दिल्ली में अचानक लैब सेवाएं बंद होने पर सौरभ भारद्वाज ने सरकार को घेरा। भ्रष्टाचार के आरोपों और जनता की परेशानी पर जानें पूरी रिपोर्ट।
दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गहरे संकट में घिर गई है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने ‘आरोल्य मंदिरों’, डिस्पेंसरियों और सरकारी अस्पतालों में अचानक बंद की गई लैब टेस्ट सेवाओं को लेकर रेखा गुप्ता सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में दिल्ली के 350 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 200 डिस्पेंसरियों और 28 प्रमुख सरकारी अस्पतालों में लैब टेस्ट सेवाएं अचानक बंद कर दी गईं। एक प्रोजेक्ट डायरेक्टर के ईमेल के निर्देश पर लिए गए इस फैसले ने राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि यह केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का हिस्सा है।
“भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा है यह फैसला”
सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “इन लैब सेवाओं के टेंडर में भ्रष्टाचार के आरोप लंबे समय से लग रहे थे। इसके बावजूद, रेखा गुप्ता सरकार ने लगभग एक साल तक इन शिकायतों को नजरअंदाज किया। आज जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सेवाएं बंद कर दी गईं, जिससे सीधे तौर पर दिल्ली की गरीब जनता प्रभावित हो रही है।”
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण और टेंडर प्रक्रियाओं में मनमानी के कारण दिल्ली के मरीज आज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। आप नेताओं का कहना है कि यह सरकार की विफलता है कि वह एक साल तक भ्रष्टाचार की शिकायतों पर हाथ धरे बैठी रही और अब सेवाएं बंद कर आम जनता को स्वास्थ्य अधिकार से वंचित कर रही है।
दिल्ली की जनता मांग रही जवाब
लैब सेवाएं बंद होने से दिल्ली के लाखों मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। टेस्ट कराने के लिए आम नागरिक को अब निजी लैब्स में जाकर अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। विपक्ष का सवाल है कि क्या सरकार का उद्देश्य बेहतर सेवा देना है या फिर स्वास्थ्य ढांचे को ध्वस्त कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाना है?
दिल्ली की जनता अब रेखा गुप्ता सरकार से सीधे जवाब मांग रही है कि आखिर इन सेवाओं को बिना किसी तैयारी के क्यों बंद किया गया और पिछले एक साल से भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।