आज 05 मई को एकदंत संकष्टी चतुर्थी है। जानें मुंबई, दिल्ली, पटना और अन्य शहरों में चांद कब निकलेगा और भगवान गणेश की पूजा कैसे करें।
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। वैशाख मास की इस चतुर्थी को ‘एकदंत संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है। धार्मिक दृष्टि से संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को प्रसन्न करने और जीवन के विघ्नों को दूर करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस व्रत की पूर्णता केवल चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही होती है। आज, 05 मई 2026 को देश भर में श्रद्धालु यह पावन व्रत रख रहे हैं।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
‘एकदंत’ भगवान गणेश के सुप्रसिद्ध नामों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महर्षि वेदव्यास महाभारत लिख रहे थे, तब भगवान गणेश ने अपने एक दांत को तोड़कर उसे लेखनी बनाया था, ताकि महाकाव्य का लेखन बिना किसी बाधा के पूर्ण हो सके। इसीलिए, इस दिन व्रत रखने से ज्ञान, बुद्धि और कार्यों में आने वाली बाधाओं का नाश होता है। विशेष रूप से जो लोग आर्थिक संकट या करियर में रुकावटों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत संजीवनी के समान माना जाता है।
चंद्रोदय का महत्व और अर्घ्य विधि
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा की भूमिका अनिवार्य है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन केवल दिन भर उपवास रखना पर्याप्त नहीं है; व्रत का पारण तभी किया जाता है जब आकाश में चंद्रमा के दर्शन हो जाएं। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय दूध, अक्षत (चावल) और पुष्प का उपयोग किया जाता है। चंद्रमा को मन का कारक माना गया है, इसलिए उन्हें अर्घ्य देने से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अर्घ्य देते समय ‘ॐ सोमाय नमः’ या ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करना श्रेष्ठ रहता है।
आज आपके शहर में चांद निकलने का समय (05 मई 2026)
आज देश के विभिन्न शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर रहेगा। यहाँ प्रमुख शहरों के संभावित समय दिए गए हैं:
- दिल्ली: रात्रि 09:35 बजे
- मुंबई: रात्रि 09:52 बजे
- लखनऊ: रात्रि 09:22 बजे
- नोएडा/गाजियाबाद: रात्रि 09:34 बजे
- जयपुर: रात्रि 09:44 बजे
- पटना: रात्रि 09:08 बजे
- इंदौर: रात्रि 09:48 बजे
- भोपाल: रात्रि 09:43 बजे
- अहमदाबाद: रात्रि 10:01 बजे
- बेंगलुरु: रात्रि 09:38 बजे
- कोलकाता: रात्रि 08:52 बजे
(नोट: बादलों की स्थिति या स्थानीय वायुमंडलीय बदलावों के कारण समय में 1-2 मिनट का सूक्ष्म अंतर हो सकता है।)
पूजा विधि: कैसे करें भगवान गणेश की आराधना
एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर पूजा की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के साथ करनी चाहिए। भगवान गणेश की प्रतिमा को लाल वस्त्र पर स्थापित करें और उन्हें दूर्वा (घास), शमी पत्र, और लाल फूल अर्पित करें। गणपति को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाना अत्यंत प्रिय है। व्रत कथा का पाठ करें और शाम को चंद्रोदय से पहले गणेश चालीसा या ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ अवश्य करें।
व्रत के दौरान सावधानियां
- सात्विक आहार: यदि आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे हैं, तो केवल फलाहार ही ग्रहण करें। अन्न का सेवन चंद्रोदय के बाद ही करें।
- क्रोध का त्याग: चतुर्थी के दिन मन को शांत रखें और किसी के प्रति कटु वचन न बोलें।
- शुद्धता: पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और दीपक को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके न रखें।