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“पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी के खिलाफ नए ‘सत्कार कानून संशोधन 2026’ के लागू होने पर आनंदपुर साहिब से ‘शुकराना यात्रा’ शुरू की। जानें इस सख्त कानून और यात्रा का महत्व।
‘शुकराना यात्रा’: पंजाब में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून लागू होने पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने टेका माथा
पंजाब की राजनीति और धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को खालसा पंथ की जन्मस्थली श्री आनंदपुर साहिब से राज्यव्यापी “शुकराना यात्रा” का भव्य शुभारंभ किया। यह यात्रा पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून संशोधन 2026” की सफलता और इसके कार्यान्वयन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए आयोजित की गई है। मुख्यमंत्री के साथ इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और सांसद मलविंदर सिंह कांग भी मौजूद रहे। यात्रा को झंडी दिखाने से पहले मुख्यमंत्री ने तख्त श्री केसगढ़ साहिब में नतमस्तक होकर गुरु साहिब का आशीर्वाद लिया।
बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून: सत्कार कानून संशोधन 2026
इस ‘शुकराना यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य नए कानून के बारे में जनता को जागरूक करना और गुरु साहिब के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। पंजाब सरकार ने “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून संशोधन 2026” के माध्यम से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए कठोर प्रावधान किए हैं। इस नए कानून का लक्ष्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता सुनिश्चित करना और बेअदबी के दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त दंडात्मक कार्रवाई करना है। पंजाब की जनता लंबे समय से बेअदबी के मामलों में कड़ी सजा की मांग कर रही थी, जिसे वर्तमान सरकार ने इस विधायी संशोधन के जरिए पूरा किया है।
मान सरकार का संकल्प: गुरु साहिब की मर्यादा सर्वोपरि
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भावुक स्वर में कहा कि उनकी सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की गरिमा और पवित्रता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “पंजाब की धरती गुरुओं, पीरों और संतों की धरती है। यहाँ धार्मिक भावनाओं का सम्मान सबसे ऊपर है। बेअदबी की घटनाएं समाज के हृदय पर घाव की तरह थीं, और हमारी सरकार ने जनभावनाओं के अनुरूप काम करते हुए अब दोषियों के लिए बच निकलने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा है।” मान ने दोहराया कि यह कानून केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे धरातल पर कड़ाई से लागू किया जाएगा।
सांप्रदायिक सद्भाव और कृतज्ञता का प्रतीक
इस पहल का नाम ‘शुकराना यात्रा’ रखने के पीछे सरकार की मंशा आध्यात्मिक कृतज्ञता प्रकट करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी सरकार ने धार्मिक ग्रंथों की सुरक्षा के लिए इतना बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने केवल राजनीति की, लेकिन उनकी सरकार ने कानून बनाकर दोषियों को सजा दिलाने का रास्ता साफ किया है। आनंदपुर साहिब से शुरू हुई यह यात्रा पूरे पंजाब के विभिन्न हिस्सों से गुजरेगी, जहाँ लोगों को इस ऐतिहासिक कानून के महत्व के बारे में बताया जाएगा और गुरु साहिब की शिक्षाओं के प्रति श्रद्धा अर्पित की जाएगी।