीं साड़ियों के सहारे लोग नीचे उतारे गए, तो… pic.twitter.com/eCy6Xp5NTr
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) June 12, 2026
सौरभ भारद्वाज ने आग के दौरान स्थानीय निवासियों और पड़ोसियों द्वारा दिखाए गए अदम्य साहस की सराहना की। उन्होंने कहा, “जिस तरह से पड़ोसियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर साड़ियों के सहारे और अन्य माध्यमों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, वह मानवीयता की मिसाल है। ऐसे कठिन समय में स्थानीय लोगों का आपसी सहयोग ही सबसे बड़ा सहारा बना।”
जांच रिपोर्टों पर उठाए कड़े सवाल
घटना पर तंज कसते हुए भारद्वाज ने पूछा कि आखिर हर बड़ी आग के बाद होने वाली जांच का नतीजा क्या निकलता है? उन्होंने पालम, विवेक विहार, मालवीय नगर और अब गोविंदपुरी का जिक्र करते हुए कहा, “इन हादसों के बाद जांच के आदेश तो तुरंत दे दिए जाते हैं, लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि रिपोर्टें कभी सार्वजनिक नहीं होतीं। आखिर ये रिपोर्टें कहां दबी हैं? अगर सच सामने नहीं आएगा, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और ऐसी घटनाओं को रोका कैसे जाएगा?”
दिल्ली की जनता को चाहिए जवाब
सौरभ भारद्वाज ने प्रशासन से स्पष्ट सवाल किया कि दिल्ली की जनता को यह जानने का हक है कि इन हादसों के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक जांच के आदेश देना काफी नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो।