सोने और चांदी के ईटीएफ (ETF) में 6% तक की गिरावट। जानिए क्या है बाजार में इस बिकवाली का कारण और विशेषज्ञों की राय।
सोमवार का दिन कीमती धातुओं के निवेशकों के लिए एक कठिन दिन साबित हुआ। वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों पर आए भारी दबाव का सीधा असर भारत में सूचीबद्ध प्रमुख गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) पर देखने को मिला। बाजार में हुई इस बिकवाली के चलते गोल्ड ईटीएफ में 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सिल्वर ईटीएफ की स्थिति और भी खराब रही, जहाँ अधिकांश फंड्स में 6 प्रतिशत से अधिक का गोता देखा गया। यह गिरावट वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में हो रहे बदलावों और निवेशकों के बीच बढ़ती चिंता का स्पष्ट संकेत है।
गोल्ड ईटीएफ का हाल
गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने वाले निवेशकों को इस गिरावट से काफी नुकसान उठाना पड़ा। टाटा गोल्ड ईटीएफ 2.53% गिरकर 14.62 रुपये पर आ गया, जबकि निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईएस (Gold BeES) 2.64% की गिरावट के साथ 124.41 रुपये पर बंद हुआ। इसके अलावा, ग्रो गोल्ड ईटीएफ, जेरोधा गोल्ड ईटीएफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ में भी क्रमशः 2.45%, 2.67% और 2.68% की गिरावट दर्ज की गई। अन्य प्रमुख गोल्ड फंड्स जैसे एसबीआई गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड स्कीम, एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ और एक्सिस गोल्ड ईटीएफ भी दबाव में रहे, जहाँ एक्सिस गोल्ड ईटीएफ में सबसे अधिक 3.06% की गिरावट देखी गई। यूटीआई गोल्ड ईटीएफ और एलआईसी एमएफ गोल्ड ईटीएफ ने भी क्रमशः 2.54% और 2.12% का नुकसान दर्ज किया।
सिल्वर ईटीएफ में गहराया संकट
सिल्वर ईटीएफ में गिरावट का रुख गोल्ड के मुकाबले कहीं अधिक गहरा और तेज रहा। टाटा सिल्वर ईटीएफ में 6.19% और निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ में 6.26% की भारी गिरावट दर्ज की गई। जेरोधा सिल्वर ईटीएफ और ग्रो सिल्वर ईटीएफ भी 6% से अधिक गिरकर क्रमशः 24.26 रुपये और 23.42 रुपये पर बंद हुए। एचडीएफसी सिल्वर ईटीएफ को 6.42% का नुकसान झेलना पड़ा। इसके अतिरिक्त, कोटक सिल्वर ईटीएफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ, एसबीआई सिल्वर ईटीएफ और आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ईटीएफ ने भी 6% से अधिक की गिरावट दर्ज की। एंजेल वन सिल्वर ईटीएफ में भी 5.66% की गिरावट देखी गई। सिल्वर ईटीएफ में यह भारी गिरावट औद्योगिक और कीमती धातु की मांग में अनिश्चितता को दर्शाती है।
गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट अचानक नहीं है। लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग ने इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि अमेरिका से आए उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़ों ने मुद्रास्फीति और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिसने सोने और चांदी जैसी ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) संपत्तियों के आकर्षण को कम कर दिया है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया (West Asia), विशेषकर इजरायल से संबंधित हालिया घटनाक्रमों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ है।
एक और बड़ा कारक कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति में व्यवधान की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को 4% बढ़ाकर 94.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचा दिया है। तेल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव को और बढ़ा रहा है, जिससे निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित करने के बजाय प्रॉफिट बुकिंग पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
बाजार का भविष्य और निष्कर्ष
बाजार के जानकारों का मानना है कि बढ़ती मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी ने निवेशकों को कीमती धातुओं में मुनाफावसूली करने पर मजबूर कर दिया है। सिल्वर ईटीएफ में आई गिरावट यह भी संकेत देती है कि औद्योगिक क्षेत्र में धातुओं की मांग को लेकर बाजार में डर का माहौल है। वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में निवेशकों के लिए आगे की राह चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। फिलहाल, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक संकेतकों पर निवेशकों की पैनी नजर है, क्योंकि इन्ही कारकों से तय होगा कि आने वाले दिनों में कीमती धातुओं का बाजार किस दिशा में जाएगा। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्कता बरतें और अपने पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करें।