हाजीपुर में 100 एकड़ में बनेगा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी (NIFTEM)। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इसे बिहार के युवाओं और किसानों के लिए गेम-चेंजर बताया।
बिहार के लिए मील का पत्थर: हाजीपुर में NIFTEM की स्थापना को चिराग पासवान ने सराहा
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हाजीपुर में ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट’ (NIFTEM) की स्थापना की घोषणा के साथ बिहार के युवाओं और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक परिवर्तनकारी युग का सूत्रपात किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के माध्यम से पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया, क्योंकि राज्य सरकार ने इस संस्थान के लिए 100 एकड़ भूमि मुफ्त में हस्तांतरित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। पासवान के संसदीय क्षेत्र हाजीपुर में होने वाला यह रणनीतिक विकास केवल एक स्थानीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निवेश है जिसका उद्देश्य पारंपरिक खेती और आधुनिक औद्योगिक उद्यमिता के बीच की खाई को पाटना है। हाजीपुर में इस स्तर के संस्थान के आने से राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में व्यापक सुधार की नींव रखी जा रही है।
कौशल विकास और अनुसंधान के माध्यम से युवाओं का सशक्तिकरण
NIFTEM का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव बिहार के युवाओं के शैक्षणिक और व्यावसायिक सशक्तिकरण पर पड़ेगा। दशकों से, राज्य की प्रतिभाओं को विशिष्ट तकनीकी शिक्षा की तलाश में देश के अन्य हिस्सों में पलायन करना पड़ता था। राज्य के भीतर ही विश्व स्तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करके यह संस्थान इस समस्या का समाधान करेगा। इसे विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र के लिए अनुसंधान, उद्यमिता और कौशल विकास के केंद्र के रूप में डिजाइन किया गया है। विशेष पाठ्यक्रमों और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से, यह स्थानीय छात्रों को उन कौशलों से लैस करेगा जो स्टार्टअप शुरू करने या बहुराष्ट्रीय कृषि-व्यवसायों में शामिल होने के लिए आवश्यक हैं। ‘उद्यमिता’ पर इसका विशेष ध्यान यह सुनिश्चित करता है कि युवा केवल नौकरी चाहने वाले ही नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले (Job Creators) भी बनें।
कृषि-अर्थव्यवस्था और किसान कल्याण में क्रांति
अकादमिक लाभ से परे, NIFTEM बिहार के किसानों के लिए एक बेहतर वित्तीय भविष्य का वादा करता है। कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन किसान अक्सर फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान और आधुनिक तकनीकी सहायता की कमी से जूझते हैं। यह संस्थान एक सेतु के रूप में कार्य करेगा, जो किसानों को उनकी उपज को संसाधित (Process) करने के लिए उन्नत तकनीक प्रदान करेगा, जिससे फसल का बाजार मूल्य और उसकी जीवन अवधि (Shelf life) बढ़ जाएगी। चिराग पासवान ने जोर देकर कहा कि आधुनिक तकनीकी मदद से किसान अपनी फसलों के बेहतर दाम प्राप्त कर सकेंगे, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी। स्थानीय खेती के साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का यह एकीकरण बर्बादी को कम करेगा और खेत से सीधे उपभोक्ता की थाली तक एक मजबूत वैल्यू चेन तैयार करेगा।
‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को गति
हाजीपुर में NIFTEM की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के व्यापक विजन का एक स्थानीय रूप है। खाद्य प्रसंस्करण एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ भारत में अपार संभावनाएँ हैं। इस पर ध्यान केंद्रित करके, सरकार भारत को खाद्य निर्यात में वैश्विक अग्रणी बनाने का लक्ष्य रख रही है। पासवान ने उल्लेख किया कि यह संस्थान आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह कृषि आधारित उद्योग में स्वदेशी अनुसंधान और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देता है। जैसे-जैसे बिहार इस क्षेत्र में अग्रणी राज्यों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाएगा, यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान देगा और आयातित प्रसंस्कृत वस्तुओं पर देश की निर्भरता को कम करेगा।
रोजगार सृजन और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास
100 एकड़ में फैले इस राष्ट्रीय संस्थान के प्रभाव दूरगामी होंगे। परिसर के भीतर उत्पन्न होने वाले सीधे रोजगार के अलावा, NIFTEM राज्य भर में सहायक उद्योगों के विकास को गति देगा। हाजीपुर-पटना औद्योगिक बेल्ट के आसपास पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड स्टोरेज पर केंद्रित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के फलने-फूलने की संभावना है। बुनियादी ढांचे में यह निवेश हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा मिलेगा। इस तरह के प्रतिष्ठित संस्थान की उपस्थिति निजी क्षेत्र के बड़े खिलाड़ियों को भी इस क्षेत्र में अपनी विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए आकर्षित करेगी।
सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का उत्प्रेरक
निष्कर्षतः, हाजीपुर में NIFTEM की स्थापना केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा उठाया गया एक दूरदर्शी कदम है। इस परियोजना के लिए चिराग पासवान की सक्रियता तकनीकी और उद्योग-उन्मुख शासन की ओर बदलाव को दर्शाती है। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को व्यावहारिक कृषि लाभों के साथ जोड़कर, यह संस्थान बेरोजगारी और कृषि संकट की दोहरी चुनौतियों का समाधान करता है। जैसे-जैसे यह 100 एकड़ का परिसर आकार लेगा, यह बिहार की आकांक्षाओं का प्रतीक बनेगा—एक ऐसा राज्य जो खाद्य प्रौद्योगिकी और कृषि-उद्यमिता के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।