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दिल्ली में फायर ऑडिट को लेकर AAP का बड़ा हमला। अंकुश नारंग की मांग के बावजूद MCD ने नहीं की कार्रवाई। जानें दिल्ली की सुरक्षा पर क्यों उठ रहे सवाल।
गोवा में हाल ही में हुए एक भीषण रेस्तरां हादसे ने देश भर में सुरक्षा मानकों को लेकर बहस छेड़ दी है। दिल्ली के संदर्भ में इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, दिल्ली नगर निगम (MCD) में विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने पहले ही आयुक्त और मेयर को पत्र लिखकर दिल्ली के होटलों, रेस्तरां और गेस्ट हाउसों में अनिवार्य फायर ऑडिट और लाइसेंस निरीक्षण की मांग की थी। हालांकि, प्रशासन की कथित लापरवाही ने राजधानी को एक बड़े खतरे के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
प्रशासन की ‘ठंडे बस्ते’ वाली नीति
गोवा के रेस्टोरेंट हादसे के बाद MCD में नेता विपक्ष @AnkushNarang_ जी ने कमिश्नर और मेयर को पत्र लिखकर दिल्ली के होटल, रेस्टोरेंट और गेस्ट हाउसों का फायर ऑडिट तथा लाइसेंस जांच कराने की मांग की थी।
अगर उस पत्र पर कार्रवाई होती और सुरक्षा जांच और ऑडिट को गंभीरता से लिया जाता, तो… pic.twitter.com/uKkEbSwDuG
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) June 5, 2026
आम आदमी पार्टी (AAP) का आरोप है कि यदि विपक्ष के नेता अंकुश नारंग द्वारा लिखे गए पत्र पर समय रहते कार्रवाई की गई होती और सुरक्षा ऑडिट को गंभीरता से लिया गया होता, तो दिल्ली में कई संभावित खतरों की पहचान पहले ही की जा सकती थी। इस उदासीनता के कारण दिल्ली में चल रहे सैकड़ों होटल और रेस्तरां बिना उचित सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं, जो कभी भी किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकते हैं।
सुरक्षा से समझौता: कौन है जिम्मेदार?
दिल्ली में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर AAP के वरिष्ठ नेता घनेंद्र भारद्वाज और अंकुश नारंग ने भाजपा शासित निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि:
- फायर ऑडिट की अनदेखी: नियमों के बावजूद, दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाकों में चल रहे गेस्ट हाउस और रेस्तरां में अग्निशमन उपकरणों की भारी कमी है।
- लाइसेंस की जांच में कोताही: बिना उचित निरीक्षण के लाइसेंस जारी करना या उन्हें नवीनीकृत करना एक बड़ी प्रशासनिक चूक है।
- जवाबदेही का अभाव: जब आपदा आती है, तो प्रशासन जागता है, लेकिन निवारक उपायों (preventive measures) को लेकर हमेशा चुप्पी साधे रखता है।
दिल्ली की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
गोवा की घटना एक सबक है कि आगजनी से बचाव के लिए केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में, जहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ रिहायशी इलाकों के करीब भी हैं, वहां फायर ऑडिट में देरी जनता की जान से खिलवाड़ के समान है। AAP ने मांग की है कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से एक विशेष अभियान चलाकर सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का फायर ऑडिट करना चाहिए और सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
क्या अब जागेगा निगम?
एमसीडी प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे इन सवालों के बीच जनता भी अब जागरूक हो रही है। आम आदमी पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए उन सभी फाइलों और पत्रों पर कार्रवाई करनी चाहिए जिन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, ताकि दिल्ली को किसी बड़ी त्रासदी से बचाया जा सके।