गोवा का कारापुर मेगा प्रोजेक्ट विवाद: जंतर-मंतर पहुंचे ग्रामीणों को AAP का पूरा समर्थन, आतिशी ने कहा- ‘बिल्डरों के साथ खड़ी है BJP’

गोवा का कारापुर मेगा प्रोजेक्ट विवाद: जंतर-मंतर पहुंचे ग्रामीणों को AAP का पूरा समर्थन, आतिशी ने कहा- 'बिल्डरों के साथ खड़ी है BJP'

 

गोवा के कारापुर में मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर ग्रामीणों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया। AAP ने ज़मीन बचाने की इस लड़ाई को पूरा समर्थन दिया है।

गोवा के डिचोली (Bicholim) तालुका में आने वाले कारापुर-सरवन गांव का मामला इस समय बेहद गरमा गया है। एक तरफ जहां स्थानीय ग्रामीण और पर्यावरणविद अपनी ज़मीन बचाने के लिए 100 दिनों से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह मुद्दा अब गोवा की क्षेत्रीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुका है। हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शन ने इस स्थानीय आंदोलन को एक राष्ट्रीय मंच दे दिया है, जहां राजनीतिक दलों का समर्थन भी इसे मिलने लगा है।

100 दिनों का संघर्ष: दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंची गूंज

अपनी मातृभूमि, जल सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा के लिए कारापुर के ग्रामीणों का धैर्य और संघर्ष अब 100 दिनों के पड़ाव को पार कर चुका है। लंबे समय तक गांव में ही शांतिपूर्ण धरना देने के बाद, न्याय की आस में आंदोलनकारी दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज़ को राज्य स्तर पर दबाने की कोशिश की जा रही थी, इसलिए उन्हें देश की राजधानी में आकर अपनी मांगें बुलंद करनी पड़ीं। दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर अपनी ज़मीन से समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

राजनीतिक घमासान: आम आदमी पार्टी ने दिया पूर्ण समर्थन

जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को उस समय बड़ी राजनीतिक ताकत मिली जब आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी ने आंदोलनकारियों से मुलाकात की और उन्हें अपनी पार्टी का पूरा समर्थन देने का एलान किया। इस दौरान आतिशी ने गोवा की प्रमोद सावंत सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बेहद शर्मनाक है कि सरकार अपने ही ‘गोएंकार’ (गोवा के स्थानीय लोगों) के साथ खड़े होने के बजाय बड़े बिल्डरों और कॉलोनाइज़र्स की मददगार बनी हुई है। आतिशी ने साफ शब्दों में कहा कि आम आदमी पार्टी इस ऐतिहासिक लड़ाई में ग्रामीणों के साथ है और वे कॉरपोरेट या बिल्डर लॉबी को गोवा की पहचान और पर्यावरण तबाह नहीं करने देंगे।

53 हेक्टेयर का मेगा प्रोजेक्ट और ग्रामीणों की चिंताएं

दरअसल, यह पूरा विवाद कारापुर-सरवन गांव में प्रस्तावित एक विशाल लक्ज़री हाउसिंग और रियल एस्टेट मेगा प्रोजेक्ट को लेकर है, जो करीब 53 हेक्टेयर (लगभग 5.5 लाख वर्ग मीटर) क्षेत्र में फैला हुआ है।

पर्यावरण को खतरा: पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों का दावा है कि इस प्रोजेक्ट के कारण गांव की हरी-भरी पहाड़ियों, प्राकृतिक जंगलों और जल स्रोतों को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी, जिससे भविष्य में जल संकट गहरा सकता है।

जनसांख्यिकी (Demography) में बदलाव: ग्रामीणों का एक बड़ा आरोप यह भी है कि जहां एक तरफ उनके मूल गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, वहीं दूसरी तरफ बाहरी लोगों को बसाने के लिए इतनी बड़ी टाउनशिप खड़ी की जा रही है। इससे उनके इलाके की संस्कृति और जनसांख्यिकी पूरी तरह बदल जाएगी।

धारा 39ए को रद्द करने की मांग

इस आंदोलन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) विभाग द्वारा इस प्रोजेक्ट को दी गई सभी मंजूरियों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। आम आदमी पार्टी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि कानून की धारा 39ए, जिसका इस्तेमाल अक्सर बड़े प्रोजेक्ट्स को गुपचुप तरीके से मंजूरी देने के लिए किए जाने के आरोप लगते रहे हैं, उसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीणों के लोकतांत्रिक और भूमि अधिकारों की रक्षा की जा सके। फिलहाल यह आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक और सामाजिक रूप से चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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