हरियाणा में ड्रोन तकनीक के जरिए आलू, चना, कपास, धान और सब्जियों की फसलों में बीमारियों की पहचान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए।
हरियाणा में कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का आगाज होने जा रहा है। अब राज्य के खेतों में ड्रोन तकनीक का उपयोग कर फसलों की बीमारियों की पहचान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को इसे एक पायलट परियोजना के रूप में लागू करने का निर्देश दिया है। शुरुआत में आलू, चना, कपास, धान और सब्जियों जैसी चार प्रमुख फसलों पर फोकस किया जाएगा।
ड्रोन इमेजिंग से फसलों का स्वास्थ्य होगा बेहतर
हरियाणा लिमिटेड के ड्रोन इमेजिंग एंड इंफॉर्मेशन सर्विसेज के बोर्ड की 9वीं बैठक चंडीगढ़ में हुई, जिसमें मुख्य सचिव राजेश खुल्लर, मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के प्रधान सचिव आशीष कुमार सिंह और विकास खुल्लर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ड्रोन की मदद से फसल रोगों का जल्दी और सटीक पता लगाकर किसानों को समय पर उचित कदम उठाने में मदद मिलेगी। इससे फसल उत्पादन और किसानों की आय में सुधार होगा।
‘ड्रोन दीदी योजना’ में भी जल्द मिलेगी तेजी
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने ‘ड्रोन दीदी योजना’ के तहत किसानों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया को तेज करने का भी निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक ड्रोन तकनीक से परिचित कराना और उनकी खेती में इसे प्रभावी रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में ड्रोन की भूमिका
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विशेष रूप से कहा कि ड्रोन का उपयोग प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। खासतौर पर जीवामृत के छिड़काव में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करके खेती को और अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-मित्र बनाया जाएगा। इसके लिए किसानों के साथ सीधे संपर्क और विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, जिससे वे नई तकनीक का सही तरीके से उपयोग कर सकें।
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