दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में व्यापार सुगमता, सर्किल रेट संशोधन, अवैध कॉलोनियों और पुनर्विकास परियोजनाओं पर चर्चा हुई। जानें बैठक के मुख्य फैसले।
दिल्ली में व्यापार को सरल बनाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में दिल्ली सरकार के वरिष्ठ मंत्री, नगर निगम, डीडीए, डीएमआरसी, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार और CII जैसे प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मुख्य बिंदु: सर्किल रेट में संशोधन और नई समिति का गठन
बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को मौजूदा सर्किल रेट की समीक्षा कर बाज़ार दरों के अनुसार संशोधित करने के निर्देश दिए। इसके लिए डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति के गठन की घोषणा की गई, जो विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी।
अवैध कॉलोनियों और पुनर्विकास पर भी विशेष जोर
बैठक में दिल्ली की अवैध कॉलोनियों, हाउसिंग सोसाइटियों, पुनर्विकास परियोजनाओं और औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी नागरिक एजेंसियों को अवैध कॉलोनियों की स्थिति सुधारने और स्वामित्व अधिकार व संपत्ति पंजीकरण से जुड़ी समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया। इसके लिए डीडीए और शहरी विकास विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है।
टास्क फोर्स की रिपोर्ट में सुझाए गए बड़े कदम
बैठक के दौरान एक टास्क फोर्स द्वारा दिल्ली के समग्र विकास के लिए निम्नलिखित प्रमुख सिफारिशें पेश की गईं:
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सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम की स्थापना
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सभी एजेंसियों के लिए一 विकास नियंत्रण मानदंड (Unified Development Control Norms)
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व्यावसायिक भूखंडों के लिए अमलगमेशन चार्ज में कटौती
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ग्रीन बिल्डिंग नीति का विस्तार
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प्रॉपर्टी टैक्स ढांचे में सुधार
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PPP मॉडल के तहत झुग्गी पुनर्विकास को बढ़ावा
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होटल व अन्य कमर्शियल प्लॉट्स के लिए FAR में संशोधन
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DMRC की भूमि का अधिकतम उपयोग
रेजिडेंशियल प्लॉट्स और पर्यावरण को लेकर बड़े सुझाव
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी सुझाव दिया कि अमलगमेशन चार्ज में कटौती केवल व्यावसायिक भूखंडों तक सीमित न हो, बल्कि इसे रेजिडेंशियल प्लॉट्स पर भी लागू किया जाए। साथ ही, ग्रीन बिल्डिंग नीतियों को आवासीय क्षेत्रों में भी अनिवार्य करने का सुझाव दिया ताकि पर्यावरण-संवेदनशील विकास को बढ़ावा मिल सके।
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