MCX पर 18 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। जानें कच्चे तेल की तेजी, महंगाई और अमेरिकी Fed की ब्याज दरों की चिंता का कीमती धातुओं पर असर।
मंगलवार, 18 अगस्त को घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। हालिया तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता ने कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित किया। MCX पर शुरुआती कारोबार में अक्टूबर एक्सपायरी वाला सोना करीब 0.55 फीसदी की गिरावट के साथ 1,55,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि सितंबर कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी लगभग 1 फीसदी टूटकर 2,35,655 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। हाल के महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, इसलिए ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली भी बाजार की चाल को प्रभावित करने वाला एक अहम कारण बनी हुई है। पिछले महीनों के कमोडिटी आउटलुक में भी सोने-चांदी और कच्चे तेल के वायदा भाव में लगातार तेज उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है।
मुनाफावसूली ने बढ़ाया बिकवाली का दबाव
कीमती धातुओं में तेजी के बाद अक्सर निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली करते हैं। मंगलवार को भी बाजार में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। सोने की कीमतों में हालिया मजबूती के बाद ऊंचे स्तर पर बैठे निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे भाव पर दबाव बढ़ा। चांदी में यह गिरावट अपेक्षाकृत ज्यादा रही और शुरुआती कारोबार में करीब 1 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली। चांदी की कीमत सोने के मुकाबले कई बार अधिक अस्थिर रहती है, क्योंकि इसमें निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव का असर चांदी पर तेज दिखाई दे सकता है।
कच्चे तेल की तेजी से क्यों बढ़ी चिंता?
सोने और चांदी के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक संकेतों में कच्चे तेल की कीमत भी शामिल है। ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने से बाजार में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो ऊर्जा लागत बढ़ने के कारण दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव कायम रह सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। इसके उलट, जरूरत पड़ने पर वे दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं या सख्त मौद्रिक नीति का संकेत दे सकते हैं। यही आशंका सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले एसेट पर दबाव डाल सकती है।
महंगी ब्याज दरों से सोने को क्यों नुकसान?
सोना निवेशकों को नियमित ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। इसलिए जब बैंकिंग और सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्पों पर ब्याज दरें आकर्षक होती हैं, तो कुछ निवेशक सोने के बजाय इन विकल्पों में पैसा लगाना पसंद कर सकते हैं। ब्याज दरों में बढ़ोतरी या लंबे समय तक ऊंची दरों की संभावना से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड को समर्थन मिल सकता है, जो आम तौर पर सोने की कीमत के लिए चुनौती पैदा करता है। हालांकि, यह संबंध हमेशा एक जैसा नहीं रहता। भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारक सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन भी दे सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पर भी बाजार की नजर
कच्चे तेल की कीमतों के पीछे भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अपेक्षित प्रगति नहीं होने और मध्य पूर्व में तनाव के कारण तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार सतर्क है। होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है और तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका मजबूत होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इसका असर महंगाई की उम्मीदों और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर पड़ सकता है।
अब फेड के मिनट्स पर टिकी नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बाजार के लिए अगला बड़ा ट्रिगर है। निवेशक फेड की पिछली बैठक के मिनट्स और अधिकारियों के संकेतों को ध्यान से देखेंगे। बाजार इस बात का आकलन करना चाहता है कि महंगाई और आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए फेड आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर किस तरह का रुख अपना सकता है। यदि फेड का रुख उम्मीद से ज्यादा सख्त दिखाई देता है, तो डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मजबूत हो सकते हैं, जिसका असर सोने और चांदी पर पड़ सकता है।
महंगाई के आंकड़े भी होंगे अहम
आने वाले दिनों में अमेरिका के महंगाई संबंधी आंकड़े भी कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। खासतौर पर PCE महंगाई डेटा फेड के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो ब्याज दरों में जल्द नरमी की उम्मीद कमजोर हो सकती है। इसके विपरीत, महंगाई में नरमी से बाजार में दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है, जो सोने के लिए सकारात्मक संकेत बन सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों का ध्यान सिर्फ सोने-चांदी की कीमतों पर नहीं, बल्कि अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर भी रहेगा।
सोने-चांदी में आगे कैसा रह सकता है रुख?
फिलहाल सोने और चांदी की दिशा कई परस्पर जुड़े कारकों पर निर्भर करेगी। एक तरफ ऊंचा कच्चा तेल, महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता कीमती धातुओं पर दबाव डाल सकती है, तो दूसरी तरफ भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग उन्हें सहारा दे सकती है। चांदी में औद्योगिक मांग भी एक अतिरिक्त कारक है। ऐसे में निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल, फेड के संकेत और महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी होगा।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
मंगलवार की गिरावट को फिलहाल बाजार की सामान्य अस्थिरता और मुनाफावसूली के संदर्भ में देखा जा सकता है। केवल एक दिन की कमजोरी के आधार पर सोने या चांदी के आगे के पूरे ट्रेंड का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। कमोडिटी बाजार में वैश्विक घटनाओं के कारण कीमतें तेजी से बदल सकती हैं। इसलिए निवेशकों को अपने जोखिम, निवेश अवधि और बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व का रुख सोने-चांदी की अगली दिशा के लिए सबसे अहम संकेतक बने रह सकते हैं।