टीम इंडिया में अंदरूनी कलह? दिनेश कार्तिक ने दावा किया है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के बीच मतभेद हैं, जिससे खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
भारतीय क्रिकेट टीम के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, और टीम के अंदरूनी माहौल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिनेश कार्तिक (Dinesh Karthik) ने दावा किया है कि पुरुषों की राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर (Ajit Agarkar) के बीच एक स्पष्ट ‘घर्षण’ या वैचारिक मतभेद (Friction) पैदा हो गया है। कार्तिक के अनुसार, यह आंतरिक तनाव टीम के माहौल और खिलाड़ियों के मनोबल को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। स्काई स्पोर्ट्स (Sky Sports) पर बातचीत के दौरान कार्तिक ने इस बात का खुलासा किया कि मुख्य चयनकर्ता और मुख्य कोच की सोच दो अलग-अलग दिशाओं में जा रही है, जिससे टीम चयन को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
दीर्घकालिक योजना बनाम हर मैच जीतने की जिद: भ्रम की असली वजह
दिनेश कार्तिक ने दोनों दिग्गजों के बीच चल रहे इस वैचारिक टकराव के मूल कारण को विस्तार से समझाया है। उनके मुताबिक, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ‘दीर्घकालिक योजनाएं’ (Long-term plans) बना रहे हैं, जिसमें युवाओं को तैयार करना शामिल है। दूसरी ओर, मुख्य कोच गौतम गंभीर का दृष्टिकोण पूरी तरह से आक्रामक है और वे भविष्य के बजाय वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘हर मैच जीतने’ (Wants to win every game) की जिद रखते हैं।
सोच के इसी अंतर के कारण टीम चयन में लगातार विरोधाभास देखने को मिल रहा है। कार्तिक ने कहा:
“मुझे लगता है कि एक मुख्य चयनकर्ता, जो दीर्घकालिक योजनाएं बना रहा है, और एक वर्तमान कोच, जो कहता है कि मैं हर मैच जीतना चाहता हूँ, के बीच थोड़ा घर्षण है। इसी वजह से यह भ्रम हमारे सामने खुलकर आ रहा है। क्या यह खिलाड़ियों के लिए आदर्श स्थिति है? बिल्कुल नहीं। भारत के पास जितनी बड़ी बेंच स्ट्रेंथ है, उसे देखते हुए हर खिलाड़ी यही सोच रहा है कि अगर मेरे एक-दो मैच खराब गए, तो कोई भी मेरी जगह ले लेगा।”
आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज में दिखा चयन का विरोधाभास
दिनेश कार्तिक के मुताबिक, टीम के भीतर का यह भ्रम हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ बैक-टू-बैक सीरीज में मिली हार के दौरान साफ तौर पर मैदान पर दिखाई दिया। चयनकर्ताओं ने वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) जैसे युवा और उभरते हुए खिलाड़ी को टीम में शामिल किया था, ताकि उन्हें अनुभव मिल सके। लेकिन आयरलैंड जैसी सीरीज में, जहाँ बड़े बदलावों और युवाओं को आजमाने की उम्मीद थी, वहां गंभीर ने अपनी सबसे मजबूत प्लेइंग इलेवन (Strongest XI) मैदान पर उतार दी। नतीजा यह हुआ कि भारत वह सीरीज 2-0 से हार गया और युवाओं को मौका भी नहीं मिला।
इसके विपरीत, जब भारत का सामना इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम से हुआ, तो वहां प्रयोग शुरू कर दिए गए। वैभव सूर्यवंशी को दूसरे मैच में डेब्यू का मौका दिया गया, लेकिन फिर पांचवें मैच से पहले उन्हें अचानक टीम से ड्रॉप कर दिया गया। इस तरह के फैसलों ने टीम प्रबंधन की अनिश्चितता को उजागर किया है।
अश्विन और कैफ ने भी जताई चिंता: खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना
इस आंतरिक खींचतान और चयन के ढुलमुल रवैये पर केवल दिनेश कार्तिक ही नहीं, बल्कि रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) और मोहम्मद कैफ (Mohammad Kaif) जैसे अनुभवी क्रिकेटरों ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है। इन दोनों पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि यह दौरा भारतीय क्रिकेट की कई समस्याओं का समाधान खोजने के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन इसका अंत बेहद निराशाजनक रहा।
अश्विन और कैफ के अनुसार, संजू सैमसन (Sanju Samson) और वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी इस दौरे के बाद आत्मविश्वास की कमी (Short of confidence) से जूझ रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि किसी भी खिलाड़ी को टीम में अपनी जगह पक्की करने या अपना प्रभाव छोड़ने के लिए पर्याप्त और निरंतर अवसर (Enough opportunities) नहीं दिए गए। लगातार टीम से अंदर-बाहर होने के कारण खिलाड़ियों के मन में अपनी पोजीशन को लेकर गहरी असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
आईपीएल की फ्लैट पिचें और बल्लेबाजों की गिरती तकनीक
टीम के खराब प्रदर्शन का एक और बड़ा कारण बल्लेबाजों की तकनीक में आ रही भारी गिरावट को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की अत्यधिक सपाट और बल्लेबाजों के अनुकूल पिचों (Flat pitches) पर खेलने के कारण भारतीय बल्लेबाजों में एक ‘लापरवाह आदत’ (Lax habits) विकसित हो गई है। आईपीएल में जहां गेंद सीधे बल्ले पर आती है और रन बनाना आसान होता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब टीम को थोड़ी भी चुनौतीपूर्ण, टर्निंग या सीमिंग ट्रैक (Difficult tracks) मिलते हैं, तो बल्लेबाजों की यह कमजोरी पूरी तरह उजागर हो जाती है। पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि यदि भारतीय टीम को आगामी बड़े दौरों और आईसीसी टूर्नामेंटों में सफलता हासिल करनी है, तो कोच और चयनकर्ताओं को इस तालमेल की कमी और तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर करना होगा।