इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश में अप्रैल में आई मामूली गिरावट, लेकिन स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स ने बनाया नया रिकॉर्ड

इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश में अप्रैल में आई मामूली गिरावट, लेकिन स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स ने बनाया नया रिकॉर्ड

अप्रैल 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश में मामूली गिरावट के बावजूद स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स ने रिकॉर्ड निवेश हासिल किया है। एम्फी (Amfi) के आंकड़ों के अनुसार, निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में भी भारी दिलचस्पी दिखाई।

भारतीय शेयर बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, घरेलू निवेशकों का भरोसा म्यूचुअल फंड्स पर बना हुआ है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश की रफ्तार पिछले महीने के मुकाबले थोड़ी धीमी रही है, लेकिन स्मॉल-कैप और मिड-कैप जैसे हाई-ग्रोथ सेगमेंट में रिकॉर्ड तोड़ निवेश देखा गया है। यह दर्शाता है कि खुदरा निवेशक बाजार की गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

इक्विटी इनफ्लो में 4.8% की कमी

AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में कुल 38,426 करोड़ रुपये का शुद्ध इनफ्लो (Net Inflow) दर्ज किया गया। यह मार्च 2026 के 40,366 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 4.8 प्रतिशत कम है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से बड़े निवेशकों ने थोड़ा सतर्क रुख अपनाया है, जिसके कारण कुल निवेश में यह मामूली गिरावट आई है।

स्मॉल और मिड-कैप फंड्स में ऐतिहासिक निवेश

भले ही कुल इक्विटी निवेश में थोड़ी कमी आई हो, लेकिन निवेशकों की असली पसंद ब्रॉड मार्केट (Broad Market) स्टॉक्स बने हुए हैं।

  • स्मॉल-कैप फंड्स: इस कैटेगरी ने अप्रैल में 6,885.9 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आकर्षित किया, जो मार्च (6,263.6 करोड़ रुपये) की तुलना में 10% अधिक है। यह इस श्रेणी में अब तक का सबसे अधिक मासिक निवेश है।
  • मिड-कैप फंड्स: इसी तरह, मिड-कैप फंड्स में भी निवेश 8% बढ़कर 6,551.4 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

हाल ही में बाजार में आए सुधार (Correction) के बाद मिड और स्मॉल-कैप शेयरों के वैल्यूएशन में आई राहत ने निवेशकों को फिर से इन फंड्स की ओर आकर्षित किया है। निवेशक उच्च विकास क्षमता वाले इन सेगमेंट पर दांव लगाना जारी रख रहे हैं।

लार्ज-कैप और सेक्टोरल फंड्स में घटी दिलचस्पी

इसके विपरीत, लार्ज-कैप (Large-cap) फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी काफी कम हुई है। अप्रैल में लार्ज-कैप स्कीम्स में निवेश 15.8 प्रतिशत घटकर 2,524.6 करोड़ रुपये रह गया, जो मार्च में 2,997.8 करोड़ रुपये था। यह संकेत देता है कि निवेशक अब बेंचमार्क-हैवी ब्लू-चिप शेयरों के बजाय अधिक रिटर्न की तलाश में अन्य श्रेणियों की ओर रुख कर रहे हैं।

इसके साथ ही, फ्लेक्सी-कैप (Flexi-cap) फंड्स इक्विटी कैटेगरी में सबसे बड़े योगदानकर्ता बने रहे, जिन्होंने अकेले 10,147 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हासिल किया। वहीं, सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स की मांग में गिरावट देखी गई, जहां निवेश 2,699 करोड़ रुपये से गिरकर 1,949 करोड़ रुपये पर आ गया।

सुरक्षित निवेश के रूप में चमका गोल्ड ETF

वैश्विक तनाव और अस्थिरता के समय सोना हमेशा निवेशकों की पहली पसंद रहा है। अप्रैल में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में निवेश बढ़कर 3,040 करोड़ रुपये हो गया, जो मार्च में 2,266 करोड़ रुपये था। भू-राजनीतिक अस्थिरता और महंगाई के डर ने निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि, पैसिव निवेश (Passive Investment) के रूप में अन्य ETFs में इनफ्लो मार्च के 19,802 करोड़ रुपये से घटकर 10,755 करोड़ रुपये रह गया, जो पैसिव निवेश की गति में कुछ नरमी का संकेत देता है।

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