पंजाब विधानसभा में MLA दिनेश चड्ढा ने रूपनगर की 800 एकड़ पंचायती जमीन का मुद्दा उठाया। करीब ₹1500 करोड़ की जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए कानूनी सलाह के बाद कार्रवाई का आश्वासन मिला।
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान रूपनगर के बड़े फूल गांव की पंचायती जमीन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा ने विधानसभा में इस मामले को उठाते हुए आरोप लगाया कि रूपनगर के पास करीब 800 एकड़ पंचायती जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1,500 करोड़ रुपये है, पर लंबे समय से प्रभावशाली लोगों के मालिकाना हक से जुड़ा मामला सामने आया है। विधायक ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान कई बड़े लोगों ने इस जमीन के मालिक बनकर लाभ उठाया, जबकि उन्होंने यहां खेती तक नहीं की।
विधानसभा में मुद्दा उठाने के बाद दिनेश चड्ढा ने मीडिया से बातचीत में पूरे मामले की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पंचायती जमीन का इस्तेमाल गांव और स्थानीय समुदाय के हित में होना चाहिए। यदि ऐसी जमीन पर गलत तरीके से कब्जा या मालिकाना हक कायम किया गया है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस पंचायत के नियंत्रण में लाना जरूरी है।
800 एकड़ पंचायती जमीन का मामला विधानसभा में उठा
विधायक दिनेश चड्ढा ने बताया कि बड़े फूल गांव के आसपास करीब 800 एकड़ जमीन पंचायती भूमि से संबंधित है। उनके अनुसार इस जमीन की मौजूदा अनुमानित कीमत करीब 1,500 करोड़ रुपये है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान प्रभावशाली लोगों को इस जमीन का मालिक बनाया गया, जबकि संबंधित लोगों ने जमीन पर खेती नहीं की।
उन्होंने कहा कि पंचायती जमीन गांवों की सामुदायिक संपत्ति होती है और इसका उद्देश्य ग्रामीणों के हितों की पूर्ति करना है। ऐसे में जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर किसी भी तरह की अनियमितता की जांच जरूरी है।
पंचायत मंत्री ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
ਵਿਧਾਇਕ @dineshchadha3 ਨੇ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ‘ਚ ਚੁੱਕਿਆ ਰੋਪੜ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬੜੇ ਫੂਲ ਦੀ ਪੰਚਾਇਤੀ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ ਮਸਲਾ !!
ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਤੋਂ ਪ੍ਰੈੱਸ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਦੌਰਾਨ ਦਿੱਤੀ ਜਾਣਕਾਰੀ
ਕਿਹਾ, ਰੋਪੜ ਨੇੜੇ 800 ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ, ਜਿਸਦੀ ਕੀਮਤ ₹1500 ਕਰੋੜ ਹੈ, ਦੇ ਪਿਛਲੀਆਂ ਸਰਕਾਰਾਂ ਵੇਲ਼ੇ ਕਈ ਵੱਡੇ ਲੋਕ ਬਿਨਾਂ ਖੇਤੀ ਕੀਤੇ ਮਾਲਕ ਬਣ ਗਏ। ਇਸ… pic.twitter.com/0imJMWwJAp
— AAP Punjab (@AAPPunjab) August 7, 2026
दिनेश चड्ढा के अनुसार, विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद पंचायत मंत्री की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। मंत्री ने कहा है कि पंजाब के एडवोकेट जनरल से कानूनी सलाह लेने के बाद पंचायती जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे।
विधायक ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पंचायत की जमीन को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि यदि जमीन वास्तव में पंचायत की है और उस पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है तो उसे पंचायत को वापस दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।
एडवोकेट जनरल से ली जाएगी कानूनी राय
इस मामले में आगे की कार्रवाई से पहले पंजाब के एडवोकेट जनरल से कानूनी राय लेने की बात कही गई है। विधायक के मुताबिक कानूनी सलाह मिलने के बाद सरकार यह तय करेगी कि जमीन को किस प्रक्रिया के तहत वापस पंचायत के कब्जे में लिया जा सकता है।
पंचायती जमीन से जुड़े मामलों में कानूनी दस्तावेज, पुराने रिकॉर्ड, स्वामित्व की स्थिति और कब्जे से संबंधित तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण होती है। इसलिए सरकार की ओर से कानूनी राय लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों के हित से जुड़ा है जमीन का मामला
विधायक दिनेश चड्ढा ने कहा कि पंचायती जमीन का संरक्षण सीधे तौर पर ग्रामीणों के हित से जुड़ा हुआ है। ऐसी जमीन गांव के विकास, सामुदायिक सुविधाओं और सार्वजनिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण होती है। यदि पंचायत की जमीन निजी हितों में चली जाती है तो इससे गांव के लोगों को लंबे समय में नुकसान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पंचायतों की जमीन का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से हो और किसी भी तरह के गलत कब्जे या स्वामित्व के मामले में कार्रवाई की जाए।
पिछली सरकारों की भूमिका पर उठाए सवाल
दिनेश चड्ढा ने इस मामले को लेकर पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले के शासनकाल में प्रभावशाली लोगों को पंचायती जमीन का लाभ मिला। विधायक के मुताबिक यह जांच का विषय है कि आखिर किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी जमीन का मालिकाना हक निजी लोगों के पास पहुंचा।
हालांकि इस मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और जांच प्रक्रिया के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल की राय लेने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।
सरकार से जमीन वापस लेने की उम्मीद
विधानसभा में मामला उठने के बाद अब स्थानीय स्तर पर भी इस जमीन को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि कानूनी जांच में जमीन पंचायत की संपत्ति साबित होती है और कब्जे या हस्तांतरण में अनियमितता सामने आती है, तो सरकार उसे पंचायत के नियंत्रण में वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
दिनेश चड्ढा ने कहा कि पंचायती जमीन को उसके वास्तविक उद्देश्य के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जल्द कार्रवाई करेगी और बड़े फूल गांव की पंचायती जमीन को मुक्त कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल 800 एकड़ पंचायती जमीन और करीब 1,500 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत से जुड़ा यह मामला पंजाब विधानसभा में चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर सरकार की कानूनी राय और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है।