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गिफ्ट निफ्टी 81 अंक बढ़कर 24,561 पर पहुंचा, जिससे भारतीय शेयर बाजार में तेजी के साथ शुरुआत के संकेत मिले। कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2% गिरावट आई।
भारतीय शेयर बाजार का कारोबारी सत्र बुधवार 26 अगस्त को सकारात्मक संकेतों से शुरू होने की उम्मीद है। गिफ्ट निफ्टी में शुरुआती कारोबार में तेजी देखने को मिली, जिससे घरेलू इक्विटी बाजार में तेजी के संकेत मिले। वैश्विक बाजारों में बेहतर सेंटीमेंट और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई है। इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी चिंताओं में कमी ने भी बाजार की स्थिति को सुधार दिया है। गिफ्ट निफ्टी बुधवार सुबह 7:46 बजे 24,561 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले स्तर से करीब 0.33 प्रतिशत की बढ़त का संकेत देता है। यह स्तर निफ्टी 50 के पिछले बंद 24,334 से ऊपर था, जो भारतीय शेयर बाजार में गैप-अप की संभावना दिखाता था।
गिफ्ट निफ्टी के बाजार में विस्तार के संकेत
गिफ्ट निफ्टी को भारतीय शेयर बाजार का पहला संकेत मानते हैं। इसमें बुधवार सुबह स्पष्ट संकेत थे कि घरेलू बाजार में खरीदारी की शुरुआत हो सकती है। निवेशकों के लिए गिफ्ट निफ्टी का 24,561 के स्तर तक पहुंचने और निफ्टी 50 के पिछले बंद स्तर से ऊपर कारोबार करने का अनुमान लगाया जा रहा है।
लेकिन कारोबारी सत्र के दौरान वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और घरेलू आर्थिक घटकों से बाजार की वास्तविक दिशा निर्भर करेगी। बाजार में प्रारंभिक उछाल भी हो सकता है। यही कारण है कि निवेशकों का ध्यान निफ्टी और प्रमुख क्षेत्रों के प्रदर्शन पर रहेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2% की कमी
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बहुत अच्छा संकेत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार के शुरुआती कारोबार में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का मूल्य करीब 2% गिरकर 86.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड (WTI) की कीमत भी करीब 1.8 प्रतिशत गिर गई और 80.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता था।
मंगलवार को भी दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 3% से अधिक की गिरावट हुई थी। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में नरमी ने वैश्विक बाजारों को कुछ राहत दी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की चिंता कम होने से भावना बेहतर होती है
कच्चे तेल और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की चिंताओं में कमी भी बाजार के लिए अच्छी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व भर में ऊर्जा की आपूर्ति के लिहाज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है अगर यहां कोई तनाव या सप्लाई बाधित होने की आशंका है।
हालिया संकेतों से बाजार की चिंता कुछ कम हुई है। तेल की कीमतों में नरमी आई और वैश्विक निवेशकों के बीच सेंटीमेंट में सुधार हुआ। भारतीय बाजार के शुरुआती संकेतों पर भी इसका प्रभाव पड़ा।
तेल मूल्यों का भारतीय बाजार पर प्रभाव
भारत आयात से बहुत सी ऊर्जा खरीदता है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि देश के चालू खाते, महंगाई और आयात बिल पर पड़ सकती है। उल्टा, तेल की कीमतों में कमी से भारत की अर्थव्यवस्था कुछ राहत पा सकती है।
तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कम कच्चे तेल की लागत अच्छी लगती है। इससे कंपनियों की लागत भी कम हो सकती है। यही कारण है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच भारतीय इक्विटी बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
निफ्टी 50 पर निवेशकों की दृष्टि
निवेशकों का ध्यान बुधवार को निफ्टी 50 के प्रदर्शन पर रहेगा। निफ्टी 50 का पिछले कारोबारी सत्र में बंद स्तर 24,334 था, जबकि गिफ्ट निफ्टी 24,561 पर कारोबार कर रहा था। अंतर घरेलू बाजार में दोनों स्तरों में लगभग 81 अंकों की प्रारंभिक बढ़त का संकेत देता है।
यद्यपि, गिफ्ट निफ्टी केवल गिफ्ट निफ्टी पर निर्भर करके पूरे दिन के बाजार रुख का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। कारोबारी सत्र के दौरान रुपये की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री, वैश्विक बाजारों की दिशा और अन्य घरेलू संकेतक बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
विश्वव्यापी संकेत बाजार को मजबूत कर सकते हैं
बुधवार के शुरुआती संकेतों को देखते हुए, भारतीय शेयर बाजार का रुख सकारात्मक है। गिफ्ट निफ्टी की स्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर गिरावट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की चिंताओं में कमी ने निवेशकों की भावना को बढ़ा दिया है। बाजार में बदलाव हर समय हो सकते हैं, इसलिए निवेशकों को कारोबार के दौरान आने वाले नए संकेतों पर नजर रखनी होगी।
फिलहाल, गिफ्ट निफ्टी का 24,561 पर कारोबार करना भारतीय इक्विटी बाजार में मजबूत शुरूआत की उम्मीद जगा रहा है। शुरुआती कारोबार में निफ्टी और सेंसेक्स में खरीदारी देखने को मिल सकती है अगर वैश्विक संकेत भी सकारात्मक बने रहते हैं। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में आगे की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात बाजार की दिशा को प्रभावित करेंगे।