दिल्ली के निजी स्कूलों में ड्रेस और किताबों के नाम पर हो रही मनमानी पर सियासी संग्राम शुरू हो गया है। अभिभावकों की शिकायतों के बीच विपक्ष ने सीएम के कार्रवाई के दावों को ‘ड्रामा’ करार दिया। जानें क्या है पूरा मामला।
दिल्ली के स्कूलों में ड्रेस-किताबों की ‘लूट’ पर छिड़ा सियासी घमासान: CM के दावों पर उठे सवाल
दिल्ली के निजी स्कूलों में किताबों, कॉपियों और ड्रेस के नाम पर अभिभावकों से की जा रही ‘वसूली’ का मुद्दा अब गरमा गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर मुख्यमंत्री के दावों को चुनौती देते हुए विपक्ष ने सरकार पर ‘सिर्फ बयानबाजी’ करने का आरोप लगाया है। अभिभावकों की शिकायतों के बीच यह सवाल उठाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के सख्त कार्रवाई के आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर बदलाव क्यों नहीं दिख रहा है?
अभिभावकों की मजबूरी और विपक्ष का ‘ड्रामा’ वाला प्रहार
“दिल्ली के लाखों अभिभावक आज भी मजबूर हैं…
बच्चों की ड्रेस, किताबें और कॉपियां सब कुछ प्राइवेट स्कूल के मालिकों की मर्जी से खरीदने का दबाव!
मुख्यमंत्री बड़े बड़े दावे कर रही हैं, कहती है कार्रवाई होगी…
पर कार्रवाई कहाँ है ?”#Delhi #EducationSystem #ParentsVoice #SchoolFees… pic.twitter.com/rfxbu3CO96— Jarnail Singh (@JarnailSinghAAP) May 2, 2026
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों में मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा गया है, “इतना ड्रामा कैसे कर लेती हैं CM साहिबा? दिल्ली के लाखों अभिभावक आज भी मजबूर हैं।” आरोपों के अनुसार, प्राइवेट स्कूल मालिकों की मर्जी के मुताबिक ही किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है कि कार्रवाई होगी, लेकिन अभिभावकों का पूछना है कि वह कार्रवाई असल में कहाँ है? यह मुद्दा सीधे तौर पर दिल्ली के मध्यम वर्ग और शिक्षा बजट से जुड़ा है।
आम आदमी पार्टी (AAP) का पक्ष: ‘कार्रवाई जारी है, भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं’
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार का कहना है कि शिक्षा निदेशालय (DoE) लगातार स्कूलों की निगरानी कर रहा है। सरकार का तर्क है कि कई स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना भी लगाया जा रहा है। AAP सरकार का दावा है कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांति की है, उसे बदनाम करने के लिए विपक्ष इस तरह के आरोप लगा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता