पंजाब कैबिनेट ने चुनाव विभाग के सेवा नियमों में संशोधन को दी मंजूरी। 12 साल के अनुभव पर होगी चुनाव तहसीलदार की पदोन्नति, चुनावी प्रक्रिया होगी और भी तेज।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के चुनावी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मंत्रिमंडल ने चुनाव विभाग के सेवा नियमों में संशोधन को हरी झंडी दे दी है, जिससे विभाग में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी और रिक्त पदों को भरने का मार्ग प्रशस्त होगा।
चुनाव तहसीलदार के खाली पदों पर होगा प्रमोशन
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, चुनाव विभाग में ‘चुनाव कानूनगो’ से ‘चुनाव तहसीलदार’ के पद पर पदोन्नति के लिए आवश्यक सेवा अनुभव को 15 वर्ष से घटाकर 12 वर्ष कर दिया गया है। विभाग में चुनाव तहसीलदार के सात पद लंबे समय से रिक्त पड़े थे, और मौजूदा नियमों के तहत कोई भी कार्यरत चुनाव कानूनगो पदोन्नति के लिए पात्र नहीं था। इस संशोधन से अब योग्य कर्मचारियों की पदोन्नति हो सकेगी, जिससे चुनावी कार्यों के संचालन में आने वाली रुकावटें खत्म होंगी।
विधानसभा चुनावों और मतदाता सूची पुनरीक्षण में आएगी तेजी
आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों और वर्तमान में चल रहे ‘मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) कार्य को देखते हुए, विभाग में पर्याप्त मानव संसाधन की तत्काल आवश्यकता थी। सरकार के इस कदम से न केवल चुनावी मशीनरी को अतिरिक्त बल मिलेगा, बल्कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
जल संसाधन विभाग की वार्षिक रिपोर्ट को भी मंजूरी
कैबिनेट बैठक में चुनाव विभाग के अलावा, जल संसाधन विभाग की वर्ष 2025-26 के लिए वार्षिक प्रशासनिक रिपोर्ट को भी मंजूरी दी गई। यह रिपोर्ट वित्तीय वर्ष के दौरान विभाग के प्रशासनिक कामकाज, उपलब्धियों और कार्यप्रणाली की समीक्षा और दस्तावेजीकरण में सहायक सिद्ध होगी।
प्रशासनिक सुधारों पर सीएम मान का जोर
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पिछले कुछ दिनों से लगातार बड़े प्रशासनिक और जन-कल्याणकारी निर्णय ले रही है। हाल ही में कैबिनेट ने राज्य में ठेका प्रथा को समाप्त कर 65,000 से अधिक संविदात्मक और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। चुनाव विभाग में यह संशोधन उसी प्रशासनिक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और गति लाना है।