बिटकॉइन में बड़ी गिरावट: $60,000 का स्तर टूटा, जानें क्या हैं बाजार की अस्थिरता के कारण

बिटकॉइन में बड़ी गिरावट: $60,000 का स्तर टूटा, जानें क्या हैं बाजार की अस्थिरता के कारण

 

बिटकॉइन गिरकर $59,000 के करीब पहुँचा। डॉलर की मजबूती और आर्थिक चिंताओं के कारण क्रिप्टो बाजार में भारी गिरावट।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गुरुवार का दिन निवेशकों के लिए काफी चिंताजनक रहा। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन ने मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण $60,000 के स्तर को तोड़ दिया और गिरकर लगभग $59,000 के बहु-वर्षीय निचले स्तर पर पहुंच गया। यह पहली बार है जब अक्टूबर 2024 के बाद बिटकॉइन इस स्तर से नीचे फिसला है। हालांकि बाद में बिटकॉइन ने थोड़ी रिकवरी की और यह $61,629.21 के आसपास कारोबार करता दिखा, लेकिन पिछले 24 घंटों में इसमें 2.09% की गिरावट दर्ज की गई है। केवल बिटकॉइन ही नहीं, बल्कि इथेरियम, बीएनबी और एक्सआरपी जैसे अन्य प्रमुख क्रिप्टो भी अस्थिरता का सामना कर रहे हैं।

डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक दबाव

बिटकॉइन की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का लगातार मजबूत होना है। ‘यूएस डॉलर इंडेक्स’ (DXY) 13 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। ऐतिहासिक रूप से बिटकॉइन और अमेरिकी डॉलर के बीच विपरीत संबंध (inverse correlation) देखा गया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो जोखिम भरी संपत्तियों (risk assets) जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कम हो जाता है। निवेशकों का मानना है कि डॉलर में यह तेजी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बढ़ते भरोसे को दर्शाती है, जिसका सीधा असर क्रिप्टोकरेंसी पर बिकवाली के दबाव के रूप में पड़ रहा है।

अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार

निवेशक वर्तमान में अत्यंत सतर्क हैं क्योंकि वे महत्वपूर्ण अमेरिकी व्यापक आर्थिक आंकड़ों (macroeconomic data) की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसमें व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मुद्रास्फीति रिपोर्ट, जीडीपी (GDP) के आंकड़े और साप्ताहिक बेरोजगारी दर के दावे शामिल हैं। ये आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की ब्याज दरों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से अधिक आते हैं, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है, जो बिटकॉइन जैसे जोखिम भरे निवेशों के लिए नकारात्मक साबित होगा।

नीतिगत अनिश्चितता और राजनीतिक कारक

बाजार की धारणा को नुकसान पहुंचाने वाला एक और प्रमुख कारक अमेरिका में नीतिगत अनिश्चितता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा उस हाउसिंग बिल पर हस्ताक्षर करने में देरी की गई है, जिसमें सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पर प्रतिबंध लगाने के प्रावधान शामिल हैं। इस देरी ने क्रिप्टो-संबंधित कानून के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं। निवेशकों को यह स्पष्टता नहीं मिल पा रही है कि आने वाले समय में क्रिप्टो के लिए नियम कितने सख्त या सरल होंगे।

बाजार के अन्य कारक: AI स्टॉक और रिटेल कैपिटल का पलायन

डेल्टा एक्सचेंज के डेरिवेटिव रिसर्च एनालिस्ट पीयूष वाल्के के अनुसार, बिटकॉइन का $60,000 से नीचे जाना केवल व्यापक आर्थिक दबाव का परिणाम नहीं है, बल्कि यह बाजार-विशिष्ट कारकों का भी मिश्रण है। उन्होंने बताया कि रिटेल निवेशकों की पूंजी का एक बड़ा हिस्सा अब क्रिप्टोकरेंसी से निकलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित शेयरों की ओर मुड़ रहा है। लोग एआई के क्षेत्र में तेजी देख रहे हैं, जिसके कारण क्रिप्टोकरेंसी से पैसा निकालकर सुरक्षित और उभरते हुए टेक्नोलॉजी सेक्टर में लगाया जा रहा है। इसके अलावा, स्ट्रेटजी इंक (Strategy Inc.) जैसी कंपनियों से जुड़े वित्तपोषण जोखिमों (financing risks) और महंगाई की चिंता ने भी बाजार में डर का माहौल पैदा किया है।

आगे की राह: निवेशक क्या करें?

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बिटकॉइन के लिए काफी निर्णायक होंगे। ‘मुडरेक्स’ (Mudrex) के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि जोखिम-मुक्त भावना (risk-off sentiment) वैश्विक बाजारों पर हावी है। निवेशकों के लिए इस समय धैर्य बनाए रखना और अमेरिकी आर्थिक डेटा पर नजर रखना सबसे जरूरी है।

तकनीकी रूप से देखें तो $60,000 का स्तर लंबे समय से एक मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर रहा था, और इसके टूटने से बाजार में और भी घबराहट बढ़ सकती है। हालांकि, बिटकॉइन में पहले भी कई बार गिरावट के बाद रिकवरी देखी गई है, लेकिन वर्तमान में मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां काफी बड़ी हैं। निवेशकों के लिए सुझाव है कि वे बाजार के इस उच्च अस्थिरता वाले दौर में पोर्टफोलियो का सही प्रबंधन करें और जल्दबाजी में कोई भी बड़ा निवेश करने से पहले बाजार के अगले संकेतों का इंतजार करें। कुल मिलाकर, बिटकॉइन इस समय एक कठिन दौर से गुजर रहा है, जहाँ उसे न केवल महंगाई, बल्कि भू-राजनीतिक और नीतिगत चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

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