AAP नेता आतिशी ने एक्साइज पॉलिसी मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की सुनवाई पर सवाल उठाते हुए संभावित हितों के टकराव और न्यायिक निष्पक्षता पर चिंता जताई।
आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी ने एक्साइज पॉलिसी से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर न्यायिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट के माध्यम से दावा किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा द्वारा संबंधित मामले में असामान्य रूप से कम अंतराल पर सुनवाई की तारीखें तय की जा रही थीं, खासकर उस पुनर्विचार याचिका में जिसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ट्रायल कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद दायर किया था।
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आतिशी ने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के दोनों बच्चे – ईशान शर्मा और शंभवी शर्मा – भारत सरकार के पैनल वकीलों के रूप में सूचीबद्ध हैं और वे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि वही तुषार मेहता वर्तमान में इस संवेदनशील राजनीतिक मामले में अदालत में पेश हो रहे हैं, जिसकी सुनवाई जस्टिस शर्मा कर रही हैं।
Another explosive piece by @SauravDassss
In his previous article he showed how Justice Swarnakanta was giving unusually short dates in the Excise Policy revision petition filed by CBI, after the case was thrown out by the trial court.
This investigative piece shows that both… https://t.co/RwPuaoOYmG
— Atishi (@AtishiAAP) April 9, 2026
AAP नेता ने इस पूरे घटनाक्रम को संभावित हितों के टकराव से जोड़ते हुए कहा कि जब किसी न्यायाधीश के परिवार के सदस्य पेशेवर रूप से उस पक्ष से जुड़े हों, जो अदालत में उनके सामने उपस्थित हो, तो इससे न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह न केवल न्यायपालिका की विश्वसनीयता से जुड़ा है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को भी प्रभावित करता है।
आतिशी के इन आरोपों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कायम रह सके।