BSP के इकलौते विधायक उमा शंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। मायावती ने उन्हें समर्पित और वफादार नेता बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया और परिवार को हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।
बहुजन समाज पार्टी (BSP) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमा शंकर सिंह के निधन से पार्टी में शोक की लहर है। 55 वर्षीय उमा शंकर सिंह का बुधवार शाम लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में BSP के एकमात्र विधायक थे। उनके निधन को पार्टी के लिए बड़ी क्षति बताते हुए BSP प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि उमा शंकर सिंह ने पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ पार्टी की सेवा की। उन्होंने कहा कि रसड़ा की जनता ने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया है, जिसने हमेशा लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े होकर उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दी।
लखनऊ पहुंचकर मायावती ने दी श्रद्धांजलि
दिल्ली से उमा शंकर सिंह का पार्थिव शरीर लखनऊ लाया गया, जहां मायावती उनके आवास पहुंचीं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उमा शंकर सिंह का निधन उनके लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से अपूरणीय क्षति है।
मायावती ने कहा कि जब से उमा शंकर सिंह बहुजन समाज पार्टी से जुड़े, तब से उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाया। उन्होंने कभी भी पार्टी के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हर परिस्थिति में BSP के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखी।
‘उन्होंने कभी पार्टी से विश्वासघात नहीं किया’
मायावती ने अपने संबोधन में कहा कि उमा शंकर सिंह एक सफल व्यवसायी थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी राजनीतिक लाभ के लिए दल बदलने का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि सत्ता परिवर्तन के साथ कई नेता अपनी राजनीतिक निष्ठा बदल लेते हैं, लेकिन उमा शंकर सिंह ने ऐसा कभी नहीं किया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद उमा शंकर सिंह हमेशा BSP के साथ मजबूती से खड़े रहे। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। मायावती ने कहा कि उनकी निष्ठा और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
रक्षाबंधन पर हर साल बांधते थे राखी
मायावती ने उमा शंकर सिंह के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच केवल राजनीतिक रिश्ता ही नहीं बल्कि पारिवारिक स्नेह भी था। उन्होंने कहा कि उमा शंकर सिंह उन्हें अपनी बहन मानते थे और हर वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर उन्हें राखी बांधते थे।
मायावती ने भावुक होते हुए कहा कि हाल ही में बीमारी के बावजूद उमा शंकर सिंह उनसे मिलने के लिए स्वयं आए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने सिंह से कहा था कि वह खुद उनके घर आ जातीं, लेकिन उन्होंने आग्रह किया कि वह स्वयं मिलना चाहते हैं। मायावती ने इसे उनके स्नेह और सम्मान का प्रतीक बताया।
रसड़ा की जनता के बीच थी मजबूत पकड़
मायावती ने कहा कि उमा शंकर सिंह ने रसड़ा विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनता की सेवा की और इसी कारण उन्हें लोगों का भरपूर विश्वास मिला। उन्होंने BSP के टिकट पर जितने भी चुनाव लड़े, उनमें जनता ने उन्हें अपना समर्थन दिया।
उन्होंने कहा कि उमा शंकर सिंह हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में शामिल होते थे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर रहते थे। यही वजह थी कि रसड़ा की जनता उन्हें एक लोकप्रिय और समर्पित जनप्रतिनिधि के रूप में देखती थी।
परिवार के साथ खड़ी रहेगी BSP
उमा शंकर सिंह के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी इस कठिन समय में पूरी मजबूती से उनके परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि परिवार को किसी भी प्रकार का अकेलापन महसूस नहीं होने दिया जाएगा।
मायावती ने यह भी संकेत दिया कि यदि परिवार चाहे तो पार्टी उमा शंकर सिंह के बेटे को राजनीति में अवसर देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति की चर्चा का नहीं है, लेकिन वह परिवार को यह भरोसा दिलाना चाहती हैं कि BSP हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी रहेगी।
उन्होंने बताया कि उमा शंकर सिंह के परिवार ने हमेशा उनका सम्मान किया है और उनका बेटा तथा विवाहित बेटी भी पार्टी के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं। ऐसे में यदि परिवार की इच्छा होगी तो पार्टी उनके बेटे को पूरा राजनीतिक सहयोग देगी।
BSP के लिए बड़ी राजनीतिक क्षति
उत्तर प्रदेश विधानसभा में BSP के एकमात्र विधायक के रूप में उमा शंकर सिंह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। ऐसे समय में जब पार्टी राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, उनका निधन BSP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वे न केवल पार्टी के मजबूत चेहरे थे, बल्कि विधानसभा में BSP की आवाज भी थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके निधन के बाद रसड़ा विधानसभा सीट पर भविष्य की राजनीतिक रणनीति और उपचुनाव को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं। हालांकि फिलहाल पार्टी नेतृत्व शोक की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़ा नजर आ रहा है।
समर्पित जनसेवक के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे
उमा शंकर सिंह का निधन केवल एक विधायक का निधन नहीं, बल्कि एक ऐसे जनप्रतिनिधि का जाना है जिसने अपने राजनीतिक जीवन में संगठन, जनता और अपने सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई। मायावती ने उन्हें पार्टी का समर्पित सिपाही बताते हुए कहा कि उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी। रसड़ा की जनता, BSP कार्यकर्ता और उनके समर्थक उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में हमेशा याद रखेंगे, जिन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और अंतिम समय तक अपने क्षेत्र तथा पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा बनाए रखी।