दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने से AQI 187 पहुंच गया है। 83 दिनों बाद राजधानी में हवा की गुणवत्ता इस स्तर पर पहुंची। नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद में भी स्थिति खराब रही।
दिल्ली में अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता एक बार फिर खराब होने लगी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के 24 घंटे के बुलेटिन के अनुसार, राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 187 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी के ऊपरी स्तर पर है। खास बात यह है कि करीब 83 दिनों बाद दिल्ली का AQI इस स्तर तक पहुंचा है। शहर के 46 सक्रिय वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 43 से मिले आंकड़ों के आधार पर PM10 को प्रमुख प्रदूषक पाया गया। हालांकि, फिलहाल दिल्ली की हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में है, लेकिन जिस तरह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, उसे आने वाले दिनों में चिंता का संकेत माना जा रहा है। सर्दियों के करीब आते ही दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका पहले से ही रहती है।
AQI की किस श्रेणी में आती है दिल्ली की हवा?
CPCB के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक 0 से 50 के बीच होने पर हवा को ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’ और 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’ माना जाता है। वहीं 201 से 300 के बीच AQI ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। दिल्ली में 187 का AQI होने का मतलब है कि राजधानी की हवा अभी ‘मध्यम’ श्रेणी में है, लेकिन इसका स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। CPCB के मुताबिक, इस श्रेणी की हवा फेफड़ों, अस्थमा और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकती है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ संवेदनशील लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
NCR के शहरों में दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषण
दिल्ली के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई शहरों में भी हवा की स्थिति खराब रही। नोएडा में AQI 281 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं गाजियाबाद का AQI 248 और फरीदाबाद का 224 रहा। इन शहरों में PM10 और PM2.5 प्रमुख प्रदूषक रहे। दूसरी ओर गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा की हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में रही। गुरुग्राम का AQI 166 और ग्रेटर नोएडा का 171 दर्ज किया गया। NCR के अलग-अलग शहरों में प्रदूषण का स्तर इस बात का संकेत देता है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता होगी।
दिल्ली में गर्म और शुष्क मौसम का असर
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के बीच मौसम भी गर्म और शुष्क बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, रविवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.2 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 23.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.5 डिग्री ज्यादा है। पिछले 24 घंटे के दौरान दिल्ली में बारिश नहीं हुई और सापेक्षिक आर्द्रता 51 प्रतिशत दर्ज की गई। मौसम की मौजूदा परिस्थितियां प्रदूषक कणों के फैलाव को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
बारिश से मिल सकती है अस्थायी राहत
मौसम विभाग के सात दिन के पूर्वानुमान के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली में आसमान मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है। मंगलवार को कुछ स्थानों पर गरज के साथ बारिश हो सकती है। बारिश होने की स्थिति में हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों के नीचे बैठने से प्रदूषण के स्तर में अस्थायी सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, इसके बाद सप्ताह के बाकी दिनों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश से मिलने वाली राहत स्थायी नहीं होती और प्रदूषण के स्रोत बने रहने पर AQI दोबारा बढ़ सकता है।
सितंबर में पांच साल का सबसे बेहतर औसत AQI
दिल्ली में हालिया प्रदूषण बढ़ने की स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सितंबर 2026 में राजधानी का मासिक औसत AQI पिछले पांच वर्षों में सबसे कम रहा था। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, सितंबर 2026 में दिल्ली का औसत AQI 102 रहा। सितंबर 2025 और 2024 में यह 105, 2023 में 108 और 2022 में 104 दर्ज किया गया था। यानी सितंबर में दिल्ली की हवा पिछले वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर रही। हालांकि, अक्टूबर की शुरुआत में AQI के बढ़कर 187 पहुंचने से संकेत मिलता है कि प्रदूषण का दबाव अब फिर बढ़ने लगा है।
2026 में 200 से नीचे AQI वाले दिनों की संख्या ज्यादा
जनवरी से सितंबर 2026 के बीच दिल्ली में ऐसे दिनों की संख्या भी सबसे ज्यादा रही, जब दैनिक औसत AQI 200 से नीचे रहा। इस अवधि में 194 दिन ऐसे दर्ज किए गए, जब हवा ‘मध्यम’ या उससे बेहतर श्रेणी में रही। वर्ष 2025 में ऐसे 187 दिन, 2024 में 188 दिन, 2023 में 193 दिन और 2022 में 146 दिन दर्ज किए गए थे। वहीं जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान ‘खराब से गंभीर’ श्रेणी वाले दिनों की संख्या भी पिछले पांच वर्षों में सबसे कम रही। इस साल ऐसे 79 दिन दर्ज किए गए, जबकि 2025 और 2024 में 86-86, 2023 में 80 और 2022 में 127 दिन दर्ज किए गए थे।
सर्दियों से पहले बढ़ी चुनौती
दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की समस्या आमतौर पर और गंभीर हो जाती है। मौसम संबंधी परिस्थितियों के साथ वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और अन्य स्थानीय स्रोत हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) विभिन्न विभागों और हितधारकों के साथ मिलकर प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और कमी के लिए कदम उठा रहा है। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, आने वाले दिनों में इन प्रयासों को और तेज किया जाएगा, ताकि दिल्ली-NCR की हवा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। फिलहाल AQI 187 पर पहुंचने के बाद राजधानी में प्रदूषण को लेकर सतर्कता बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि सर्दियों का मौसम अभी शुरू होना बाकी है और आने वाले हफ्तों में हवा की गुणवत्ता के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।