अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT की अंतिम रिपोर्ट यूपी सरकार के गृह विभाग ने ट्रस्ट को सौंप दी। मामले में 8 आरोपी गिरफ्तार हैं और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच अब एक अहम चरण में पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने मंगलवार को विशेष जांच दल यानी SIT की अंतिम रिपोर्ट आवश्यक कार्रवाई के बाद श्री राम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग की ओर से जरूरी प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद यह रिपोर्ट मंदिर ट्रस्ट को दी गई। इस घटनाक्रम के बाद मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर भी निगाहें अब ट्रस्ट और संबंधित अधिकारियों पर टिक गई हैं।
चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी का मामला
यह मामला अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले चढ़ावे और दान की रकम में कथित हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप है कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कुछ कर्मचारियों तथा अन्य लोगों ने कथित तौर पर दान की रकम में व्यवस्थित तरीके से गड़बड़ी की। मामले में मंदिर की दान राशि के कथित दुरुपयोग और चोरी के आरोप सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT के स्तर पर भी जांच की गई।
उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का किया था पुनर्गठन
मामले की जांच को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल का पुनर्गठन किया था। पुनर्गठित SIT में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया। इस टीम की अध्यक्षता आईजी किरण एस को सौंपी गई थी। उनके साथ अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और अयोध्या के एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को भी जांच टीम में शामिल किया गया। इससे पहले मामले की जांच कर रही SIT में लखनऊ के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत और विशेष सचिव वित्त नील रतन कुमार समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। पुनर्गठन के बाद जांच का दायरा और प्रक्रिया अधिक वरिष्ठ स्तर पर आगे बढ़ाई गई।
सुप्रीम कोर्ट में भी हुई मामले की सुनवाई
मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से SIT जांच के संबंध में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट को फिलहाल याचिकाकर्ताओं या अन्य लोगों के साथ साझा नहीं किया जा सकता। अदालत ने हालांकि याचिकाकर्ताओं और सार्वजनिक हित में सुझाव देने वाले अन्य लोगों को जांच से जुड़े अपने सुझाव सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय में देने की अनुमति दी। इन सुझावों को आगे SIT के सामने विचार के लिए रखा जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि अदालत जांच की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है।
नई SIT को फिर स्टेटस रिपोर्ट देने का निर्देश
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पुनर्गठित SIT को अगली सुनवाई की तारीख पर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। ऐसे में SIT की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपे जाने के बावजूद न्यायिक स्तर पर मामले की निगरानी और प्रक्रिया आगे जारी रहने की संभावना है। अदालत के निर्देश के बाद जांच से जुड़े तथ्यों, कार्रवाई और आगे की प्रगति पर भी ध्यान बना रहेगा।
मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी
कथित चढ़ावा घोटाले के मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमा शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमा शंकर उर्फ टिन्नू शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। जांच एजेंसियां मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान राशि के प्रबंधन से जुड़े आरोपों की पड़ताल कर रही हैं।
25 जून को दर्ज हुई थी FIR
मामले में FIR 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में दर्ज की गई थी। यह शिकायत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की ओर से दर्ज कराई गई थी। शिकायत में मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों पर कथित तौर पर साजिश और दान राशि के व्यवस्थित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आगे चलकर विशेष जांच दल को जांच की जिम्मेदारी दी गई।
मंदिर कर्मचारियों और बैंक कर्मियों पर भी आरोप
मामले में सामने आए आरोप काफी गंभीर हैं। कथित तौर पर मंदिर में चढ़ावे की रकम के प्रबंधन और गिनती की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों के साथ-साथ बैंक से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आरोपों में दान और चढ़ावे की रकम को व्यवस्थित तरीके से निकालने या उसका दुरुपयोग करने की बात कही गई है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। SIT की जांच और अदालत की निगरानी के चलते मामले से जुड़े तथ्यों की विस्तृत तस्वीर आगे और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राजनीतिक रूप से भी गरमाया मामला
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला केवल कानूनी और प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रहा है। इसे लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हुआ है। विपक्षी दलों ने मामले में उच्च स्तर पर जवाबदेही तय करने और पूरे घटनाक्रम पर व्यापक चर्चा की मांग की है। वहीं, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए भी मंदिर से जुड़े दान की रकम में कथित अनियमितताओं का मामला संवेदनशील है। राम मंदिर देश की आस्था और राजनीति दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है, इसलिए चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है।
अब आगे की कार्रवाई पर नजर
SIT की अंतिम रिपोर्ट गृह विभाग के जरिए मंदिर ट्रस्ट को सौंपे जाने के बाद अब आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की स्थिति भी इस मामले में अहम भूमिका निभाएगी। फिलहाल अदालत ने स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक रूप से साझा करने की अनुमति नहीं दी है और नई SIT से अगली सुनवाई पर रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता, जिम्मेदार लोगों की भूमिका और वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही सामने आएगी।