IVF और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के लिए विदेश जाने का चलन बढ़ रहा है। जानिए फर्टिलिटी टूरिज्म क्या है, इसका बाजार क्यों बढ़ रहा है और यूरोप क्यों बना पसंदीदा डेस्टिनेशन।
पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल टूरिज्म का दायरा तेजी से बढ़ा है, लेकिन अब इसके भीतर एक नया और तेजी से लोकप्रिय होता क्षेत्र सामने आया है, जिसे फर्टिलिटी टूरिज्म कहा जा रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें कपल्स विदेश जाकर IVF और अन्य फर्टिलिटी ट्रीटमेंट कराने का अपना अनुभव साझा कर रहे हैं। हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो का कैप्शन था, “Come with me as I fly abroad for IVF”, जिसमें एक कपल को मैनचेस्टर से चेक रिपब्लिक की यात्रा करते हुए दिखाया गया। यह सिर्फ एक अकेला मामला नहीं है। दुनियाभर में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, जो अपने देश के बजाय किसी दूसरे देश में जाकर फर्टिलिटी संबंधी उपचार कराने का विकल्प चुन रहे हैं। यूरोप इस मामले में खास तौर पर एक प्रमुख डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है।
IVF के लिए विदेश जाना क्यों बन रहा है विकल्प?
फर्टिलिटी टूरिज्म के बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण वजहों में उपचार की लागत, उपलब्ध तकनीक, विशेषज्ञों की सुविधा और अलग-अलग देशों में फर्टिलिटी उपचार से जुड़े नियम शामिल हैं। कई कपल्स अपने देश में IVF या अन्य उपचार की बढ़ती लागत को देखते हुए दूसरे देशों के विकल्पों पर विचार करते हैं। वहीं, कुछ लोगों के लिए विदेशों में उपलब्ध उपचार विकल्प और विशेषज्ञ डॉक्टर आकर्षण का कारण बनते हैं।
सोशल मीडिया ने भी इस ट्रेंड को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब कपल्स अपनी IVF यात्रा, अस्पताल के अनुभव, उपचार की प्रक्रिया और विदेश में रहने से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। इससे दूसरे लोगों को भी अलग-अलग देशों में उपलब्ध फर्टिलिटी उपचार के बारे में जानकारी मिलती है और वे विदेश में इलाज कराने के विकल्प पर विचार करने लगते हैं।
तेजी से बढ़ रहा है फर्टिलिटी टूरिज्म मार्केट
फर्टिलिटी टूरिज्म अब मेडिकल टूरिज्म का एक महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा बन रहा है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक फर्टिलिटी टूरिज्म मार्केट का आकार 2024 में करीब 1.6 अरब डॉलर था। इसके 2030 तक बढ़कर लगभग 6.1 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है। यह हर साल 25 प्रतिशत से कुछ अधिक की वृद्धि को दर्शाता है।
इस बाजार में तुर्की ने 2024 में सबसे बड़ी हिस्सेदारी हासिल की थी, जबकि आने वाले वर्षों में स्पेन के सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल होने का अनुमान है। यूरोप के कई देश फर्टिलिटी उपचार के लिए विदेशी मरीजों को आकर्षित कर रहे हैं। उपचार की उपलब्धता, विशेषज्ञता और संबंधित नियमों में अंतर भी लोगों के यात्रा संबंधी फैसलों को प्रभावित कर सकता है।
अपने अंडों से IVF कराने वालों की संख्या ज्यादा
फर्टिलिटी टूरिज्म के बाजार में मरीजों की जरूरतें भी अलग-अलग होती हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मरीज के अपने अंडों का इस्तेमाल करके किया जाने वाला उपचार इस बाजार के आधे से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं, 35 से 44 वर्ष की आयु के लोग विदेश जाकर फर्टिलिटी उपचार कराने वाले सबसे बड़े समूह में शामिल हैं।
उम्र फर्टिलिटी उपचार के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कई लोग व्यक्तिगत, पारिवारिक या करियर से जुड़ी वजहों से परिवार शुरू करने में देरी करते हैं और बाद में गर्भधारण के लिए मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में IVF सहित असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी के विकल्पों की मांग बढ़ती है।
दुनियाभर में बांझपन की समस्या बड़ी चुनौती
फर्टिलिटी टूरिज्म के बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है कि इनफर्टिलिटी यानी बांझपन दुनियाभर में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में लगभग हर छह में से एक व्यक्ति अपने जीवन के किसी न किसी चरण में इनफर्टिलिटी से प्रभावित होता है। वैश्विक स्तर पर करीब 8 करोड़ कपल्स इसके कारणों से जूझ रहे हैं।
ऐसे में जब किसी कपल को लंबे समय तक गर्भधारण में सफलता नहीं मिलती, तो वे विशेषज्ञों से सलाह और उपचार के विभिन्न विकल्प तलाशते हैं। IVF जैसी तकनीक कई लोगों के लिए उम्मीद का माध्यम बनती है। हालांकि, इसका सफल होना हर व्यक्ति में अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है और कोई भी उपचार सभी मरीजों के लिए समान परिणाम की गारंटी नहीं देता।
भारत भी मेडिकल टूरिज्म का बड़ा केंद्र
भारत लंबे समय से मेडिकल टूरिज्म के लिए दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल रहा है। यहां अपेक्षाकृत कम लागत में कई तरह के विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध होने के साथ अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी मौजूद हैं। यही वजह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग इलाज के लिए भारत आते हैं।
अब फर्टिलिटी ट्रीटमेंट भी मेडिकल टूरिज्म के इस क्षेत्र का हिस्सा बन रहा है। हालांकि, भारत से विदेश जाने वाले मरीजों की संख्या और भारत में आने वाले विदेशी मरीजों के आंकड़े अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी देश में उपचार कराने से पहले मरीजों के लिए डॉक्टर की योग्यता, क्लिनिक की विश्वसनीयता, उपचार की कुल लागत, कानूनी नियम और संभावित जोखिमों की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।
सोशल मीडिया से बढ़ रही जागरूकता, लेकिन सावधानी जरूरी
फर्टिलिटी टूरिज्म को बढ़ावा देने में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है। IVF यात्रा के व्यक्तिगत अनुभव दूसरे कपल्स को जानकारी और भावनात्मक समर्थन दे सकते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली हर कहानी को चिकित्सा सलाह नहीं माना जा सकता। किसी एक व्यक्ति के सफल अनुभव का मतलब यह नहीं है कि वही उपचार दूसरे व्यक्ति में भी समान परिणाम देगा।
विदेश जाकर फर्टिलिटी उपचार कराने का फैसला भावनात्मक होने के साथ-साथ आर्थिक और चिकित्सकीय रूप से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेना और उपचार से पहले सभी पहलुओं को समझना जरूरी है। बढ़ते फर्टिलिटी टूरिज्म से यह साफ है कि आज कई लोगों के लिए माता-पिता बनने की कोशिश अब सिर्फ स्थानीय उपचार तक सीमित नहीं रही है। बेहतर विकल्प, लागत और उपलब्ध सुविधाओं की तलाश में लोग हजारों किलोमीटर की यात्रा करने को तैयार हैं—क्योंकि उनके लिए परिवार शुरू करने की उम्मीद एक लंबी यात्रा के लायक है।