फ्रांस ने विश्व कप में स्वीडन को 3-0 से हराकर अपनी ताकत दिखाई। किलियन एम्बाप्पे और माइकल ओलिसे की जोड़ी रही जीत की सूत्रधार।
विश्व कप के नॉकआउट दौर में जब जर्मनी जैसी चार बार की विजेता टीम बाहर हो गई और ब्राजील जैसी दिग्गज टीम को संघर्ष करना पड़ा, तो फुटबॉल जगत में चर्चाएं शुरू हो गईं कि क्या बड़ी टीमों के मन में असुरक्षा की भावना घर कर गई है। लेकिन इन तमाम अटकलों पर फ्रांस ने न्यू जर्सी की तपती दोपहर में पूर्ण विराम लगा दिया। स्वीडन के खिलाफ 3-0 की एकतरफा जीत दर्ज करके ‘लेस ब्लूज’ (Les Bleus) ने यह साबित कर दिया कि वे किसी भी स्तर पर खेल को अपनी इच्छा के अनुसार मोड़ने की क्षमता रखते हैं।
मैदान पर ‘फैंटास्टिक फोर’ का कहर
फ्रांस की जीत का सबसे बड़ा आकर्षण उनका फ्रंट फोर यानी ओसमान डेम्बेले, ब्रैडली बारकोला, माइकल ओलिसे और किलियन एम्बाप्पे का तालमेल रहा। स्वीडन के खिलाफ मैच में इन चारों खिलाड़ियों की गति, कौशल और समझ ने विरोधी टीम के लिए वापसी के सारे रास्ते बंद कर दिए। खेल की फुर्ती और तरलता इतनी लाजवाब थी कि ऐसा लग रहा था मानो फ्रांस के लिए गोल करना बेहद सरल काम हो। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आक्रमण को रोक पाना किसी भी रक्षापंक्ति के लिए लगभग असंभव है।
मैच के बाद ब्रैडली बारकोला ने माइकल ओलिसे की जमकर तारीफ की। उन्होंने ओलिसे को एक ‘जीनियस’ करार देते हुए कहा कि वह मैदान पर रक्षात्मक और आक्रामक—दोनों ही भूमिकाएं बखूबी निभाते हैं। ओलिसे का खेल इतना रचनात्मक था कि उनके द्वारा किए गए कुछ प्रयास अगर गोल में बदल जाते, तो वे विश्व कप इतिहास के सर्वश्रेष्ठ गोलों में गिने जाते। उनकी एक ‘सिज़र किक’ तो गोलपोस्ट से टकराकर बाहर निकल गई, जिसने दर्शकों को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया।
कमजोरियों के बीच भी फ्रांस का दबदबा
हालांकि, फुटबॉल की दुनिया में कोई भी टीम पूर्ण नहीं होती। विश्लेषकों का मानना है कि फ्रांस के पास भी कुछ कमियां हैं, विशेषकर फुलबैक और सेंट्रल मिडफील्ड की स्थिति में। राइट बैक जूल्स कुंडे की आक्रामक क्षमताएं सीमित हैं, और लेफ्ट बैक लुकास डिग्ने को एक ‘औसत’ खिलाड़ी माना जाता है। लेकिन फ्रांस की खासियत यह है कि उनकी टीम की बाकी प्रतिभाएं इन कमियों को ढंक लेती हैं। जब आगे के खिलाड़ी इतने प्रतिभाशाली हों, तो फुलबैक को बहुत ज्यादा रक्षात्मक चिंता करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। कुंडे और डिग्ने अपनी भूमिकाओं में अनुशासित रहकर टीम के संतुलन को बनाए रखते हैं, जो डिचैम्प की रणनीति का अहम हिस्सा है।
एम्बाप्पे और ओलिसे का करिश्मा
स्वीडन के खिलाफ मैच में किलियन एम्बाप्पे ने दो गोल दागकर यह दिखाया कि वे विश्व कप में अपनी लय वापस पा चुके हैं। वहीं, माइकल ओलिसे ने दो शानदार असिस्ट के जरिए अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया। स्वीडन ने पांच डिफेंडरों के साथ शुरुआत की और कभी-कभी तो सात खिलाड़ी भी रक्षापंक्ति में नजर आए, लेकिन फ्रांस की गति के सामने उनकी एक न चली। मैच के पहले हाफ में फ्रांस ने केवल एक गोल किया, लेकिन उन्होंने दो बार गोलपोस्ट को हिट किया और स्वीडन को पूरे मैच में बमुश्किल एक शॉट ऑन टारगेट लेने दिया। दूसरे हाफ में फ्रांस और अधिक घातक नजर आया और उन्होंने दो और गोल करके अपनी जीत सुनिश्चित कर दी।
भविष्य की राह: क्या फ्रांस चैंपियन बनेगा?
टूर्नामेंट जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, चुनौतियां और कठिन होती जाएंगी। आने वाले मुकाबलों में फ्रांस का सामना अधिक मजबूत टीमों से होगा। हालांकि, कोच डिडिएर डिचैम्प का अपनी टीम के साथ सामंजस्य बिठाना और खिलाड़ियों के बीच का आपसी भरोसा इस बात का संकेत है कि फ्रांस खिताब की प्रबल दावेदार बनी रहेगी। फिलहाल, फुटबॉल प्रशंसक इस फ्रेंच अटैक की जादुई लय का आनंद ले रहे हैं।
यदि फ्रांस इसी तरह का खेल जारी रखती है, तो निश्चित रूप से वे इस विश्व कप की सबसे खतरनाक टीम बनकर उभरेंगे। स्वीडन के खिलाफ मिली यह 3-0 की जीत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि फ्रांस अपनी शर्तों पर खेल रही है। उनकी यह ‘अजेयता’ उनके विरोधियों के लिए एक बड़ी चिंता का सबब है। क्या ‘लेस ब्लूज’ का यह विजय अभियान उन्हें ट्रॉफी तक ले जाएगा? यह तो समय बताएगा, लेकिन वर्तमान में, मैदान पर उनका खेल किसी ‘जादू’ से कम नहीं है।