अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 पर गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सामूहिक योगाभ्यास किया। बोले – स्वस्थ शरीर से ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष संभव है। योग भारत की ऋषि परंपरा की अनुपम देन है।
11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने जनता को योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि, “धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – इन चार पुरुषार्थों की प्राप्ति स्वस्थ शरीर से ही संभव है, और यह योग के माध्यम से ही पाया जा सकता है।”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि योग भारत की ऋषि परंपरा की अनुपम देन है, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का मार्ग है। उन्होंने बताया कि आज पूरी दुनिया भारत के योग विज्ञान से जुड़कर गौरव महसूस कर रही है। 190 से अधिक देश योग का अनुसरण कर रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव का प्रतीक है।
‘योग से रोग, जरा और मृत्यु से मिलती है मुक्ति’ – सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “न तस्य रोगो, न जरा, न मृत्युः प्राप्तस्य योगाग्निमयं शरीरम्।” अर्थात योग के अभ्यास से तपे हुए शरीर में न रोग होता है, न बुढ़ापा और न ही मृत्यु भय रहता है। उन्होंने इस अवसर को गुरु गोरखनाथ की पावन भूमि पर योग करने का सौभाग्य बताया और कहा कि यह आयोजन केवल शरीर की तंदुरुस्ती का नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और विश्व कल्याण का माध्यम भी है।
पीएम मोदी का लाइव संबोधन देखा, फिर योग आसनों का अभ्यास किया
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर लाइव संदेश सुना। इसके बाद उन्होंने योग प्रशिक्षकों व साधकों के साथ विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। मुख्यमंत्री योगी के साथ इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, सांसद रवि किशन, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, व अन्य अधिकारी और स्थानीय जन प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार और मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों में एक साथ आयोजित किया गया।
योग बना भारत की वैश्विक पहचान का प्रतीक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योग को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की और कहा कि, “जब दुनिया योग को पेटेंट कराना चाहती थी, तब पीएम मोदी ने योग को वैश्विक धरोहर घोषित करवा कर भारत की अस्मिता को बचाया।” आज योग सिर्फ एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि विश्व शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना का माध्यम बन चुका है।
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