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अभिनेता बॉबी देओल ने पिता धर्मेंद्र को खोने के बाद अपने अकेलेपन और परिवार के साथ बढ़ती नजदीकियों पर की खुलकर बात। पढ़ें उनका भावुक इंटरव्यू।
दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद उनका परिवार अभी भी इस गहरे दुख से उबरने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में एक इंटरव्यू में उनके बेटे और अभिनेता बॉबी देओल ने अपने पिता को खोने के दर्द और उसके बाद परिवार में आए बदलावों पर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि धर्मेंद्र के जाने के बाद उनके जीवन की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल गई हैं।
“सफलता का असली पैमाना परिवार है” – बॉबी देओल
‘एस्क्वायर्स इंडिया’ (Esquire India) को दिए एक साक्षात्कार में बॉबी देओल ने बताया कि पिता के जाने के बाद उन्हें समय की कीमत समझ आई है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:
“ऐसे कई दिन होते हैं जब मुझे लगता है कि काश मैं उनके पास और ज्यादा बैठा होता। काश मैंने उनसे और सवाल पूछे होते… अब मैं अपनी पत्नी, बच्चों और परिवार के साथ रहने को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक हूं। बॉक्स ऑफिस, रिव्यू और रोल… अंत में ये सब मायने नहीं रखते। सफलता इस बात से मापी जाती है कि आप अपने प्रियजनों के साथ कितना समय बिता सकते हैं। उस शोहरत और दौलत का क्या फायदा, जिसे देखने वाला आपके साथ कोई अपना न हो?”
बॉबी ने यह भी साझा किया कि वह अक्सर इंस्टाग्राम पर अपने पिता की रील्स देखते हैं। उन्होंने कहा, “वह बहुत ही बेबाक और गर्मजोशी से भरे इंसान थे। कभी-कभी उनकी वीडियो देखकर ऐसा लगता है जैसे वह सीधे मुझसे बात कर रहे हों।”
सौतेली बहनों ईशा और अहाना से बढ़ी नजदीकियां
पिता के जाने के दुख ने देओल परिवार को एक-दूसरे के करीब ला दिया है। बॉबी ने बताया कि इस क्षति ने उन्हें अपनी आधी बहनों, ईशा देओल और अहाना देओल के और करीब कर दिया है।
बॉबी ने कहा, “मुझे लगता है कि हम सभी अपने-अपने तरीके से इस दुख से निपट रहे हैं। कभी-कभी दर्द की वजह से गलतफहमियां हो जाती हैं क्योंकि हर किसी को लगता है कि उसका दुख दूसरे से ज्यादा है। लेकिन समय देने से घाव भर जाते हैं। अपनों को खोने का दुख परिवार को करीब लाने का अपना तरीका ढूंढ ही लेता है।”
धर्मेंद्र का निधन और अंतिम सफर
बॉलीवुड के ‘हीमैन’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र का निधन पिछले साल 24 नवंबर को मुंबई में उनके आवास पर हुआ था। वह 89 वर्ष के थे। ब्रीच कैंडी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह घर पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। 25 नवंबर को मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
- अंतिम फिल्म: उनकी आखिरी फिल्म श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित ‘इक्कीस’ थी, जो इस साल 1 जनवरी को रिलीज हुई।
- सम्मान: भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर याद: ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवॉर्ड्स (BAFTA) ने अपने ‘इन मेमोरियम’ सेक्शन में उन्हें श्रद्धांजलि दी। ऑस्कर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मनोज कुमार के साथ उनका नाम सम्मान के साथ शामिल किया गया।
धर्मेंद्र का जाना भारतीय सिनेमा के एक गौरवशाली अध्याय का अंत है, लेकिन उनके बेटों और परिवार के बीच बढ़ती नजदीकियां उनकी विरासत को एक नई मजबूती दे रही हैं।