इंग्लैंड में 20 से 24 वर्ष की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतें 2020-2024 के बीच शून्य रही हैं। जानिए कैसे HPV वैक्सीन ने बचाई सैकड़ों जान।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में कुछ ऐसी जीतें होती हैं, जो निस्संदेह और क्रांतिकारी होती हैं। ‘द लैंसेट’ (The Lancet) पत्रिका में प्रकाशित एक प्रमुख अध्ययन के निष्कर्ष कुछ ऐसे ही संकेत दे रहे हैं। इस अध्ययन के अनुसार, इंग्लैंड में 20 से 24 वर्ष की आयु की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) से होने वाली मौतों का आंकड़ा 2020 से 2024 के बीच शून्य (Zero) पर पहुंच गया है। यह पहली बार है जब पांच साल की पूरी अवधि में इस आयु वर्ग में ऐसा परिणाम दर्ज किया गया है।
2008 से जारी टीकाकरण कार्यक्रम का प्रभाव
क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय सीधे तौर पर इंग्लैंड के ‘एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम’ (HPV vaccination programme) को दिया है, जो 2008 से निरंतर चलाया जा रहा है। ‘कैंसर रिसर्च यूके’ (Cancer Research UK) द्वारा वित्तपोषित इस अध्ययन का अनुमान है कि यदि यह टीकाकरण कार्यक्रम कभी शुरू ही नहीं किया गया होता, तो इस पांच साल की अवधि में इसी आयु वर्ग की लगभग 23 महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के कारण मृत्यु हो चुकी होती।
शोधकर्ताओं ने व्यापक आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए गणना की है कि अब तक इंग्लैंड में इस टीकाकरण कार्यक्रम के जरिए लगभग 200 महिलाओं की जान बचाई जा चुकी है। ‘कैंसर रिसर्च यूके’ ने इसे एक “अविश्वसनीय उपलब्धि” (incredible milestone) करार दिया है। यह अध्ययन इस बात का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वैक्सीन न केवल कैंसर के निदान (diagnosis) को कम कर रही है, बल्कि वास्तव में मौतों को रोकने में भी सक्षम है।
क्या है एचपीवी और यह कैंसर कैसे फैलाता है?
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus – HPV) एक बेहद सामान्य वायरस है, जो त्वचा से त्वचा के करीबी संपर्क (close skin-to-skin contact) के माध्यम से फैलता है। सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के पीछे यही वायरस जिम्मेदार होता है। अधिकांश एचपीवी संक्रमण बिना किसी हस्तक्षेप के अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन वायरस के कुछ उच्च-जोखिम वाले स्ट्रेन (high-risk strains) शरीर में बने रह सकते हैं।
समय के साथ, ये वायरस गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव (abnormal cellular changes) ट्रिगर करते हैं। यदि इन बदलावों का समय रहते पता न चले, तो ये धीरे-धीरे विकसित होकर कैंसर का रूप ले लेते हैं। टीकाकरण कार्यक्रम इन उच्च-जोखिम वाले वायरस स्ट्रेन को शरीर में पनपने से पहले ही रोक देता है, जिससे कैंसर की पूरी प्रक्रिया ही अवरुद्ध हो जाती है।
वैज्ञानिक महत्व और भविष्य की उम्मीदें
इस अध्ययन का महत्व केवल इंग्लैंड तक सीमित नहीं है। यह पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है कि यदि टीकाकरण कवरेज को व्यापक बनाया जाए, तो सर्वाइकल कैंसर को दुनिया से मिटाया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में होने वाले कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन वैक्सीन की उपलब्धता ने इसे अब एक ‘रोकथाम योग्य’ (preventable) बीमारी बना दिया है।
जन जागरूकता की भूमिका
इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने एक बार फिर टीकाकरण के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया है। इंग्लैंड में इस सफलता का एक बड़ा कारण यह है कि वहाँ के स्कूलों में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया, जिससे वैक्सीन के प्रति किसी भी प्रकार का हिचकिचाहट कम हुई। 2008 में जब यह कार्यक्रम शुरू हुआ, तब से लाखों किशोरियों को यह वैक्सीन दी जा चुकी है, और अब उसका सकारात्मक परिणाम हमारे सामने है।
टीकाकरण ही सबसे सशक्त हथियार
सर्वाइकल कैंसर से मौतों का शून्य होना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक मील का पत्थर है। यह स्पष्ट करता है कि टीकाकरण कार्यक्रम न केवल आर्थिक बोझ कम करते हैं, बल्कि यह परिवारों को वह दुखद अनुभव नहीं करने देते जो अपनों को कैंसर के कारण खोने से होता है। इंग्लैंड की यह सफलता दुनिया भर के अन्य देशों के लिए एक रोडमैप प्रदान करती है। यदि इसी तर्ज पर विश्व के अन्य देश भी अपने टीकाकरण अभियानों को और अधिक सुदृढ़ करें, तो भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारी को इतिहास के पन्नों में ही सिमटते देखना असंभव नहीं होगा। यह शोध वैज्ञानिक समुदाय की उस जीत का प्रमाण है, जो एक वैक्सीन को ‘जीवन रक्षक’ के रूप में स्थापित करती है।