फीफा वर्ल्ड कप और शेयर बाजार का अजीब कनेक्शन: क्या 28 साल पुराना इतिहास दोहराएगा सेंसेक्स? 2026 में आ सकती है 1998 जैसी गिरावट

फीफा वर्ल्ड कप और शेयर बाजार का अजीब कनेक्शन: क्या 28 साल पुराना इतिहास दोहराएगा सेंसेक्स? 2026 में आ सकती है 1998 जैसी गिरावट

 

आमतौर पर फीफा वर्ल्ड कप वाले साल में भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स) हमेशा मुनाफे में रहा है। लेकिन साल 2026 में आ रही गिरावट ने 1998 के मंदी के दौर की यादें ताजा कर दी हैं।

फुटबॉल का महाकुंभ यानी फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) वैसे तो पूरी तरह से खेल और रोमांच से जुड़ा है, लेकिन वैश्विक वित्तीय बाजारों और शेयर बाजार के विश्लेषक इस समय एक बेहद दिलचस्प ट्रेंड पर पैनी नजर रख रहे हैं। ऐतिहासिक आंकड़ों और पिछले तीन दशकों के ट्रैक रिकॉर्ड का विश्लेषण करें तो यह पता चलता है कि जब-जब फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ है, तब-तब भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) ने निवेशकों को कैलेंडर वर्ष में सकारात्मक (पॉजिटिव) रिटर्न दिया है। पिछले 30 से अधिक वर्षों में इस ऐतिहासिक संयोग का केवल एक ही बड़ा अपवाद रहा है। अब जब साल 2026 का फीफा वर्ल्ड कप अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में अपने अंतिम पड़ाव पर है, तब दलाल स्ट्रीट के निवेशक एक बड़ा सवाल उठा रहे हैं: क्या मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों और बाजार के सेंटिमेंट को देखते हुए साल 2026 इतिहास का केवल दूसरा ऐसा वर्ल्ड कप साल बनने जा रहा है, जिसका अंत भारतीय शेयर बाजार के लिए लाल निशान (गिरावट) के साथ होगा?

वर्ल्ड कप वर्षों में सेंसेक्स की ऐतिहासिक चाल: 1998 का इकलौता अपवाद

बिजनेस स्टैंडर्ड के एक हालिया विश्लेषण के मुताबिक, साल 1990 के बाद से लगभग हर फीफा वर्ल्ड कप वाले कैलेंडर वर्ष में बीएसई सेंसेक्स ने बढ़त दर्ज की है। हालांकि, अलग-अलग वर्षों में यह रिटर्न काफी भिन्न रहा है। उदाहरण के लिए, साल 2002 में जब जापान और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त रूप से टूर्नामेंट की मेजबानी की थी, तब सेंसेक्स में महज 3.5% की मामूली बढ़त देखी गई थी। इसके ठीक विपरीत, साल 2006 में जर्मनी वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया और सेंसेक्स 46.7% तक बढ़ गया था। पिछले तीन दशकों में इस ट्रेंड का एकमात्र अपवाद साल 1998 था, जब पूरे कैलेंडर वर्ष के दौरान सेंसेक्स में 16.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।

1998 में क्यों क्रैश हुआ था बाजार? 2026 से क्या है समानताएं

अगर इतिहास के पन्नों को पलटें तो साल 1998 में शेयर बाजार के टूटने के पीछे कई बड़े घरेलू और वैश्विक कारण जिम्मेदार थे। मई 1998 में भारत ने पोखरण-II परमाणु परीक्षण (Pokhran-II nuclear tests) किए थे, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका और जापान सहित कई शक्तिशाली देशों ने भारत पर कड़े आर्थिक व व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके अलावा, आम चुनावों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा नीत गठबंधन सरकार सत्ता में आई थी, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल था।

ठीक इसी तरह, साल 2026 के आंकड़े अब तक के अन्य वर्ल्ड कप वर्षों की तुलना में 1998 से बहुत ज्यादा मेल खा रहे हैं। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक सेंसेक्स करीब 13% टूट चुका है और गिरकर 73,900 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। मौजूदा गिरावट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी गंभीर भू-राजनीतिक संघर्ष है, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। तेल महंगा होने से भारत में महंगाई और आयात बिल का दबाव बढ़ गया है, रुपया कमजोर हुआ है, और विदेशी संस्थागत निवेशक (FPIs) लगातार भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बूम का सीधा लाभ भारतीय कंपनियों को न मिलने की चिंता भी हावी है।

क्या कह रहे हैं बाजार के दिग्गज विश्लेषक और ब्रोकरेज फर्म्स?

हालिया बड़ी गिरावट और करेक्शन के बावजूद, कुछ चुनिंदा वैश्विक ब्रोकरेज फर्म्स साल के उत्तरार्ध (सेकंड हाफ) में बाजार में रिकवरी की उम्मीद जता रही हैं। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) ने साल 2026 के अंत के लिए निफ्टी (Nifty) का टारगेट 26,000 पर बरकरार रखा है। मौजूदा निचले स्तरों से देखा जाए तो यह लगभग 12% की बढ़त का संकेत देता है। हालांकि, पेंच यह है कि चूंकि भारतीय बाजार ने इस साल की शुरुआत बहुत ऊंचे स्तरों से की थी, इसलिए यदि बाजार इस टारगेट को हासिल भी कर लेता है, तो भी पूरे कैलेंडर वर्ष के आधार पर बाजार करीब 0.5% की मामूली गिरावट या सपाट स्तर के साथ ही बंद होगा। यानी विश्लेषकों के मुताबिक, इस बात की पूरी संभावना है कि 2026 भी 1998 की तरह एक नेगेटिव क्लोजिंग वाला साल साबित हो।

वर्ल्ड कप और शेयर बाजार: महज एक संयोग या कोई गहरा कनेक्शन?

वित्तीय विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि फीफा वर्ल्ड कप और शेयर बाजार की चाल के बीच कोई सीधा ‘कार्य-कारण संबंध’ (Cause-and-Effect Pattern) नहीं है; यह केवल एक ऐतिहासिक संयोग है। हालांकि, ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज (BofA Securities) ने नोट किया है कि कई फीफा वर्ल्ड कप चक्र दुनिया की बड़ी आर्थिक घटनाओं के साथ मेल खाते रहे हैं। जैसे, 1986 में मैक्सिको वर्ल्ड कप लैटिन अमेरिकी ऋण संकट के दौरान हुआ था, और 2002 के टूर्नामेंट की घोषणा 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट से ठीक पहले हुई थी। ठीक वैसे ही, 2026 का वर्ल्ड कप ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया महंगाई और धीमी विकास दर से जूझ रही है। बहरहाल, खेल के मैदान पर रोमांच चरम पर है और स्पेन व अर्जेंटीना (Spain vs Argentina) के बीच फीफा वर्ल्ड कप 2026 का महामुकाबला भारतीय समयानुसार 20 जुलाई को रात 12:30 बजे शुरू होगा, लेकिन निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सेंसेक्स इस बार इतिहास बदलेगा या दोहराएगा।

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