दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नीति सख्त होगी। सड़कों की डीप-क्लीनिंग, 150 नई इलेक्ट्रिक बसें और प्रदूषण हॉटस्पॉट पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर कार्रवाई की योजना तैयार की है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को बताया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एक अहम बैठक हुई। इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा शामिल हुए। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कार्रवाई-उन्मुख योजना पर चर्चा की गई और दिल्ली के साथ-साथ पूरे NCR की भूमिका को लेकर रणनीति तैयार की गई। सरकार का फोकस सड़क से उड़ने वाली धूल, प्रदूषण हॉटस्पॉट, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, निर्माण एवं तोड़फोड़ के मलबे और अन्य स्थानीय स्रोतों पर रहेगा।
‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नीति होगी और सख्त
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली में ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नीति को और सख्त किया जाएगा। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन की बिक्री रोकने की व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण बढ़ाना है। इसके साथ ही प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की योजना भी बनाई जा रही है।
हर पखवाड़े सड़कों की होगी डीप-क्लीनिंग
दिल्ली में सड़क की धूल को प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्थानीय स्रोत मानते हुए सरकार ने सड़कों की नियमित गहरी सफाई की योजना बनाई है। सिरसा के अनुसार, हर 15 दिन में सड़कों की डीप-क्लीनिंग करने की योजना है, ताकि सड़क पर जमा मिट्टी और धूल को हटाया जा सके। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक वाहन आधारित टीम में चार लोग होंगे। इनमें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और नगर निगम (MCD) के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जरूरत के अनुसार दिल्ली पुलिस के साथ भी समन्वय किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस तरह विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए सड़क की धूल और उससे जुड़े प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जाएगी।
ठंड से बचाव के लिए बनाए जाएंगे ‘हीटिंग स्पॉट’
सर्दियों के मौसम में प्रदूषण के साथ-साथ खुले में रहने वाले लोगों के लिए ठंड से बचाव भी एक चुनौती होती है। सिरसा ने बताया कि इस बार अस्थायी आश्रय स्थलों में ‘हीटिंग स्पॉट’ बनाए जाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इन स्थानों पर लोगों को ठंड से बचाने के लिए हीटिंग की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने ‘जीरो बर्निंग’ पहल का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, पिछली बार जरूरतमंद लोगों को हीटर उपलब्ध कराए गए थे। इस बार इसके साथ ही ऐसे स्थान विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है जहां ठंड के दौरान लोगों को सुरक्षित और गर्म वातावरण मिल सके।
दिल्ली में 150 और इलेक्ट्रिक बसें जुड़ेंगी
सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयास के तहत दिल्ली के मौजूदा इलेक्ट्रिक बस बेड़े में भी विस्तार किया जाएगा। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि फिलहाल दिल्ली में 588 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं और बेड़े में 150 और इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी जाएंगी। सरकार के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और ट्रैफिक से जुड़े प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी
दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता और ट्रैफिक जाम से जुड़े हॉटस्पॉट पर भी विशेष ध्यान देने की योजना बनाई है। सिरसा ने कहा कि इन क्षेत्रों के तीन किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है। इसके लिए वे दिल्ली के सभी 11 जिला मजिस्ट्रेटों (DM) के कार्यालयों का दौरा कर रहे हैं और संबंधित अधिकारियों के साथ स्थानीय स्तर पर समस्याओं की समीक्षा कर रहे हैं।
इस समीक्षा में श्मशान घाट, डंपिंग साइट, निर्माण स्थलों और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य इन स्थानों से होने वाले संभावित प्रदूषण की पहचान कर संबंधित विभागों के साथ मिलकर उसका समाधान करना है।
62 हॉटस्पॉट में से 42 पर नियंत्रण का दावा
मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि दिल्ली में 62 प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान की गई है। उनके अनुसार, इनमें से 42 स्थानों पर प्रदूषण का स्तर पहले ही नियंत्रण में लाया जा चुका है, जबकि बाकी हॉटस्पॉट पर काम जारी है। यह आंकड़ा मंत्री द्वारा बैठक के बाद दिए गए बयान में बताया गया है।
सरकार अब इन क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई पर जोर दे रही है। इसके तहत सड़क की सफाई, निर्माण एवं मलबे के प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और प्रदूषण के अन्य स्रोतों की निगरानी को एक साथ जोड़ा जा रहा है।
सड़कों के किनारे विकसित होंगे ‘ब्राउन पैच’
धूल को नियंत्रित करने और हरियाली बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार सड़कों के किनारे ‘ब्राउन पैच’ विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। सिरसा ने कहा कि जन-भागीदारी के जरिए इन क्षेत्रों में हरियाली विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य सड़कों के किनारे खाली या धूल वाले हिस्सों को व्यवस्थित कर मिट्टी और धूल के उड़ने की समस्या को कम करना है।
पर्यावरण मंत्री के मुताबिक, दिल्ली में डीप-क्लीनिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार की गई योजना में केंद्र, दिल्ली सरकार, नगर निगम, पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना गया है। सरकार का कहना है कि दिल्ली और NCR में प्रदूषण से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी और कार्रवाई के साथ-साथ विभागों के बीच लगातार सहयोग की जरूरत है।