Diabetic Ketoacidosis: डायबिटीज की गंभीर इमरजेंसी DKA क्या है? जानें लक्षण, कारण और बचाव

Diabetic Ketoacidosis: डायबिटीज की गंभीर इमरजेंसी DKA क्या है? जानें लक्षण, कारण और बचाव

 

Diabetic Ketoacidosis यानी DKA डायबिटीज की गंभीर स्थिति है। जानें DKA क्या है, इसके लक्षण, कारण, जोखिम, इलाज और इससे बचाव के जरूरी तरीके।

 

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस यानी DKA डायबिटीज से जुड़ी एक गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है। यह स्थिति तब विकसित होती है जब शरीर में पर्याप्त इंसुलिन नहीं होता और कोशिकाएं ग्लूकोज का इस्तेमाल ऊर्जा के लिए ठीक से नहीं कर पातीं। इसके बाद शरीर ऊर्जा हासिल करने के लिए फैट को तोड़ना शुरू करता है। इस प्रक्रिया में कीटोन्स बनते हैं। जब कीटोन्स खून में बहुत ज्यादा जमा होने लगते हैं, तो खून अधिक अम्लीय हो सकता है और शरीर के सामान्य कामकाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार DKA का इलाज तुरंत कराना जरूरी है।

टाइप-1 डायबिटीज में ज्यादा आम

DKA टाइप-1 डायबिटीज वाले लोगों में अधिक आम है, क्योंकि इस स्थिति में शरीर इंसुलिन का उत्पादन बहुत कम या बिल्कुल नहीं कर सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों को इसका खतरा नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में टाइप-2 डायबिटीज में भी DKA हो सकता है। संक्रमण, बीमारी, शरीर में तनाव, इंसुलिन की खुराक छूटना और कुछ दवाएं इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

कई मामलों में DKA ऐसे व्यक्ति में डायबिटीज का पहला संकेत भी हो सकता है, जिसे पहले यह पता नहीं था कि उसे डायबिटीज है। इसलिए इसके लक्षणों को पहचानना और समय पर चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है।

शरीर में कीटोन्स क्यों बढ़ने लगते हैं?

सामान्य परिस्थितियों में इंसुलिन ग्लूकोज को रक्त से कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए होता है। जब शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है, तो ग्लूकोज रक्त में बढ़ सकता है, लेकिन कोशिकाओं को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती। इसके जवाब में शरीर फैट को ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करता है और कीटोन्स बनते हैं।

थोड़ी मात्रा में कीटोन्स बनना अपने आप में DKA नहीं है, लेकिन जब इनका स्तर खतरनाक रूप से बढ़ता है, तो रक्त की अम्लता बढ़ सकती है। यही स्थिति डायबिटिक कीटोएसिडोसिस कहलाती है।

DKA के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

DKA के लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं और शुरुआत में इन्हें सामान्य कमजोरी या पेट की समस्या समझ लिया जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, मुंह का बहुत सूखना, अत्यधिक थकान, मतली, उल्टी और पेट में दर्द शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा सांस तेज या गहरी हो सकती है और सांस से फल जैसी मीठी गंध आ सकती है। गंभीर स्थिति में व्यक्ति को भ्रम, ध्यान लगाने में परेशानी या चेतना में बदलाव भी हो सकता है।

अगर डायबिटीज वाले व्यक्ति में इन लक्षणों के साथ ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है या कीटोन्स का स्तर अधिक है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। DKA तेजी से गंभीर हो सकता है और तत्काल मेडिकल मूल्यांकन की जरूरत पड़ सकती है।

किन परिस्थितियों में बढ़ सकता है जोखिम?

DKA का खतरा तब बढ़ सकता है जब शरीर में इंसुलिन की जरूरत बढ़ जाए या उपलब्ध इंसुलिन पर्याप्त न हो। बीमारी या संक्रमण के दौरान शरीर पर अतिरिक्त तनाव पड़ सकता है, जिससे ब्लड शुगर और कीटोन्स बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है। इंसुलिन की खुराक भूलना या गलत मात्रा लेना भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। डिहाइड्रेशन, लंबे समय तक बीमार रहना और कुछ दवाओं का इस्तेमाल भी कुछ लोगों में जोखिम बढ़ा सकता है।

इसलिए डायबिटीज वाले लोगों को बीमार पड़ने के दौरान अपने ब्लड ग्लूकोज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार कीटोन्स पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।

कीटोन्स की जांच कब करनी चाहिए?

यदि डायबिटीज वाला व्यक्ति बीमार महसूस कर रहा है, खासकर उसे मतली, उल्टी, अत्यधिक थकान या पेट दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार कीटोन्स की जांच उपयोगी हो सकती है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार बीमारी या हाई ब्लड ग्लूकोज की स्थिति में कीटोन्स की निगरानी DKA को शुरुआती स्तर पर पहचानने में मदद कर सकती है। इसके लिए ब्लड कीटोन मीटर या यूरिन कीटोन स्ट्रिप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि, कीटोन्स की जांच की सीमा और कितनी बार जांच करनी है, यह व्यक्ति की स्थिति और डायबिटीज उपचार पर निर्भर करता है। इसलिए अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत sick-day plan बनवाना बेहतर होता है।

DKA का इलाज कैसे किया जाता है?

DKA का इलाज घर पर खुद से करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यह मेडिकल इमरजेंसी है और आम तौर पर अस्पताल या मेडिकल सेटिंग में इलाज की आवश्यकता होती है। उपचार में शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को ठीक करने के लिए IV fluids, इंसुलिन थेरेपी और इलेक्ट्रोलाइट्स की लगातार निगरानी शामिल हो सकती है। डॉक्टर मरीज की ब्लड शुगर, कीटोन्स, इलेक्ट्रोलाइट्स और एसिड-बेस बैलेंस के आधार पर उपचार तय करते हैं।

इसलिए सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या DKA के अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।

बचाव के लिए क्या करें?

DKA के जोखिम को कम करने के लिए डायबिटीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है। इंसुलिन या अन्य निर्धारित दवाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद नहीं करना चाहिए। बीमारी के दौरान ब्लड ग्लूकोज की नियमित निगरानी, पर्याप्त हाइड्रेशन और डॉक्टर द्वारा बताए गए sick-day rules का पालन करना मददगार हो सकता है। जिन लोगों को DKA का जोखिम है, उन्हें घर पर कीटोन टेस्टिंग की सुविधा रखने के बारे में भी अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

कब तुरंत अस्पताल जाएं?

अगर किसी डायबिटीज मरीज को लगातार उल्टी हो रही है, सांस लेने में दिक्कत है, सांस असामान्य रूप से तेज या गहरी हो रही है, पेट में तेज दर्द है, बहुत ज्यादा नींद या भ्रम की स्थिति है या कीटोन्स लगातार बढ़ रहे हैं, तो इंतजार नहीं करना चाहिए। DKA की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है और गंभीर मामलों में कोमा या मृत्यु तक हो सकती है।

कुल मिलाकर DKA डायबिटीज की ऐसी जटिलता है जिसे समय पर पहचानकर गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है। टाइप-1 डायबिटीज में इसका खतरा अधिक होता है, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज वाले लोग भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। इसलिए डायबिटीज मरीजों और उनके परिवारों के लिए DKA के शुरुआती संकेतों की जानकारी रखना, बीमारी के दौरान सावधानी बरतना और गंभीर लक्षणों पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बेहद महत्वपूर्ण है।

 

 

 

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