AI आधारित रैली के चलते वैश्विक बाजार की रैंकिंग बदली। भारत 5वें से 7वें स्थान पर खिसका, जबकि दक्षिण कोरिया और ताइवान ने रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की।
वर्ष 2026 वैश्विक शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़े बदलाव के तौर पर दर्ज हो रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आंधी ने पूरी दुनिया के बाजार का समीकरण बदल दिया है। इस तकनीकी क्रांति के कारण दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजार जहां रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रहे हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार को पीछे छूटने के कारण अपनी रैंकिंग गंवानी पड़ी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बाजार अब वैश्विक स्तर पर बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) के मामले में 5वें स्थान से खिसककर 7वें पायदान पर आ गया है।
AI रैली: दक्षिण कोरिया और ताइवान का उदय
वैश्विक बाजार पूंजीकरण में दक्षिण कोरिया का ‘कोस्पी’ (Kospi) अब 5.04 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया का छठा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। इसके ठीक ऊपर ताइवान 5.15 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें स्थान पर मजबूती से काबिज है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ AI और सेमीकंडक्टर शेयरों का है। दक्षिण कोरियाई बाजार में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स (SK Hynix) जैसे दिग्गजों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। पिछले एक साल में सैमसंग के शेयरों में 524 फीसदी की भारी उछाल देखी गई है, जबकि चिप निर्माता कंपनी एसके हाइनिक्स के शेयरों ने तो 1000 फीसदी का आंकड़ा पार कर लिया है।
ताइवान की सफलता का मुख्य श्रेय ‘ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ (TSMC) को जाता है, जो अकेले ताइवान के बेंचमार्क इंडेक्स का 42 फीसदी से अधिक हिस्सा रखती है। साल 2026 में अब तक इस चिप दिग्गज के शेयरों में 49 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो वैश्विक AI मांग को पूरा करने में अपनी अग्रणी भूमिका के कारण संभव हो पाया है।
भारतीय बाजार के सामने चुनौती: AI स्टॉक्स की कमी
दूसरी ओर, भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 अब तक निराशाजनक रहा है। बेंचमार्क इंडेक्स ‘निफ्टी 50’ इस वर्ष अब तक 10.57 फीसदी की गिरावट दर्ज कर चुका है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार में AI-केंद्रित शेयरों का अभाव विदेशी निवेशकों के आकर्षण को कम कर रहा है। विदेशी निवेशक तेजी से भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं, क्योंकि उन्हें अन्य वैश्विक बाजारों में AI-लिंक्ड शेयरों के माध्यम से बेहतर रिटर्न मिल रहा है। निफ्टी 50 में तकनीक आधारित ऐसे दिग्गजों की कमी है जो ताइवान या दक्षिण कोरिया की तरह बाजार को ऊपर खींच सकें।
धन का केंद्रीकरण: केवल 1 फीसदी शेयरों का जादू
‘यस सिक्योरिटीज’ की हालिया रिपोर्ट “वेयर द मनी फ्लोज़ – मई ’26” ने इस पूरी स्थिति पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक इक्विटी बाजार में धन का केंद्रीकरण तेजी से बढ़ रहा है। साल 2026 में अब तक वैश्विक बाजार पूंजीकरण में जो 12 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है, उसमें से लगभग 11.4 ट्रिलियन डॉलर की कमाई केवल शीर्ष 100 कंपनियों के शेयरों से आई है। बाकी बची 9,900 कंपनियां कुल लाभ का एक मामूली हिस्सा ही जोड़ पाई हैं।
यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बाजार में ‘विजेता ही सब ले जाता है’ (Winner takes it all) वाली स्थिति बन गई है। शीर्ष 100 शेयरों ने साल-दर-साल (YTD) लगभग 33.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है, जबकि शेष बाजार केवल 0.6 फीसदी की मामूली बढ़त देख पाया है। चिंता की बात यह है कि यस सिक्योरिटीज की सूची के अनुसार, भारत का कोई भी शेयर इस शीर्ष 100 की सूची में शामिल नहीं है, जो भारतीय बाजार के वैश्विक रैली में पिछड़ने का प्रमुख कारण है।
नवाचार ही भविष्य है
वैश्विक स्तर पर जो परिदृश्य उभर कर आ रहा है, वह स्पष्ट है: जिस बाजार में AI और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों का प्रभुत्व है, वहां पूंजी का प्रवाह तेज है। भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण सीख है कि उसे अपनी अर्थव्यवस्था को केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित न रखकर तकनीकी नवाचार और AI-आधारित इकोसिस्टम में निवेश बढ़ाना होगा। यदि भारत को वापस वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष 5 में जगह बनानी है, तो उसे ऐसी कंपनियों को तैयार करना होगा जो न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि वैश्विक स्तर पर AI क्रांति का नेतृत्व कर सकें। फिलहाल, बाजार का यह झुकाव तकनीक के उन दिग्गजों के पक्ष में है जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।